मिडिल ईस्ट में जंग तेज: ईरान पर 13वीं रात अमेरिकी हमला, तेल 100 डॉलर पार; हॉर्मुज संकट से दुनिया में हड़कंप
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। लगातार 13वें दिन अमेरिकी हमलों के बीच ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई है।
HighLights:
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव, वैश्विक शिपिंग प्रभावित।
- कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची।
- ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।
ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब और अधिक गंभीर होता जा रहा है। लगातार 13वीं रात अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की उन गतिविधियों के जवाब में की जा रही है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और समुद्री मार्गों को निशाना बनाए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
यह भी पढ़ें: पेपर लीक पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा वार: 10 साल जेल, 10 करोड़ जुर्माना; कैबिनेट ने दी संशोधन बिल को मंजूरी
इस बीच ईरान ने भी पलटवार का दावा करते हुए कहा है कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी THAAD एयर डिफेंस सिस्टम और कुवैत स्थित अमेरिकी ड्रोन ऑपरेशन बेस को निशाना बनाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का केंद्र बन गया है। दुनिया के कुल समुद्री तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग पर अपने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार
हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब जलमार्गों में बढ़ते खतरे का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखाई दिया। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता देखा गया। ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि संघर्ष और तेज हुआ तो तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल, परिवहन और महंगाई पर व्यापक असर पड़ सकता है।
अमेरिका का क्या है दावा
अमेरिकी सेना का कहना है कि उसके ताजा हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल व्यापारिक जहाजों और सहयोगी देशों की सुरक्षा को चुनौती देने में किया जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता तो आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान ने अमेरिकी हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसके सहयोगियों को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
दुनिया की बढ़ी चिंता
संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ईंधन, परिवहन, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ सकता है।




