29 साल पुराना अनुराधा पौडवाल का छठ गीत फिर ट्रेंड में, रील्स की आई बाढ़
छठ पूजा 2026 से पहले अनुराधा पौडवाल का 29 साल पुराना भोजपुरी गीत ‘मारबो रे सुगवा धनुख से’ सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। जानें गीत का इतिहास।
Highlights:
- अनुराधा पौडवाल का 29 साल पुराना छठ गीत सोशल मीडिया पर फिर ट्रेंड में
- ‘मारबो रे सुगवा धनुख से’ पर बड़ी संख्या में रील्स और वीडियो बनाए जा रहे हैं
- 1997 में रिलीज एल्बम ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ का हिस्सा है यह पारंपरिक गीत
- छठ पूजा 2026 की शुरुआत 13 नवंबर से होगी और 16 नवंबर तक चलेगी
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): छठ पूजा का महापर्व अभी दूर है, लेकिन इसकी भक्ति और लोकगीतों की गूंज सोशल मीडिया पर अभी से सुनाई देने लगी है। मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल की आवाज में करीब 29 साल पहले रिकॉर्ड किया गया पारंपरिक भोजपुरी छठ गीत ‘मारबो रे सुगवा धनुख से’ एक बार फिर इंटरनेट पर चर्चा में है। छठ पूजा से कई सप्ताह पहले ही इस गीत का इस्तेमाल लोग रील्स और वीडियो बनाने में कर रहे हैं।
अनुराधा पौडवाल ने हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी है। भजनों और धार्मिक गीतों के लिए भी उनकी अलग पहचान रही है। छठ के मौके पर उनकी आवाज में रिकॉर्ड किए गए गीत आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
सोशल मीडिया पर फिर छाया ‘मारबो रे सुगवा धनुख से’
‘मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाय’ पारंपरिक भोजपुरी छठ गीत है। छठ पर्व के दौरान इस गीत को अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धा के साथ सुना और गाया जाता है। अनुराधा पौडवाल की आवाज में रिकॉर्डिंग के बाद इसकी पहुंच और लोकप्रियता और बढ़ी। सोशल मीडिया के दौर में पुराने भक्ति गीतों को नई पीढ़ी भी रील्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए सुन रही है। यही वजह है कि छठ पूजा का यह पुराना गीत एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है।
1997 में रिलीज हुई थी ‘कांच ही बांस के बहंगिया’
अनुराधा पौडवाल की आवाज में यह गीत 1997 में रिलीज हुई छठ गीतों की एल्बम ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ का हिस्सा था। एल्बम में छठ महापर्व से जुड़े कई पारंपरिक गीत शामिल किए गए थे। इस एल्बम की खास बात यह भी थी कि इसमें अनुराधा पौडवाल के अलावा शारदा सिन्हा की आवाज में भी छठ से जुड़े लोकप्रिय गीत शामिल थे। शारदा सिन्हा को छठ गीतों की दुनिया में विशेष पहचान मिली है और उनके गीत लंबे समय से छठ पर्व की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहे हैं।
क्या है ‘मारबो रे सुगवा धनुख से’ का भाव?
इस लोकगीत में छठ पूजा के लिए तैयार किए गए प्रसाद और फलों की पवित्रता से जुड़ा लोकभाव दिखाई देता है। गीत में सुगवा यानी तोते को पूजा के फल को जूठा नहीं करने की चेतावनी दी जाती है। लोकगीत की भाषा और भाव छठ पर्व की पारंपरिक लोकसंस्कृति से जुड़े हुए हैं। इसी सरल लोकभाषा और भक्तिभाव के कारण यह गीत पीढ़ियों से लोगों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है।
13 नवंबर से शुरू होगा छठ महापर्व
वर्ष 2026 में छठ पूजा 13 नवंबर से शुरू होगी और 16 नवंबर तक चलेगी। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में नहाय-खाय, खरना, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य की प्रमुख परंपराएं निभाई जाती हैं। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में भी छठ पूजा बड़े स्तर पर मनाई जाती है। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के बीच भी छठ की परंपरा का विस्तार हुआ है।
छठ के गीत इस पर्व की धार्मिक आस्था के साथ-साथ इसकी लोक-सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करते हैं। यही वजह है कि कई दशक पुराने गीत हर साल छठ के आसपास फिर से लोगों की प्लेलिस्ट और सोशल मीडिया फीड में नजर आने लगते हैं। ‘मारबो रे सुगवा धनुख से’ भी ऐसा ही गीत है, जिसे अनुराधा पौडवाल की आवाज ने नई पहचान दी और जो करीब तीन दशक बाद भी छठ की भक्ति के माहौल में अपनी जगह बनाए हुए है।
Anjala Kumar 



