पेपर लीक पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा वार: 10 साल जेल, 10 करोड़ जुर्माना; कैबिनेट ने दी संशोधन बिल को मंजूरी
NEET पेपर लीक विवाद के बीच मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है। नए कानून में दोषियों को 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए तीन महीने में सजा का प्रावधान होगा। पढ़ें पूरी खबर।
HighLights:
- पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
- सरकार अगले सप्ताह मानसून सत्र में संसद में पेश करेगी संशोधित विधेयक
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट तीन महीने के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे
- NEET पेपर लीक मामले की CBI जांच जारी, अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): देशभर में NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और अधिक सख्त बनाने वाले संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई।
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सरकार इस संशोधित विधेयक को अगले सप्ताह संसद के मानसून सत्र में पेश करेगी। संशोधन के बाद पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।
10 साल की जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना
संशोधित कानून के तहत पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोह, मास्टरमाइंड और आर्थिक लाभ उठाने वालों पर 10 साल तक की कठोर कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इस सख्ती से परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी रोक लगेगी और युवाओं का भरोसा परीक्षा व्यवस्था में मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को दिया भरोसा
कैबिनेट बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य अपराध नहीं बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ महीनों में पेपर लीक के मामलों में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार कराया है और दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाने की कार्रवाई जारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों का एक वर्ष बर्बाद होने से बचाना थी। इसी कारण कम समय में 22 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा आयोजित कराई गई और निर्धारित समय पर परिणाम भी घोषित किए गए।
तीन महीने में फैसला देंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट
सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का भी फैसला किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ऐसे मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर होगी और अदालतों को तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का लक्ष्य दिया जाएगा। इससे वर्षों तक मुकदमे लंबित रहने की समस्या कम होगी।
जंतर-मंतर पर जारी है प्रदर्शन
NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी लंबा अनशन किया था। संसद के भीतर और बाहर भी इस मामले को लेकर लगातार राजनीतिक बहस जारी है।
CBI की जांच जारी, कई आरोपी गिरफ्तार
पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी अब तक विभिन्न राज्यों से 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में कई राज्यों में फैले संगठित नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
वर्तमान कानून में क्या है प्रावधान?
देश में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 पहले से लागू है। इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 21 जून 2024 से प्रभावी किया गया था। मौजूदा कानून के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—
पेपर लीक कराने पर 3 से 5 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना।
संगठित गिरोह की संलिप्तता पर 5 से 10 वर्ष तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना।
दोषी परीक्षा एजेंसी पर 1 करोड़ रुपये जुर्माना, परीक्षा का पूरा खर्च वसूला जाएगा तथा 4 वर्ष तक परीक्षा आयोजित करने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
अपराध गैर-जमानती होगा और इसमें समझौते की अनुमति नहीं होगी।
जांच केवल डीएसपी या उससे वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।
सरकार का संदेश साफ
सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। संशोधित कानून का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी संगठित पेपर लीक नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।




