JPSC-JSSC Scam: 45 परीक्षाओं की महाजांच, ADG मनोज कौशिक के नेतृत्व में 7 IPS समेत 50 अफसरों की टीम
झारखंड में JPSC-JSSC की 45 परीक्षाओं की एक साथ जांच शुरू। ADG CID मनोज कौशिक के नेतृत्व में 7 IPS समेत करीब 50 अफसरों की टीम जांच करेगी। 2014 से अब तक हुई परीक्षाएं जांच के दायरे में।
HighLights:
- झारखंड में पहली बार एक साथ JPSC-JSSC की 45 परीक्षाओं की जांच
- ADG CID मनोज कौशिक के नेतृत्व में जांच टीम में एक IG, एक DIG और तीन SP शामिल
- दर्जनभर DSP समेत करीब 50 पुलिस पदाधिकारी जांच में जुटेंगे
- सरकार के आदेश के बाद CID जांच का दायरा और बढ़ाने की तैयारी में
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा जांच अभियान शुरू किया है। JPSC और JSSC से जुड़ी 45 परीक्षाओं को जांच के दायरे में लिया गया है। इन परीक्षाओं की एक साथ जांच की जिम्मेदारी झारखंड पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग यानी CID को दी गई है।
बताया जा रहा है कि झारखंड पुलिस और CID के लिए यह संभवतः पहला मौका है, जब इतनी बड़ी संख्या में परीक्षाओं की एक साथ जांच की जा रही है। जांच का नेतृत्व ADG CID मनोज कौशिक कर रहे हैं। मौजूदा जांच टीम में एक IG, एक DIG, तीन SP, करीब एक दर्जन DSP समेत लगभग 50 पुलिस पदाधिकारी शामिल हैं।
सरकार की ओर से 45 परीक्षाओं की जांच का आदेश जारी होने के बाद अब CID जांच टीम को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में IG, DIG, SP और DSP रैंक के और अधिकारियों को भी जांच से जोड़ा जा सकता है। जरूरत के मुताबिक विभिन्न जिलों की पुलिस से भी जांच में सहयोग लिया जाएगा।
7 IPS समेत करीब 50 अफसरों की टीम
इतने बड़े पैमाने पर जांच को देखते हुए CID ने जांच की जिम्मेदारी कई स्तरों पर बांटने की तैयारी की है। वर्तमान टीम में 7 IPS अधिकारियों के अलावा दर्जनभर DSP समेत करीब 50 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। जांच में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी का उद्देश्य अलग-अलग परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज, परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र, अभ्यर्थियों की शिकायत, परिणाम और कथित अनियमितताओं से संबंधित तमाम पहलुओं की पड़ताल करना है। सरकार के निर्देश के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आने वाले समय में और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को टीम में शामिल किया जा सकता है।
2014 से अब तक हुई परीक्षाएं जांच के घेरे में
इस पूरे मामले ने उस समय बड़ा रूप लिया, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की कि वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की जांच करायी जाएगी। इसके बाद कार्मिक विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। सरकार के इस फैसले के बाद अब उन परीक्षाओं की भी जांच का रास्ता खुल गया है, जिनको लेकर पहले से किसी तरह की शिकायत, विवाद या अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान कहीं प्रश्नपत्र, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, परिणाम, नियुक्ति अथवा अन्य स्तर पर किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई या नहीं।
कई परीक्षाएं रद्द, कई पर जांच का आदेश
सरकार के आदेश के बाद जिन परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की गई है, उनमें विश्वविद्यालयों में नॉन-टीचिंग पदों की भर्ती, सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, सरकारी पॉलिटेक्निक में लेक्चरर, मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा सिविल जज, सहायक वन संरक्षक, वन रेंज अधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर, JET, फूड एनालिस्ट, डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसीक्यूशन, प्रोजेक्ट मैनेजर, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर, कृषि अधिकारी, डेंटिस्ट, भूविज्ञानी-रसायनज्ञ और सहायक अभियंता जैसी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में हैं।
रद्द की गई प्रमुख परीक्षाएं
सरकार की कार्रवाई के दायरे में आने वाली प्रमुख परीक्षाओं में शामिल हैं—
विश्वविद्यालयों में नॉन-टीचिंग पदों की भर्ती
सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी भर्ती
ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती
सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर भर्ती
सरकारी पॉलिटेक्निक और महिला पॉलिटेक्निक में लेक्चरर भर्ती
मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर भर्ती
सिविल जज (जूनियर डिवीजन)
सहायक वन संरक्षक
वन रेंज अधिकारी
सहायक लोक अभियोजक
झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025
झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023 बैकलॉग
फूड सेफ्टी ऑफिसर
चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर
संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023
छठी लिमिटेड डिप्टी कलेक्टर भर्ती
झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट-2024
फूड एनालिस्ट
डिप्टी डायरेक्टर (प्रॉसीक्यूशन)
प्रोजेक्ट मैनेजर
फैक्ट्री इंस्पेक्टर
बॉयलर इंस्पेक्टर एवं डायरेक्टर
पांचवीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती
सिविल जज भर्ती
मृदा संरक्षण अधिकारी
कृषि अधिकारी
डेंटिस्ट
भूविज्ञानी-रसायनज्ञ
सहायक अभियंता
जांच से खुल सकते हैं कई राज
45 परीक्षाओं की एक साथ जांच शुरू होने से आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि कथित गड़बड़ियां किसी एक परीक्षा तक सीमित थीं या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो सकती है। शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की प्रकृति का पता लगाया जाएगा।
CID के सामने बड़ी चुनौती
एक साथ 45 परीक्षाओं की जांच CID के लिए भी बड़ी चुनौती है। प्रत्येक परीक्षा का अपना अलग पैटर्न, भर्ती प्रक्रिया, विज्ञापन, परीक्षा तिथि, अभ्यर्थियों की संख्या और संबंधित रिकॉर्ड है। ऐसे में जांच के लिए बड़ी संख्या में दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का परीक्षण करना होगा। इसी वजह से जांच टीम में वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर जिलों की पुलिस को भी जांच से जोड़ा जाएगा।
नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं की नजर जांच पर
JPSC और JSSC की परीक्षाओं से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है। ऐसे में 45 परीक्षाओं की जांच को लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की नजर भी CID की कार्रवाई पर है। सरकार के इस फैसले से अभ्यर्थियों में यह उम्मीद जगी है कि यदि किसी परीक्षा में वास्तव में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जांच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने के बाद ही किसी परीक्षा में वास्तविक अनियमितता की पुष्टि हो सकेगी।
झारखंड में परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
JPSC-JSSC की 45 परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाया जाना झारखंड की परीक्षा और भर्ती व्यवस्था के लिए भी बड़ा घटनाक्रम है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि CID की विस्तृत जांच में क्या सामने आता है और क्या किसी संगठित गड़बड़ी या लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय होती है। ADG CID मनोज कौशिक के नेतृत्व में शुरू हुई यह जांच झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




