जज उत्तम आनंद हत्याकांड: दोषियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद बरकरार; कहा- यह न्यायपालिका पर सीधा हमला था
झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के जज उत्तम आनंद हत्याकांड में दोषी लखन कुमार वर्मा और राहुल कुमार वर्मा की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या और न्यायपालिका पर सीधा हमला था।
HighLights:
- झारखंड हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी
- लखन कुमार वर्मा और राहुल कुमार वर्मा की अपील खारिज
- हाईकोर्ट ने कहा- यह दुर्घटना नहीं, सुनियोजित हत्या थी
- अदालत ने इसे न्यायपालिका पर सीधा हमला बताया
- सीसीटीवी, फोरेंसिक रिपोर्ट और मोबाइल कॉल डिटेल्स को माना अहम साक्ष्य
रांची/धनबाद(Threesocieties.com Desk): बहुचर्चित धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) उत्तम आनंद हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा और अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दोषी लखन कुमार वर्मा और राहुल कुमार वर्मा की अपील खारिज करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कोई सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या थी और यह न्यायपालिका पर सीधा हमला था।
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जस्टिस आर. मुखोपाध्याय और जस्टिस पी.के. श्रीवास्तव की खंडपीठ ने धनबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा 28 जुलाई 2022 को सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले और 6 अगस्त 2022 को सुनाई गई सजा को पूरी तरह सही ठहराया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि मंशा (मोटिव) के अभाव का तर्क भी महत्वहीन हो जाता है।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की अपील?
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में सीबीआई द्वारा प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, मोबाइल कॉल डिटेल्स और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य स्पष्ट रूप से यह साबित करते हैं कि ऑटो-रिक्शा चालक ने वाहन पर पूरा नियंत्रण रखते हुए जानबूझकर जज उत्तम आनंद को टक्कर मारी थी।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों की श्रृंखला इतनी मजबूत है कि यह किसी भी संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ती। इसलिए निचली अदालत द्वारा दोषियों को दी गई सजा पूरी तरह न्यायोचित है।
'मोटिव नहीं, साक्ष्य सबसे मजबूत'
फैसले में अदालत ने कहा कि जब किसी मामले में वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने मजबूत हों, तब मोटिव का अभाव दोषियों को राहत देने का आधार नहीं बन सकता। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा पर हमला थी। ऐसे मामलों में कठोर सजा आवश्यक है ताकि समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहे।
क्या हुआ था 28 जुलाई 2021 को?
28 जुलाई 2021 की सुबह लगभग पांच बजे धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद रोज की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान रणधीर वर्मा चौक के पास एक ऑटो-रिक्शा ने उन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। वीडियो में ऑटो को सड़क पर चलते जज की ओर मुड़ते हुए देखा गया, जिसके बाद हत्या की आशंका गहरा गई।
सीबीआई जांच में खुली साजिश की परतें
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार ने जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। जांच में सामने आया कि जिस ऑटो-रिक्शा से टक्कर मारी गई, उसकी चोरी की गई थी और पूरी वारदात पूर्व नियोजित थी। सीबीआई ने जांच के बाद लखन कुमार वर्मा और राहुल कुमार वर्मा को गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने सहित विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
2022 में CBI कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
धनबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 6 अगस्त 2022 को दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। विशेष अदालत ने स्पष्ट किया था कि दोनों दोषियों को बिना किसी छूट के आजीवन कारावास भुगतना होगा। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों दोषियों ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
न्यायपालिका की सुरक्षा पर फिर उठी बहस
उत्तम आनंद हत्याकांड देश के उन चर्चित मामलों में शामिल है, जिसने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इस फैसले के बाद यह संदेश गया है कि न्यायपालिका पर हमले के मामलों में अदालतें कठोर रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेंगी।




