कोल इंडिया में अधिकारियों की भर्ती और प्रशिक्षण के नियमों में बड़ा बदलाव, अब E-1 से शुरू होगा करियर

Coal India Recruitment Rules 2026: कोल इंडिया ने अधिकारियों की भर्ती, प्रशिक्षण और शुरुआती पदोन्नति के नियम बदल दिए हैं। अब सभी नए अधिकारी E-1 से शुरुआत करेंगे। छह महीने बाद E-2 और एक साल बाद 3% वेतनवृद्धि के साथ स्थायी नियुक्ति होगी। प्रशिक्षण में 60% अंक जरूरी होंगे।

कोल इंडिया में अधिकारियों की भर्ती और प्रशिक्षण के नियमों में बड़ा बदलाव, अब E-1 से शुरू होगा करियर
कोल इंडिया में अधिकारियों की भर्ती के नियम बदले।

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     HighLights:

  • कोल इंडिया में अब मेडिकल और नॉन-मेडिकल नये अफसर E-1 ग्रेड से करेंगे शुरुआत
  • छह महीने का प्रशिक्षण पूरा करने पर E-2 में नियुक्ति,
  • एक साल पूरा होने पर E-2 में स्थायी नियुक्ति और 3% वेतनवृद्धि
  • प्रशिक्षण-सह-परीवीक्षा में 100 में से कम से कम 60 अंक जरूरी

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  कोल इंडिया लिमिटेड ने अधिकारियों की भर्ती, प्रशिक्षण और शुरुआती पदोन्नति से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी की 14 अगस्त 2026 को हुई 493वीं बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर 17 अगस्त को नया कार्यालय आदेश जारी किया गया है। नए प्रावधानों के तहत अब कार्यकारी संवर्ग में होने वाली नई नियुक्तियों, प्रशिक्षण और शुरुआती पदक्रम की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब चिकित्सा और गैर-चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में नियुक्त होने वाले सभी नए अधिकारी E-1 ग्रेड से अपने करियर की शुरुआत करेंगे। इससे पहले कुछ चिकित्सा श्रेणियों में सीधे E-2 और E-3 ग्रेड में नियुक्ति का प्रावधान था। E-1 ग्रेड का वेतनमान 60,000 रुपये से 1.80 लाख रुपये निर्धारित है। नए नियमों के तहत शुरुआती नियुक्ति के बाद अधिकारियों को निर्धारित प्रशिक्षण और परीवीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

छह महीने बाद E-2 में नियुक्ति

गैर-चिकित्सा क्षेत्र के नए अधिकारियों को पहले छह महीने तक E-1 ग्रेड में प्रबंधन प्रशिक्षु या अधिकारी प्रशिक्षु के तौर पर काम करना होगा। छह महीने का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्हें E-2 ग्रेड में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा।E-2 ग्रेड का वेतनमान 70,000 रुपये से 2 लाख रुपये है। हालांकि, छह महीने बाद E-2 में नियुक्ति के समय तत्काल वेतनवृद्धि नहीं मिलेगी।इसके बाद अधिकारी को शेष छह महीने का प्रशिक्षण-सह-परीवीक्षा काल पूरा करना होगा। यानी E-2 में छह महीने की नियुक्ति के बाद भी अधिकारी की नियुक्ति तत्काल स्थायी नहीं मानी जाएगी।

एक साल बाद स्थायी नियुक्ति, 3% वेतनवृद्धि

एक वर्ष की अवधि पूरी होने, प्रशिक्षण समाप्ति परीक्षा पास करने और जरूरी स्वीकृतियां मिलने के बाद अधिकारी को E-2 में स्थायी नियुक्ति दी जाएगी। स्थायी नियुक्ति के साथ अधिकारी के मूल वेतन पर 3 प्रतिशत की वेतनवृद्धि का प्रावधान किया गया है। इसके बाद प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को नियमानुसार वार्षिक वेतनवृद्धि मिलेगी। इस तरह नए अधिकारियों के लिए पहले वर्ष को प्रशिक्षण, व्यावहारिक अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने की महत्वपूर्ण अवधि बनाया गया है।

मेडिकल अधिकारियों के लिए भी E-1 अनिवार्य

नए नियमों का असर चिकित्सा अधिकारियों पर भी पड़ेगा। अब मेडिकल क्षेत्र में नियुक्त होने वाले नए अधिकारियों को भी E-1 ग्रेड से शुरुआत करनी होगी। छह महीने तक प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर उन्हें E-2 में नियुक्त किया जाएगा और मूल वेतन पर 3 प्रतिशत की वेतनवृद्धि मिलेगी। हालांकि, तीन वर्ष का निर्धारित अनुभव रखने वाले चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए आगे E-3 ग्रेड में नियुक्ति का अवसर उपलब्ध रहेगा।

माइनिंग अधिकारियों के लिए दक्षता प्रमाणपत्र जरूरी

खनन क्षेत्र के अधिकारियों के लिए भी नए नियमों में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। E-2 से E-3 में जाने के लिए द्वितीय श्रेणी खान प्रबंधक दक्षता प्रमाणपत्र जरूरी होगा। यह प्रमाणपत्र खुले और भूमिगत दोनों तरह की खदानों के लिए मान्य होना चाहिए। हालांकि, प्रबंधन प्रशिक्षु प्रशिक्षण और भारतीय खान प्रबंधन संस्थान की समाप्ति परीक्षा सफलतापूर्वक पास करने वाले अधिकारियों को प्रमाणपत्र की प्रतीक्षा किए बिना E-3 में नियुक्त किया जा सकता है। लेकिन E-4 में पदोन्नति के लिए दक्षता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

शुरुआती छह महीने फील्ड में करना होगा काम

नॉन-मेडिकल क्षेत्र में नियुक्त होने वाले नए अधिकारियों के लिए शुरुआती छह महीने की तैनाती को लेकर भी नया नियम लागू किया गया है। इन अधिकारियों को अपने शुरुआती छह महीने परिचालन इकाइयों या संबंधित क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से काम करना होगा। इस अवधि में उन्हें मुख्यालय में तैनाती नहीं दी जाएगी।

कोल इंडिया की इस व्यवस्था का उद्देश्य नए अधिकारियों को कंपनी के वास्तविक और जमीनी कामकाज का अनुभव देना है। इससे अधिकारियों को खनन, उत्पादन और संबंधित परिचालन गतिविधियों की व्यावहारिक समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, दिव्यांगता वाले अधिकारियों को परिस्थितियों के अनुसार क्षेत्रीय तैनाती से छूट दी जा सकती है और उनके लिए वैकल्पिक कार्य अनुभव की व्यवस्था की जा सकेगी।

प्रशिक्षण में 100 अंक, 60 अंक लाना अनिवार्य

नए अधिकारियों के लिए निर्धारित एक वर्ष के प्रशिक्षण-सह-परीवीक्षा कार्यक्रम में प्रदर्शन का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर किया जाएगा। इस मूल्यांकन में प्रशिक्षण, काम के दौरान कौशल विकास, विभागीय और अंतर-विभागीय परियोजनाओं तथा प्रशिक्षण समाप्ति परीक्षा जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए अधिकारी को 100 में कम से कम 60 अंक हासिल करना अनिवार्य होगा। इससे अधिकारियों की स्थायी नियुक्ति में केवल प्रशिक्षण पूरा करना ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन और परीक्षा में निर्धारित स्तर हासिल करना भी महत्वपूर्ण हो गया है।

किन भर्तियों पर लागू होंगे नए नियम?

कोल इंडिया के नए प्रावधान 14 अगस्त 2026 या उसके बाद जारी विज्ञापनों के तहत होने वाली बाहरी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों पर लागू होंगे। इसके अलावा GATE-2025 के विज्ञापन संख्या 01/2026 और कंप्यूटर आधारित परीक्षा-2026 के विज्ञापन संख्या 03/2026 के माध्यम से होने वाली नियुक्तियां भी नए नियमों के दायरे में आएंगी। यानी इन भर्तियों के माध्यम से कोल इंडिया में अधिकारी बनने वाले उम्मीदवारों को नई ग्रेड, प्रशिक्षण, परीवीक्षा, मूल्यांकन और पदोन्नति व्यवस्था का पालन करना होगा।

अधिकारियों के करियर की नई शुरुआत

कोल इंडिया के इस बदलाव से अधिकारियों के शुरुआती करियर की संरचना पहले की तुलना में अधिक चरणबद्ध हो गई है। अब नए अधिकारियों को सीधे ऊंचे ग्रेड में नियुक्त करने के बजाय E-1 से शुरुआत, प्रशिक्षण, फील्ड अनुभव, मूल्यांकन और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने की व्यवस्था होगी। खासकर नॉन-मेडिकल अधिकारियों के लिए शुरुआती छह महीने फील्ड में काम और एक वर्ष के प्रशिक्षण-सह-परीवीक्षा काल को अनिवार्य किए जाने से कंपनी में नए अधिकारियों के व्यावहारिक अनुभव पर जोर बढ़ा है।

वहीं, 60 प्रतिशत न्यूनतम अंक की अनिवार्यता से प्रशिक्षण के दौरान प्रदर्शन को भी करियर की अगली प्रक्रिया से सीधे जोड़ा गया है। कुल मिलाकर कोल इंडिया की नई व्यवस्था में भर्ती से लेकर स्थायी नियुक्ति और शुरुआती पदोन्नति तक अधिकारियों के प्रशिक्षण, प्रदर्शन और व्यावहारिक अनुभव को अधिक महत्व दिया गया है।