US-Iran War:7 घंटे तक बरसे अमेरिकी बम, ईरान में 35 की मौत-300 से ज्यादा घायल, होर्मुज में बढ़ा युद्ध का खतरा
US-Iran War News: अमेरिका के 7 घंटे लंबे हवाई हमलों में ईरान में 35 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा घायल होने का दावा। ईरान का जवाबी हमला, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव, भारतीय नागरिक की मौत, 148 भारतीय नाविक फंसे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट Threesocieties.com पर।
HighLights:
- IRGC का बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा।
- होर्मुज स्ट्रेट में तनाव चरम पर, वैश्विक शिपिंग प्रभावित
- भारतीय क्रू वाले जहाज पर हमला, भारतीय नागरिक की मौत और कई घायल
- भारत ने ईरान के उपराजदूत को तलब कर दर्ज कराया कड़ा विरोध
- फारस की खाड़ी में 11 भारतीय जहाज और 148 भारतीय नाविक फंसे
- ट्रम्प ने ईरान को दी नई चेतावनी, बिजलीघरों और पुलों को निशाना बनाने की धमकी
तेहरान/वॉशिंगटन डीसी (Threesocieties.com Desk): पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में 35 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में महिलाओं और बच्चों के शामिल होने का भी दावा किया गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक करीब सात घंटे तक चले सैन्य अभियान में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित मिसाइल लॉन्चिंग साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक संसाधन और तटीय रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया।
ईरान बोला- अब केवल रक्षा पर फोकस, बातचीत का सवाल नहीं
हमलों के बाद ईरानी सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते की कोई योजना नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि देश पूरी तरह 'डिफेंस मोड' में है और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है।
IRGC का दावा- बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट, जॉर्डन के अजराक एयरबेस और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
डोनाल्ड ट्रम्प की नई चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं आया तो अगले चरण में अमेरिका बिजलीघर, पुल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और होर्मुज स्ट्रेट में अपनी रणनीति जारी रखेगा।
भारतीय नागरिक की मौत, कई नाविक घायल
तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई जबकि कई भारतीय घायल बताए गए हैं। जानकारी के मुताबिक जहाज पर 20 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे।
भारत ने ईरानी उपराजदूत को किया तलब
भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को तलब कर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमलों और नागरिक नाविकों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है तथा सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोककर कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील करता है।
148 भारतीय नाविक अभी भी फंसे
विदेश मंत्रालय के अनुसार फारस की खाड़ी में भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक अभी भी फंसे हुए हैं। ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग लगभग ठप
ईरानी हमलों के बाद कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाज भेजना लगभग बंद कर दिया है। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में कई तेल टैंकर, LNG जहाज और कंटेनर पोत हमलों का शिकार हुए हैं। सुरक्षा के बावजूद कंपनियां अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पर पूरी तरह भरोसा नहीं जता रही हैं।
ग्रेटर तुंब द्वीप क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
अमेरिका ने हालिया हमलों में ग्रेटर तुंब द्वीप को भी निशाना बनाया। यह द्वीप होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब स्थित है और ईरान की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। ग्रेटर तुंब, अबू मूसा, लेसर तुंब, किश्म, लारक और अन्य द्वीप मिलकर ईरान की समुद्री सुरक्षा की पहली रक्षा पंक्ति बनाते हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा वैश्विक संकट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और युद्ध रोककर कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है।




