बिहार में 38 केस वाले पूर्व विधायक रीतलाल यादव को हाई कोर्ट से झटका, बेल खारिज

बिहार के पूर्व विधायक रीतलाल यादव को पटना हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 38 आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए अदालत ने संगठित अपराध और रंगदारी मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।

बिहार में 38 केस वाले पूर्व विधायक रीतलाल यादव को हाई कोर्ट से झटका, बेल खारिज
हाई कोर्ट ने रीतलाल यादव को जमानत देने से इनकार किया।

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  • पटना हाई कोर्ट ने दानापुर के पूर्व विधायक रीतलाल यादव की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी
  • खगौल थाना कांड संख्या 129/2025 में संगठित अपराध और रंगदारी के गंभीर आरोप हैं
  • राज्य ने अदालत में रीतलाल यादव के खिलाफ 38 आपराधिक मामलों का हवाला दिया
  • अभियोजन ने कहा- आरोपी के प्रभाव और डर के कारण गवाह गवाही देने से कतराते हैं

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार के चर्चित पूर्व विधायक रीतलाल यादव को पटना हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने खगौल थाना कांड संख्या 129/2025 में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 समेत अन्य धाराओं के तहत दर्ज है, जिसमें संगठित अपराध और रंगदारी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडेय की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान रीतलाल यादव की ओर से जमानत देने की मांग की गई। बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि पूर्व विधायक को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और प्राथमिकी में उनके खिलाफ सीधे तौर पर रंगदारी का स्पष्ट आरोप नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

अभियोजन के अनुसार, एक बिल्डिंग ठेकेदार ने वर्ष 2023 में खगौल-दानापुर इलाके में एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसी दौरान रीतलाल यादव के भाई पिंकू यादव ने ठेकेदार को निर्माण सामग्री खरीदने का सुझाव दिया। बाद में कथित तौर पर पिंकू यादव की ओर से 33 लाख रुपये की मांग की गई, जबकि ठेकेदार के हिसाब से देय राशि करीब 19 लाख रुपये थी। रकम को लेकर विवाद बढ़ता गया। आरोप है कि वर्ष 2024 में रीतलाल यादव ने ठेकेदार के पार्टनर को बुलाकर उसे चेतावनी दी।

अभियोजन का आरोप है कि इसके बाद निर्माण कार्य जारी रखने के लिए 50 लाख रुपये और निर्माण सामग्री के एवज में 33 लाख रुपये की मांग की गई। ठेकेदार ने कथित तौर पर 4 लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन शेष रकम नहीं दे सका। मामले में आगे रंगदारी के रूप में 10 लाख रुपये वसूलने और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया। हालांकि, घटना के करीब दो साल बाद प्राथमिकी दर्ज होने को लेकर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाए।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

पूर्व विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निवेदिता निर्वीरकर ने अदालत में दलील दी कि रीतलाल यादव निर्दोष हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि एफआईआर में सीधे तौर पर रंगदारी मांगने का स्पष्ट आरोप नहीं है और मामले के तथ्यों के आधार पर उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

राज्य ने 38 आपराधिक मामलों का दिया हवाला

जमानत याचिका का राज्य सरकार की ओर से जोरदार विरोध किया गया। एडवोकेट जनरल एसडी संजय ने अदालत को बताया कि रीतलाल यादव के खिलाफ कुल 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं। राज्य की ओर से यह भी दलील दी गई कि आरोपी का प्रभाव और आपराधिक पृष्ठभूमि ऐसी है कि गवाहों में भय का माहौल पैदा हो सकता है। अभियोजन के मुताबिक, डर के कारण गवाह अदालत में गवाही देने से भी कतराते हैं।

'जमानत नियम, जेल अपवाद' लेकिन हर मामले में नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानत के सामान्य सिद्धांत पर भी टिप्पणी की। अदालत ने माना कि सामान्य तौर पर जमानत नियम और जेल अपवाद है, लेकिन जमानत देने की शक्ति का इस्तेमाल न्यायसंगत और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों की गंभीरता, आरोपी की कथित भूमिका और उनके आपराधिक इतिहास को महत्वपूर्ण माना। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने रीतलाल यादव को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया।

रीतलाल यादव के लिए क्यों अहम है फैसला?

रीतलाल यादव बिहार की राजनीति में चर्चित नाम रहे हैं और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज होने का हवाला अदालत में दिया गया। ऐसे में 38 मामलों वाले आपराधिक इतिहास का जिक्र और गवाहों के भय से जुड़ी अभियोजन की दलील इस सुनवाई में महत्वपूर्ण रही। पटना हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल खगौल थाना कांड संख्या 129/2025 में रीतलाल यादव को नियमित जमानत का लाभ नहीं मिल पाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।