प्रमोशन की फाइलें अटकीं, 10 साल से नक्सल जिलों में तैनाती; झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने DGP से मांगा समाधान
झारखंड पुलिस में प्रमोशन, ट्रांसफर, ACP-MACP और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कई मामले लंबित हैं। ASI से SI, SI से इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर से DSP की प्रोन्नति फाइलें अटकी हैं। पुलिस एसोसिएशन ने DGP से त्वरित समाधान की मांग की है।
HighLights:
- ASI से SI, SI से इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर से DSP में प्रोन्नति के मामले लंबे समय से लंबित
- SI से इंस्पेक्टर के 158 और इंस्पेक्टर से DSP के 25 पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया अटकी
- चाईबासा, लातेहार, गढ़वा और पलामू में कई पुलिसकर्मी 10 साल से अधिक समय से तैनात
- पिछले दो वर्षों से स्थानांतरण समिति की बैठक नहीं होने का दावा
धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड पुलिस महकमे में अधिकारियों और जवानों से जुड़े प्रशासनिक मामलों के लंबे समय से लंबित रहने का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। प्रोन्नति, स्थानांतरण, पदस्थापन, ACP-MACP और पुलिसकर्मियों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष अपनी चिंताएं रखी हैं।
एसोसिएशन के महामंत्री संजीव कुमार का कहना है कि विभाग की अलग-अलग शाखाओं में कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय से लंबित हैं। इससे न सिर्फ पुलिसकर्मियों को उनके सेवा संबंधी अधिकार मिलने में देरी हो रही है, बल्कि अधिकारियों और जवानों में असंतोष भी बढ़ रहा है।एसोसिएशन ने DGP से आग्रह किया है कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए प्राथमिकता तय करने के साथ-साथ प्रत्येक मामले के निष्पादन की स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए।
दो साल से नहीं हुई स्थानांतरण समिति की बैठक
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अनुसार गृह या ऐच्छिक जिले में पदस्थापन से जुड़े मामलों पर विचार करने के लिए पिछले करीब दो वर्षों से स्थानांतरण समिति की बैठक नहीं हुई है। एसोसिएशन का कहना है कि निर्धारित नियमों के तहत पात्र पुलिस अधिकारियों को गृह या ऐच्छिक जिले में पदस्थापन का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन समिति की बैठक नहीं होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।इस देरी का असर ऐसे पुलिस अधिकारियों पर भी पड़ा है, जो पात्रता के बावजूद स्थानांतरण का लाभ नहीं ले सके और इसी दौरान सेवानिवृत्त हो गए।
नक्सल प्रभावित जिलों में 10 साल से अधिक समय से तैनाती
पुलिस एसोसिएशन ने संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जिलों में लंबे समय से एक ही जगह तैनात पुलिसकर्मियों का मुद्दा भी उठाया है।एसोसिएशन के मुताबिक चाईबासा, लातेहार, गढ़वा और पलामू जैसे जिलों या इकाइयों में कई पुलिसकर्मी 10 साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं।एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे मामलों में लंबे समय से कोई स्पष्ट नीतिगत फैसला नहीं लिया गया है। पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण को लेकर नीति के अनुरूप कार्रवाई की जरूरत है।
ASI से SI, SI से इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर से DSP तक प्रमोशन अटका
झारखंड पुलिस में अलग-अलग स्तरों पर प्रोन्नति के मामले भी एसोसिएशन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। सहायक अवर निरीक्षक (ASI) से अवर निरीक्षक (SI) पद पर प्रोन्नति से जुड़े कई मामले लंबे समय से लंबित बताए गए हैं। पुलिस अवर निरीक्षक से पुलिस निरीक्षक पद पर प्रोन्नति के लिए रोस्टर क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 158 पदों पर प्रोन्नति का निर्णय आगे नहीं बढ़ने की शिकायत की गई है।पुलिस निरीक्षक से पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के 25 पदों पर प्रोन्नति की फाइल भी रोस्टर क्लियर होने के बावजूद लंबित बताई गई है।एसोसिएशन का कहना है कि प्रोन्नति की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से योग्य अधिकारियों को उनके करियर में मिलने वाला लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।
विशेष शाखा में इंस्पेक्टर के 212 पद खाली
पुलिस एसोसिएशन ने विशेष शाखा में रिक्त पदों का मुद्दा भी उठाया है। एसोसिएशन के अनुसार क्लोज कैडर वाली विशेष शाखा में पुलिस निरीक्षक के 212 पद लंबे समय से रिक्त हैं। रिक्त पदों के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित होने की बात कही गई है। एसोसिएशन ने इन पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है।
कल्याणकारी कोष की बैठकें नहीं होने से आर्थिक सहायता में देरी
पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को जरूरत के समय आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाले विभिन्न कल्याणकारी कोषों की बैठकों को लेकर भी एसोसिएशन ने सवाल उठाया है। एसोसिएशन के मुताबिक केंद्रीय कल्याण कोष, शिक्षा कोष और परोपकारी कोष की नियमित बैठकें नहीं हो रही हैं। इसका सीधा असर उन पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें बीमारी, दुर्घटना या मृत्यु जैसी परिस्थितियों में तत्काल आर्थिक सहायता की जरूरत होती है। एसोसिएशन ने इन बैठकों को नियमित करने की मांग की है, ताकि पात्र लाभुकों को सहायता समय पर मिल सके।
ACP और MACP के लाभ में भी देरी
सशस्त्र बल के अधिकारियों के ACP और MACP से जुड़े मामलों को लेकर भी एसोसिएशन ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। एसोसिएशन के अनुसार सशस्त्र बल के अधिकारियों को पिछले दो वर्षों से ACP और MACP का लाभ नहीं मिल सका है। इसके अलावा सहायक अवर निरीक्षक स्तर के लगभग 700 से 800 मामले मुख्यालय स्तर पर प्रक्रियाधीन बताए गए हैं। एसोसिएशन ने इन मामलों की समीक्षा कर जल्द निपटारा करने की मांग की है।
सेवानिवृत्ति कोषांग निष्क्रिय होने की शिकायत
सेवानिवृत्त होने वाले पुलिसकर्मियों के पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य देय लाभों के समय पर भुगतान के लिए गठित सेवानिवृत्ति कोषांग को लेकर भी एसोसिएशन ने चिंता जताई है। एसोसिएशन का आरोप है कि कोषांग वर्तमान में प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसके चलते सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को अपने बकाये और अन्य सेवा लाभों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एसोसिएशन ने सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए कोषांग को सक्रिय करने की मांग की है।
DGP से एसोसिएशन की चार प्रमुख मांगें
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने पुलिसकर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें प्रमुख रूप से चार मांगें शामिल हैं।
1. शिकायत कोषांग में एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व
पुलिस मुख्यालय की शिकायत कोषांग की बैठकों में झारखंड पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आधिकारिक सदस्य के रूप में शामिल करने की मांग की गई है।
2. कल्याण से जुड़े पत्रों की प्रतिलिपि एसोसिएशन को मिले
पुलिसकर्मियों के कल्याण से संबंधित पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी सभी आधिकारिक पत्रों की प्रतिलिपि एसोसिएशन को उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
3. हर महीने पुलिस सभा का आयोजन
राज्य के सभी SSP, SP और कमांडेंट को हर महीने अनिवार्य रूप से ‘पुलिस सभा’ आयोजित करने और इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय एवं महासंघ को भेजने का निर्देश देने की मांग की गई है।
4. फाइलों के निपटारे की समय-सीमा तय हो
एसोसिएशन ने अलग-अलग शाखाओं में फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखने की व्यवस्था खत्म करने के लिए आवेदनों और मामलों के निष्पादन की स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की है।
‘अधिकार समय पर मिलें’, एसोसिएशन ने DGP से मांगा त्वरित फैसला
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के महामंत्री संजीव कुमार का कहना है कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का लगातार निर्वहन करते हैं। ऐसे में उनके सेवा संबंधी मामलों और वैध अधिकारों के लिए उन्हें लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए।एसोसिएशन ने DGP से सभी लंबित मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा कराने और प्रत्येक मामले के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने का आग्रह किया है।




