PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज! 'वतन या कफन' के नारे के बीच अलग देश की मांग

PoK में पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। JAAC ने स्वतंत्र देश की मांग उठाई है। 40 दिनों से जारी आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर दमन और शोषण के आरोप लगाए तथा भारत से समर्थन की अपील की।

PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत तेज! 'वतन या कफन' के नारे के बीच अलग देश की मांग
PoK में पाकिस्तान के खिलाफ सबसे बड़ा आंदोलन।

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  • PoK में 40 दिनों से जारी आंदोलन हुआ और उग्र, JAAC ने स्वतंत्र देश की मांग दोहराई।
  • प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर दमन और शोषण के आरोप लगाए
  • रैली में "वतन या कफन" और "अपना वतन चाहिए" के नारे लगे
  • प्रदर्शनकारियों ने भारत से समर्थन की अपील की
  • भारत ने PoK में मानवाधिकार और प्रशासनिक दमन का मुद्दा उठाया

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk):  पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। करीब 40 दिनों से जारी आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार क्षेत्र में दमन, आर्थिक शोषण और मानवाधिकारों के उल्लंघन की नीति अपना रही है।

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रावलकोट और अन्य  लाकों में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए। आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने खुलकर कहा कि PoK के लोगों को पाकिस्तान नहीं, बल्कि अपना स्वतंत्र वतन चाहिए।

'अब चाहिए अपना देश'

एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए JAAC के प्रमुख नेताओं ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी सरकार और अपने देश में जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अब PoK के लोग किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के अधीन नहीं रहना चाहते और आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं को सम्मान नहीं मिलता। सभा के दौरान "वतन या कफन" और "अपना वतन चाहिए" जैसे नारे पूरे मैदान में गूंजते रहे।

'यह आजाद नहीं, कब्जाई हुई जमीन'

आंदोलन के नेताओं ने पाकिस्तान के उस लंबे समय से चले आ रहे दावे को भी चुनौती दी, जिसमें PoK को "आज़ाद कश्मीर" बताया जाता रहा है। रैली में कहा गया कि यह कोई "आज़ाद" या "विवादित" इलाका नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र है। इस बयान के बाद मौजूद हजारों लोगों ने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए और आंदोलन के समर्थन में हाथ उठाए।

40 दिनों से आंदोलन, हालात बिगड़ने का दावा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से लगातार धरना-प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

भारत से मदद की अपील

रैली के दौरान आंदोलन के नेताओं ने नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार रहने वाले लोगों और भारत से भी समर्थन की अपील की। भीड़ ने LoC की ओर मार्च करने के समर्थन में नारे लगाए। आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक नेताओं पर भी साधा निशाना

JAAC नेताओं ने PoK की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे स्थानीय जनता के हितों की रक्षा करने में विफल रहे हैं और पाकिस्तान की सत्ता के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, युवाओं और महिलाओं की आंदोलन में भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि जनता का समर्थन इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने हाल के दिनों में कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हो रहे विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के लंबे समय से चले आ रहे शोषण, अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं। भारत ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर भी चिंता व्यक्त की है। हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है।