खगड़िया में फर्जी IAS का ‘भौकाल’ खत्म: घर से शराब, कछुआ और जानवरों के अंग बरामद, आरोपी गया जेल
खगड़िया में कथित फर्जी IAS मनीष कुमार गुप्ता को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया। घर से शराब, कछुआ, जानवरों के कथित अंग, पांच मोबाइल, लैपटॉप और ‘भारत सरकार’ लिखी लग्जरी गाड़ियां बरामद हुईं। पुलिस संपत्ति और कथित नेटवर्क की जांच कर रही है।
HighLights:
- खगड़िया में कथित फर्जी IAS मनीष गुप्ता गिरफ्तार, पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया
- घर की छापेमारी में शराब, कछुआ, कथित जानवरों के अंग, पांच मोबाइल और लैपटॉप बरामद
- ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगी दो लग्जरी गाड़ियां पुलिस ने जब्त कीं
- करोड़ों की संपत्ति और महंगी गाड़ियों के स्रोत की जांच शुरू
खगड़िया (Threesocieties.com Desk): बिहार के खगड़िया जिले में खुद को आईएएस अधिकारी बताकर कथित तौर पर रौब जमाने वाले मनीष कुमार गुप्ता का ‘भौकाल’ आखिरकार पुलिस की कार्रवाई के बाद खत्म हो गया। गोगरी-जमालपुर स्थित उसके आलीशान मकान पर पुलिस और डीआईयू की टीम ने छापेमारी की। पूछताछ के बाद सोमवार को मनीष गुप्ता को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान उसके घर से शराब, संदिग्ध आईडी कार्ड, पांच मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक से जुड़े दस्तावेज, चेकबुक, डेबिट कार्ड, जानवरों के अंग और स्वीमिंग पूल से कछुआ बरामद किया गया। इसके अलावा ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगी दो लग्जरी गाड़ियों को भी जब्त किया गया है।
पुलिस अब मनीष गुप्ता की कथित तौर पर अर्जित अकूत संपत्ति, उसके संपर्कों और फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को प्रभावित करने के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप की जांच के बाद मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
खुद को IAS और NSA का अंडरकवर एजेंट बताने का दावा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान मनीष गुप्ता ने खुद को आईएएस अधिकारी बताया। इतना ही नहीं, पूछताछ के दौरान उसके द्वारा खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताए जाने की बात भी सामने आई है। जब पुलिस ने उसके दावे के समर्थन में दस्तावेज और प्रमाण मांगे तो वह कोई वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने उसके घर की तलाशी ली और कई ऐसी चीजें बरामद हुईं, जिनसे उसके कथित फर्जी अधिकारी वाले रुतबे पर सवाल खड़े हो गए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मनीष ने किस तरह और कितने समय से खुद को सरकारी अधिकारी बताकर अपना प्रभाव कायम कर रखा था।
सात घंटे चली छापेमारी, घर से निकलीं कई संदिग्ध चीजें
खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह के निर्देश पर गठित विशेष टीम और डीआईयू ने गोगरी नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-30 में कार्रवाई की। बताया जाता है कि पुलिस टीम ने दोपहर करीब दो बजे कार्रवाई शुरू की, जो रात तक चली। मनीष गुप्ता के आलीशान मकान की तलाशी के दौरान पुलिस को शराब के अलावा संदिग्ध प्रशासनिक पहचान पत्र, बैंक से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन और लैपटॉप मिले। पुलिस ने दो लग्जरी वाहनों को भी जब्त किया, जिन पर ‘भारत सरकार’ लिखा बोर्ड लगा हुआ था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन वाहनों और सरकारी पहचान से जुड़े सामान का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था।
घर से कछुआ और जानवरों के अंग मिलने से वन विभाग की भी बढ़ी चिंता
मामले में सबसे चौंकाने वाली बरामदगी में कछुआ और कथित तौर पर जानवरों के अंग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, घर में बने स्वीमिंग पूल में कछुआ भी मिला है। जानवरों के अंग और कछुआ मिलने के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जरूरत सामने आई है। पुलिस और संबंधित विभाग यह पता लगाने में जुट सकते हैं कि इन चीजों को घर में रखने का उद्देश्य क्या था और इन्हें कहां से लाया गया। इस पहलू की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत भी कोई कार्रवाई बनती है या नहीं।
करोड़ों का मकान और लग्जरी गाड़ियां बनीं जांच का बड़ा आधार
स्थानीय लोगों के अनुसार मनीष गुप्ता का गोगरी-जमालपुर में आलीशान मकान है। कोरोना काल के दौरान उसके पैतृक घर में रहने और इसके बाद आलीशान मकान तथा महंगी गाड़ियों की खरीद को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा होती रही थी। पुलिस अब उसकी संपत्ति का स्रोत खंगाल रही है। पूछताछ में मनीष ने कथित तौर पर अपनी संपत्ति का संबंध विदेश में रहने वाले अपने भाई से बताया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके नाम पर देश के अलग-अलग शहरों में कितनी संपत्ति है, संपत्ति खरीदने के लिए पैसा कहां से आया और क्या संबंधित आय एवं संपत्तियों की वैधानिक जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।
विदेश में रहने वाले भाइयों से भी जुड़ सकते हैं संपत्ति के तार
स्थानीय जानकारी के मुताबिक मनीष गुप्ता के कई भाई हैं और उनमें से कुछ विदेश में रहते हैं। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर सकती है कि मनीष की संपत्ति और आर्थिक लेनदेन में उसके परिजनों की क्या भूमिका है। पूछताछ के दौरान यदि सामने आए दावों की पुष्टि होती है तो विदेश से भारत में पैसे के लेनदेन, संपत्ति खरीद और बैंक खातों की भी जांच का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि इन सभी पहलुओं पर अंतिम तस्वीर पुलिस की विस्तृत जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
पांच मोबाइल और लैपटॉप खोलेंगे ‘बड़े राज’?
पुलिस की कार्रवाई में बरामद पांच मोबाइल फोन और लैपटॉप इस पूरे मामले की जांच में सबसे अहम कड़ी माने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मनीष गुप्ता मोबाइल फोन का लॉक बताने से परहेज कर रहा था। पुलिस अब कानूनी प्रक्रिया के तहत इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कराने की तैयारी में है। मोबाइल और लैपटॉप की जांच से उसके संपर्कों, कॉल डिटेल, मैसेज, सोशल मीडिया गतिविधियों, आर्थिक लेनदेन और सरकारी अधिकारियों अथवा अन्य प्रभावशाली लोगों से कथित संपर्कों की जानकारी सामने आ सकती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
क्या मनीष अकेला था या पीछे पूरा नेटवर्क?
मामले में पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर फर्जी IAS बनकर रौब जमाने का काम मनीष अकेले करता था या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी था। यदि जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, सरकारी पहचान का दुरुपयोग करने या लोगों को प्रभावित कर आर्थिक लाभ लेने की बात सामने आती है तो उससे जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या किसी ने उसे सरकारी अधिकारी के रूप में पहचान दिलाने या उसका प्रभाव बढ़ाने में मदद की थी।
दिल्ली से पटना तक पैरवी की चर्चा, पुलिस कर रही सत्यापन
पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा सामने आई है कि छापेमारी के दौरान मनीष गुप्ता के पक्ष में कई लोगों ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस यदि ऐसे कॉल या संपर्कों की जांच करती है तो यह पता चल सकता है कि मनीष के संपर्क किन लोगों से थे और क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने उसके पक्ष में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया था। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल की जांच इस पहलू में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
एसपी भानु प्रताप सिंह की टीम की कार्रवाई की चर्चा
मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद खगड़िया पुलिस की कार्रवाई की चर्चा हो रही है। एसपी भानु प्रताप सिंह के निर्देश पर गठित टीम ने सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की। बताया जाता है कि पुलिस को सोशल मीडिया/ऑनलाइन माध्यम से भी मनीष गुप्ता के बारे में महत्वपूर्ण सूचना मिली थी। इसके बाद सूचना का सत्यापन कराया गया और टीम बनाकर कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी अधिकारी होने का दावा किए जाने पर उसके दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है। इसी आधार पर मनीष गुप्ता के दावों की जांच की गई।
पहले क्यों नहीं खुला फर्जी IAS का राज?
मनीष गुप्ता के लंबे समय से कथित तौर पर अधिकारी जैसा रौब कायम रखने के दावे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने समय तक उसकी गतिविधियों पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी। स्थानीय लोगों के बीच उसके आलीशान मकान, महंगी गाड़ियों और अधिकारी जैसे व्यवहार को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने खुद को सरकारी अधिकारी साबित करने के लिए किन दस्तावेजों या पहचान का इस्तेमाल किया और उसके इस कथित फर्जीवाड़े से कितने लोग प्रभावित हुए।
दो केस दर्ज, जांच का दायरा बढ़ा
मामले में पुलिस ने उत्पाद अधिनियम समेत अन्य धाराओं के तहत दो मामले दर्ज किए हैं। पुलिस अब बरामद सामान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। मनीष गुप्ता को पूछताछ के बाद सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब पुलिस की जांच का फोकस उसकी संपत्ति, मोबाइल और लैपटॉप, बैंकिंग लेनदेन, वाहनों, कथित फर्जी पहचान और संपर्कों पर है।
कई बड़े नाम सामने आने की संभावना
जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि मनीष गुप्ता ने कथित तौर पर फर्जी IAS बनकर कितने समय तक अपना प्रभाव कायम रखा और इस दौरान उसका संपर्क किन लोगों से रहा। मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच के बाद यदि कोई आपत्तिजनक या महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलता है तो पुलिस आगे संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है।
फिलहाल पुलिस ने मनीष गुप्ता को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संपत्ति की जांच के बाद इस कथित फर्जी IAS मामले में कितने नए चेहरे और कितने बड़े राज सामने आते हैं।
Anjala Kumar 



