राजीव से प्यार, परिवार की त्रासदी और PM पद का फैसला… सोनिया गांधी खोलेंगी जिंदगी के अनकहे राज

सोनिया गांधी की संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। किताब में राजीव गांधी से मुलाकात और प्यार, नेहरू-गांधी परिवार में जीवन, इंदिरा व राजीव गांधी की हत्या के बाद बदली जिंदगी और 2004 में PM पद ठुकराने के फैसले से जुड़े अनुभव सामने आएंगे।

राजीव से प्यार, परिवार की त्रासदी और PM पद का फैसला… सोनिया गांधी खोलेंगी जिंदगी के अनकहे राज
सोनिया गांधी की कलम से सामने आएगी जिंदगी की अनकही कहानी।

Advertisement

      HighLights:

  • सोनिया गांधी की संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी
  • किताब की शुरुआत 1965 के कैम्ब्रिज दौर और राजीव गांधी से मुलाकात की कहानी से होती है
  • इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के बाद बदली जिंदगी के अनुभव भी संस्मरण में शामिल हैं
  • 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले पर भी सोनिया गांधी अपना पक्ष रखेंगी

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी अब अपनी जिंदगी के उन पहलुओं को किताब के जरिए सामने रखने जा रही हैं, जिन पर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में बेहद कम बात की है। उनकी संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ ने इसकी घोषणा की है।

किताब में सोनिया गांधी अपने बचपन, कैम्ब्रिज में बिताए दिनों, राजीव गांधी से मुलाकात और प्रेम, भारत आने, नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने तथा परिवार में हुई त्रासदियों के बाद बदलती जिंदगी की कहानी अपने नजरिये से बताएंगी।

सबसे ज्यादा दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि संस्मरण में 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले से जुड़े अनुभव भी शामिल हैं। यानी वह दौर, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद की सबसे प्रमुख दावेदार थीं, लेकिन अंततः डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया।

कैम्ब्रिज से शुरू होगी प्रेम कहानी

संस्मरण की शुरुआत 1965 के कैम्ब्रिज से होती है। उस समय सोनिया मेनो 19 वर्ष की थीं और अंग्रेजी की पढ़ाई कर रही थीं। वहीं उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। राजीव उस समय कैम्ब्रिज में पढ़ रहे थे और राजनीति की बजाय अपने निजी जीवन और विमान उड़ाने में अधिक रुचि रखते थे।

भारत सरकार की राजीव गांधी की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, राजीव और सोनिया की मुलाकात कैम्ब्रिज में हुई थी और दोनों ने 1968 में शादी की। शादी के बाद सोनिया भारत आ गईं और इंदिरा गांधी के परिवार का हिस्सा बन गईं। सोनिया के संस्मरण में इसी प्रेम कहानी से आगे बढ़ते हुए यह बताया जाएगा कि एक इतालवी युवती किस तरह भारत आई और धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति, परिवार और सार्वजनिक जीवन से जुड़ती चली गई।

इटली के बचपन से भारत को अपना घर बनाने तक

सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के लुसियाना में हुआ था। संसद की आधिकारिक प्रोफाइल में उनका नाम सोनिया गांधी और जन्मस्थान लुसियाना, इटली दर्ज है। उनकी शादी राजीव गांधी से 25 फरवरी 1968 को हुई थी। किताब में उनके युद्धोत्तर इटली के बचपन से लेकर इंग्लैंड पहुंचने और फिर भारत आने तक की यात्रा को विस्तार से बताया गया है। सोनिया के मुताबिक, उनकी कहानी केवल राजनीति की कहानी नहीं है, बल्कि प्यार, परिवार, पहचान, कर्तव्य और भारत को अपना घर बनाने की यात्रा भी है।

इंदिरा गांधी से रिश्ता और प्रधानमंत्री आवास की जिंदगी

भारत आने के बाद सोनिया गांधी का रिश्ता इंदिरा गांधी से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। राजीव गांधी और सोनिया गांधी अपने बच्चों राहुल और प्रियंका के साथ इंदिरा गांधी के आसपास रहे। राजीव गांधी की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, राजीव और सोनिया की शादी के बाद दोनों ने अपने बच्चों के साथ इंदिरा गांधी के आवास में भी जीवन बिताया। राजीव उस समय राजनीति से दूर रहते हुए इंडियन एयरलाइंस के पायलट थे। संस्मरण में इस निजी पारिवारिक जीवन के कई ऐसे पहलुओं पर रोशनी पड़ सकती है, जो अब तक सार्वजनिक चर्चा में सीमित रहे हैं।

इंदिरा गांधी की हत्या ने बदल दी जिंदगी

31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी अचानक देश के प्रधानमंत्री बने। सोनिया गांधी की निजी जिंदगी भी इसी घटना के बाद पूरी तरह बदल गई। राजीव गांधी की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद संभाला और बाद में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को ऐतिहासिक बहुमत मिला। सोनिया के लिए यह सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं था। परिवार के भीतर हुई इस त्रासदी ने उनके निजी जीवन पर भी गहरा असर डाला।

फिर 1991 में राजीव गांधी की हत्या

इंदिरा गांधी की हत्या के करीब सात साल बाद 21 मई 1991 को राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई। इसके बाद सोनिया गांधी के जीवन में दूसरी बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी आई। किताब में इन दोनों हत्याओं के बाद उनके भीतर आए बदलाव, परिवार को संभालने की कोशिश और सार्वजनिक जीवन से उनके रिश्ते को लेकर कई अनुभव सामने आने की उम्मीद है। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, संस्मरण में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्याओं के बाद के भावनात्मक और राजनीतिक संघर्षों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

पति की हत्या के बाद भी तत्काल राजनीति में नहीं आईं

राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने तुरंत सक्रिय राजनीति में कदम नहीं रखा। उन्होंने लंबे समय तक निजी जीवन को प्राथमिकता दी। बाद में कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति और पार्टी के भीतर बढ़ते संकट के बीच उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और लंबे समय तक पार्टी का नेतृत्व किया। वह कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक पार्टी अध्यक्ष रहने वाली नेताओं में शामिल हैं।

2004 का सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला—PM पद से इनकार

सोनिया गांधी की किताब का सबसे चर्चित हिस्सा 2004 के लोकसभा चुनाव और प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के उनके फैसले से जुड़ा हो सकता है। 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को सत्ता में आने का अवसर मिला। सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं और गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम स्वाभाविक रूप से सामने आया। लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया और डॉ. मनमोहन सिंह के नाम का समर्थन किया। इस फैसले को लेकर उस समय देश की राजनीति में जबरदस्त बहस हुई थी। सोनिया के विदेशी मूल को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए थे। हालांकि, किताब में सोनिया गांधी इस फैसले को किस तरह देखती हैं और उनके अपने शब्दों में इसके पीछे क्या सोच थी, यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।

‘PM क्यों नहीं बनीं’—अब सोनिया की अपनी कहानी

सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद से पीछे हटने को लेकर पिछले दो दशक में कई राजनीतिक व्याख्याएं सामने आती रही हैं। लेकिन अब पहली बार इस घटनाक्रम को लेकर सोनिया गांधी की अपनी स्मृतियां और दृष्टिकोण सामने आने वाला है। यही वजह है कि ‘Belonging: A Journey of Love’ के सबसे चर्चित हिस्सों में 2004 का राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। किताब में यह जानने का अवसर मिलेगा कि उस समय सोनिया गांधी के सामने क्या परिस्थितियां थीं और उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने का निर्णय किस नजरिये से लिया।

मनमोहन सिंह और सत्ता के सवाल पर भी रहेगी नजर

2004 के बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व करती रहीं। इस दौर को लेकर भी वर्षों से राजनीतिक बहस होती रही है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब ‘The Accidental Prime Minister’ में 2004 के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के बीच सत्ता-संबंधों को लेकर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था। अब सोनिया गांधी की अपनी पुस्तक आने के बाद उस दौर को उनके नजरिये से देखने की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।

‘यह किताब परिवार की इंसानियत को समर्पित है’

सोनिया गांधी ने किताब के बारे में कहा है कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनके फैसलों, इरादों और मानवीय कमजोरियों को समझने की कोशिश अपेक्षाकृत कम हुई है। उनके अनुसार, यह पुस्तक उनके परिवार के मानवीय पक्ष को सम्मान देने के साथ-साथ भारत में पिछले करीब छह दशकों में हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को उनके व्यक्तिगत नजरिये से देखने का अवसर देती है।

निजी जिंदगी से सार्वजनिक जीवन तक की यात्रा

‘Belonging’ का सबसे अहम पहलू यही है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक संस्मरण नहीं होगा। इसमें एक ऐसी महिला की यात्रा दिखाई देगी, जो इटली के एक साधारण पारिवारिक माहौल से निकलकर भारत आई, राजीव गांधी से शादी की, नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनी और फिर एक के बाद एक पारिवारिक त्रासदियों का सामना किया। इसके बाद वही सोनिया गांधी भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हुईं और कांग्रेस का लंबे समय तक नेतृत्व किया।

छह दशकों के भारत को देखने का अलग नजरिया

सोनिया गांधी के मुताबिक, किताब में उनके निजी जीवन के साथ-साथ उस भारत की कहानी भी है, जिसे उन्होंने करीब छह दशकों तक करीब से देखा। 1960 के दशक का भारत, राजीव गांधी के साथ पारिवारिक जीवन, इंदिरा गांधी का दौर, 1984 की त्रासदी, राजीव गांधी का प्रधानमंत्री बनना, 1991 का हादसा, कांग्रेस में वापसी, 1998 के बाद पार्टी का नेतृत्व और 2004 में सत्ता में लौटना—इन सभी घटनाओं के बीच सोनिया गांधी स्वयं मौजूद रहीं। अब इन घटनाओं को एक इतिहासकार, पत्रकार या राजनीतिक विरोधी नहीं, बल्कि खुद सोनिया गांधी अपनी नजर से लिखेंगी।

10 नवंबर को सामने आएगी किताब

अल्फ्रेड ए. नॉफ की घोषणा के मुताबिक ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। भारत में पुस्तक के प्रकाशन और उपलब्धता की तारीख को लेकर अलग से जानकारी आने की संभावना है। किताब के सामने आने के बाद यह देखना खास होगा कि सोनिया गांधी अपने जीवन के किन विवादित अध्यायों पर खुलकर लिखती हैं और किन सवालों पर पहली बार अपना पक्ष रखती हैं।

राजीव गांधी से मुलाकात और प्रेम से शुरू हुई कहानी अब राजनीति के सबसे बड़े सवालों—परिवार की त्रासदियां, कांग्रेस का नेतृत्व और 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने के फैसले—तक पहुंचेगी। ऐसे में ‘Belonging: A Journey of Love’ के नवंबर में आने का इंतजार राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम पाठकों को भी रहेगा।