जमशेदपुर सहारा सिटी दुष्कर्म मामला : पूर्व DSP और इंस्पेक्टर समेत 21 आरोपी बरी

जमशेदपुर के सहारा सिटी नाबालिग दुष्कर्म मामले में गुड्डू गुप्ता, पूर्व डीएसपी अजय केरकेट्टा समेत 21 आरोपित बरी। पीड़िता और मुख्य गवाहों के बयान पलटने से अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।

जमशेदपुर सहारा सिटी दुष्कर्म मामला :  पूर्व DSP और इंस्पेक्टर समेत 21 आरोपी बरी
सहारा सिटी कांड में बड़ा फैसला: गुड्डू गुप्ता समेत 21 आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी।

Advertisement

    HighLights:

  • पूर्व मंत्री के भाई गुड्डू गुप्ता, पूर्व डीएसपी अजय केरकेट्टा और पूर्व थाना प्रभारी इमदाद अंसारी बरी
  • पीड़िता, सूचक और एक मुख्य महिला गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए
  •  पांच गवाहों का परीक्षण हुआ, लेकिन तीन प्रमुख गवाहों ने अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया
  • मुख्य आरोपित इंद्रपाल सैनी और शिव कुमार महतो को पहले हो चुकी है 25-25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा 

जमशेदपुर (Threesocieties.com Desk):  मानगो के बहुचर्चित सहारा सिटी नाबालिग दुष्कर्म मामले में पूर्व मंत्री के भाई गुड्डू गुप्ता, पूर्व डीएसपी अजय केरकेट्टा और एमजीएम थाना के पूर्व प्रभारी इमदाद अंसारी समेत 21 आरोपितों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। मामले में पीड़िता, सूचक और एक मुख्य महिला गवाह के अपने पूर्व बयानों से मुकर जाने के बाद अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष पॉक्सो न्यायाधीश विमलेश सहाय की अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया।

सहारा सिटी कांड: पीड़िता और मुख्य गवाहों के मुकरने से अभियोजन को झटका

इस चर्चित मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पीड़िता, सूचक और एक मुख्य महिला गवाह ने अपने पूर्व बयानों का समर्थन नहीं किया। अदालत ने तीनों प्रमुख गवाहों को पक्षद्रोही घोषित कर दिया।अभियोजन पक्ष इस मुकदमे में कुल पांच गवाहों का परीक्षण करा सका। इनमें से तीन प्रमुख गवाहों के अपने पूर्व बयानों से मुकर जाने के कारण आरोपों को साबित करने में कठिनाई हुई। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने आगे गवाह प्रस्तुत नहीं करने की जानकारी दी, जिसके बाद अदालत ने साक्ष्य की कार्यवाही बंद कर दी। अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित नहीं हो पाने के कारण सभी 21 आरोपितों को बरी कर दिया गया। इस फैसले में गवाहों के बयानों की भूमिका अहम रही।

पूर्व मंत्री के भाई और पूर्व पुलिस अधिकारियों को भी राहत

बरी किए गए आरोपितों में पूर्व मंत्री के भाई गुड्डू गुप्ता उर्फ बृजमोहन गुप्ता, पटमदा के पूर्व डीएसपी अजय केरकेट्टा और एमजीएम थाना के पूर्व प्रभारी इमदाद अंसारी के नाम प्रमुख हैं। इस मामले में अन्य आरोपितों में सोनू नैयर, लड्डन उर्फ पाहुल, दिनेश अग्रवाल, अमित सिंह, मुन्ना धोबी, अजित मिस्त्री, उपेंद्र सिंह, मनोज सहाय, गुरप्रीत सिंह, करीम केबुलवाला, राजेश सिंह, मकसूद अंसारी, शाहिद, तशमीश अहमद, तनुश्री, अभिषेक मिश्रा और शंभू द्विवेदी शामिल थे। आरोपित अभिषेक मिश्रा का निधन हो चुका है। वहीं, मामले में 19 आरोपित अदालत में उपस्थित हुए थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की कार्यवाही के आधार पर फैसला सुनाया।

पहले मुख्य आरोपितों को मिल चुकी है सजा

सहारा सिटी कांड में नाबालिग के यौन उत्पीड़न, आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और जबरन देह व्यापार कराने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। मामले की जांच के बाद पुलिस ने इंद्रपाल सैनी, शिव कुमार महतो और श्रीकांत महतो को गिरफ्तार किया था। अदालत पहले ही इंद्रपाल सैनी और शिव कुमार महतो को 25-25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुना चुकी है। दोनों फिलहाल घाघीडीह केंद्रीय कारागार में बंद हैं, जबकि श्रीकांत महतो को जमानत मिल चुकी है। मुख्य आरोपितों को सजा सुनाए जाने के बाद पीड़िता और उसके संरक्षक के बयानों के आधार पर 21 अन्य लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया गया था। इन्हीं आरोपितों के खिलाफ चली सुनवाई में अब अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया है।

क्या है सहारा सिटी कांड?

जमशेदपुर के मानगो स्थित सहारा सिटी से जुड़े इस मामले ने नाबालिग के कथित यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और जबरन देह व्यापार जैसे गंभीर आरोपों के कारण व्यापक चर्चा बटोरी थी। मामले में मानगो थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया था। मामले की अलग-अलग न्यायिक कार्यवाहियों में कुछ आरोपितों को सजा मिली, जबकि 21 अन्य आरोपितों के खिलाफ चले मुकदमे में अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका। पीड़िता और मुख्य गवाहों के बयान बदलने के बाद अदालत के सामने आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं रह पाए।