नईदिल्ली: रेल कर्मचारियों को 78 दिनों की सैलरी के बराबर बोनस, e-cigarette पर बैन,मोदी कैबिनेट का फैसला

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नई दिल्ली:

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ई-सिगरेट (E-Cigarettes) को पूरी तरह से बैन करने का फैसला लिया गया,देश के 11 लाख रेलवे कर्मचारियों को बोनस के रूप में 78 दिनों का वेतन देने की मंजूरी दी गयी.फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने ई सिगरेट पर बैन लगाने की जानकारी देते हुए कहा कि इसके निर्माण,वितरण,बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है. फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि हुए कहा कि ई-सिगरेट 150 से ज्यादा फ्लेवर्स में मिलती है,ऐसे दिखाया जाता है जैसे इसके माध्यम से सिगरेट छोड़ने में आसानी होती है,जबकि अध्ययन से खुलासा हुआ है कि इससे सिगरेट की आदत को बढ़ावा मिलता है.उन्होंने कहा कि ई-सिगरेट को बैन करने का अध्यादेश पारित किया जायेगा.इसके बाद अध्यादेश को अगर राष्ट्रपति जी मंजूरी मिलती है, तो इसे संसद के अगले सत्र में पेश किया जायेगा. केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन के वेतन के बराबर बोनस दिया जायेगा.11 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा. पहली बार लगातार छठे वर्ष रेलवे कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है.बोनस देने में सरकारी खजाने पर 2,024 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.उन्होंने कहा कि अभी इसकी (ई-सिगरेट की) लत नई है, इसलिए सरकार ने इसे शुरुआत में ही रोकने का फैसला किया है. ई-हुक्का पर भी बैन लगा है. पहली गलती करने पर आरोपी को एक साल की सजा या एक लाख का जुर्माना या दोनों हो सकती है.दूसरी बार पकड़े जाने पर पांच लाख तक जुर्माना या तीन साल की कैद या दोनों हो सकती है.आज सही समय पर कदम उठाया गया है जिससे ई-सिगरेट के चलन को बढ़ने से रोका जा सके. उन्होंने कहा कि दुनिया में क्या हो रहा है, इसकी पृष्ठभूमि है,लेकिन भारत के रिसर्च इंस्टिट्यूट्स ने इस पर अनुसंधान किया है. एम्स, टाटा और बाकी प्रमुख संस्थानों और डॉक्टरों ने इसकी सिफारिश की थी.टेक्निकल कमिटी ने इसकी पूरी जांच की इसके बाद ही मंत्रिमंडल के पास आया. उल्लेखनीय है कि इससे पहले, ई-सिगरेट निषेध अध्यादेश,2019 की जांच प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के बाद मंत्रियों के एक समूह ने की थी. मंत्रियों के इस समूह ने छोटे बदलावों का सुझाव दिया था. क्या है e-cigarette ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाले ऐसी डिवाइस है जिनमें लिक्विड भरा रहता है. यह निकोटीन और दूसरे हानिकारक केमिकल्स का घोल होता है. कश लगानेपर हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके भाप में बदल देती है. इसीलिए स्मोकिंग नहीं, vaping कहा जाता है. आजकल लोग आम सिगरेट की जगह ई-सिगरेट पीने लगे हैं. लोगों का मानना है कि धुंआ देने वाली सिगरेट की जगह यह इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट कम नुकसानदायक है और सेहत को कम नुकसान पहुंचती है, लेकिन ई-सिगरेट भी सेहत पर बुरा असर डालती है. WHO ने भी कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से पारंपरिक सिगरेट जैसा ही नुकसान होता है. मोदी सरकार की प्राथमिकता मोदी गर्वमेंट के दूसरे कार्यकाल में ई-सिगरेट,हीट-नॉट-बर्न स्मोकिंग डिवाइसेसवेप एंड ई-निकोटीन फ्लेवर्ड हुक्का जैसे वैकल्पिक धूम्रपान उपकरणों पर बैन लगाना पहले 100 दिनों के एजेंडे की प्रमुख प्राथमिकताओं में था.