जंतर-मंतर मारपीट केस में स्वतंत्र भारद्वाज को बड़ी राहत, 3 हफ्ते की अंतरिम बेल
जंतर-मंतर मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी और सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई।
HighLights:
- पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी
- अदालत ने कहा- नियमित जमानत पर विचार से पहले आरोपी के आचरण को देखा जाएगा
- कोर्ट ने केस से जुड़े किसी भी मामले पर सोशल मीडिया पोस्ट करने पर रोक लगाई
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत ने मंगलवार को स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमित जमानत पर फैसला लेने से पहले वह इस अवधि में आरोपी के आचरण को देखना चाहती है। अंतरिम राहत के साथ अदालत ने एक अहम शर्त भी लगाई है। स्वतंत्र भारद्वाज को इस केस से संबंधित कोई भी पोस्ट सोशल मीडिया पर करने से रोक दिया गया है।
50 हजार रुपये के बॉन्ड पर मिली अंतरिम राहत
अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को 50 हजार रुपये के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि की जमानत पर तीन सप्ताह की अंतरिम राहत दी। कोर्ट ने संकेत दिया कि अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान उनके आचरण को देखते हुए नियमित जमानत की याचिका पर आगे विचार किया जाएगा। यह मामला जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक दलित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के पिता के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है। पुलिस ने मामले की जांच के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष ने कहा- शिकायतकर्ता ने ही किया था हमला
सुनवाई के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से पेश वकील ने गिरफ्तारी और पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठाए। बचाव पक्ष का दावा था कि जिस घटना को लेकर उनके मुवक्किल के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसमें शिकायतकर्ता ने ही पहले स्वतंत्र भारद्वाज पर हमला किया था। वकील ने अदालत में सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि वीडियो में घटना का पूरा क्रम देखा जा सकता है। उनके मुताबिक, वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज के गिरने और पुलिस द्वारा उन्हें बचाने की तस्वीरें भी दिखाई देती हैं।
कोर्ट ने खुद चलवाए घटना के वीडियो
बचाव पक्ष की दलीलों के बाद अदालत ने घटना से जुड़े वीडियो क्लिप चलवाकर देखे। वकील ने सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर वीडियो उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस की जांच में इन वीडियो को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं दिया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि स्वतंत्र भारद्वाज को पहले पूछताछ के लिए बुलाया गया था और वह पुलिस के सामने पेश भी हुए थे। वकील के अनुसार, इसके बाद कुछ राजनीतिक घटनाक्रम हुए और फिर 4 सितंबर को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जातिसूचक गाली के आरोप पर भी कोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस से यह भी पूछा कि घटना के समय क्या स्वतंत्र भारद्वाज ने जातिसूचक गाली दी थी। पुलिस की ओर से बताया गया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक गाली का उल्लेख नहीं था। बाद में दोबारा बयान दर्ज किए जाने पर इस तरह के आरोप का जिक्र किया गया। इसी आधार पर मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़े जाने की बात सामने आई। अदालत ने इस पहलू को भी सुनवाई के दौरान गंभीरता से देखा।
पुलिस की जांच में खामियों की बात
अदालत ने सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने जांच में कई खामियों की ओर संकेत किया। इसी बीच अदालत ने आरोपी को फिलहाल तीन सप्ताह की अंतरिम राहत देने का फैसला किया। हालांकि, यह राहत अंतिम या नियमित जमानत नहीं है। अदालत ने साफ किया है कि अंतरिम जमानत की अवधि में आरोपी के आचरण को देखते हुए नियमित जमानत पर आगे विचार किया जाएगा।
4 सितंबर को बुलंदशहर से हुई थी गिरफ्तारी
स्वतंत्र भारद्वाज को इस मामले में 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दिल्ली पुलिस की एक दिन की रिमांड मंजूर की थी। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 7 सितंबर को उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उनकी हिरासत की अवधि 21 सितंबर तक बढ़ाई गई थी।
CJP ने की थी गिरफ्तारी की मांग
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सीजेपी की ओर से दिल्ली में प्रदर्शन भी किया गया था। संगठन के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन करते हुए जंतर-मंतर की घटना को लेकर कार्रवाई की मांग की थी। सीजेपी और आजाद समाज पार्टी की ओर से भी पुलिस के समक्ष एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया और उनकी गिरफ्तारी हुई।
अब तीन सप्ताह बाद क्या होगा?
पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को फिलहाल तीन सप्ताह की अंतरिम राहत मिल गई है। लेकिन उनके लिए राहत पूरी तरह अंतिम नहीं है। अदालत ने अंतरिम जमानत के दौरान उनके आचरण को महत्वपूर्ण माना है और सोशल मीडिया पर केस से संबंधित पोस्ट करने पर रोक लगा दी है। तीन सप्ताह की अवधि पूरी होने के बाद अदालत नियमित जमानत की याचिका पर आगे विचार करेगी। ऐसे में अब इस मामले में अगली सुनवाई और अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Threesocieties News Desk 



