4 साल बाद RBI का बड़ा झटका, रेपो रेट बढ़ा; अब महंगा होगा कर्ज, बढ़ेगी EMI
RBI ने 4 साल बाद रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50% किया। जानें महंगाई, होम लोन, EMI, GDP ग्रोथ और आम लोगों पर इसका क्या असर होगा।
HighLights:
- 4 साल बाद पहली बार RBI ने रेपो रेट बढ़ाया
- रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हुआ
- लोन महंगा होने और EMI बढ़ने की आशंका
- फिलहाल ब्याज दरों में कटौती का रास्ता बंद
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): RBI Monetary Policy: महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा फैसला लिया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने करीब चार साल बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर को MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद नई ब्याज दरों का ऐलान किया। MPC ने मौजूदा व्यापक आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों का आकलन करने के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया।
इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। बैंकिंग सिस्टम में फंडिंग लागत बढ़ने की स्थिति में होम लोन, ऑटो लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI बढ़ सकती है। यानी आने वाले समय में नया कर्ज लेना भी महंगा हो सकता है और मौजूदा कर्ज की मासिक किस्त का बोझ भी बढ़ सकता है।
4 साल बाद क्यों बढ़ाया गया रेपो रेट?
RBI के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई है। वैश्विक स्तर पर युद्ध के कारण कमोडिटी और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसका असर भारत की खुदरा महंगाई पर भी पड़ सकता है। RBI का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई दर 5.2% रह सकती है। पहले इसका अनुमान 5.0% था। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने महंगाई के जोखिम को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दर बढ़ाने का रास्ता चुना है। रेपो रेट बढ़ने का मकसद अर्थव्यवस्था में कर्ज की मांग और खर्च को नियंत्रित करना होता है। जब बैंकिंग सिस्टम में कर्ज महंगा होता है तो आम तौर पर लोग बड़े लोन और खर्च के फैसले टाल सकते हैं। इससे मांग पर दबाव आता है और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
क्या अब EMI बढ़ना तय है?
रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी के बाद बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर खासकर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके लोन की ब्याज दर बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी है। हालांकि हर बैंक और हर ग्राहक की EMI एक जैसी नहीं बढ़ेगी। इसका असर आपके लोन की राशि, ब्याज दर, बाकी अवधि और बैंक की रीसेट व्यवस्था पर निर्भर करेगा। होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट लोन लेने वालों को आने वाले समय में अधिक EMI का सामना करना पड़ सकता है।
अब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं
RBI ने मौद्रिक नीति का रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है। इसका संकेत साफ है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती का रास्ता बंद हो गया है। आने वाली MPC बैठकों में RBI परिस्थितियों के आधार पर या तो ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर रख सकता है या जरूरत पड़ने पर इसमें और बढ़ोतरी कर सकता है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के मुताबिक 0.25% की बढ़ोतरी बाजार की उम्मीद के मुताबिक थी, लेकिन नीति के रुख में बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि RBI की प्राथमिकता अब महंगाई को नियंत्रित करना है। कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज के अनुसार आने वाले समय में ब्याज दरों में 0.25% से 0.50% तक और बढ़ोतरी संभव है। डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव का मानना है कि RBI का कदम महंगाई के जोखिम को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करने की कोशिश है।
महंगाई 5.2% रहने का अनुमान
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई के अनुमान को बढ़ाया है।
अवधि नया अनुमान पुराना अनुमान
Q2 FY27 4.9% 4.7%
Q3 FY27 6.0% 5.9%
Q4 FY27 5.7% 5.5%
Q1 FY28 5.6% 5.3%
यानी आने वाले समय में महंगाई का दबाव बने रहने की आशंका है। यही वजह है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में कटौती के बजाय महंगाई को नियंत्रित करने पर जोर दे रहा है।
GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा
महंगाई को लेकर चिंता के बीच अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर RBI ने राहत की खबर दी है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। RBI के अनुसार दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2%, तीसरी तिमाही में 6.9% और चौथी तिमाही में 6.8% रह सकती है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत निजी खपत और निवेश गतिविधियों से सहारा मिल रहा है। हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स भी दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों की गति बने रहने का संकेत दे रहे हैं।
त्योहारी सीजन में खरीदारी पर क्या असर?
रेपो रेट में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब देश में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान लोग घर, कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी महंगी चीजों की खरीदारी के लिए कर्ज लेते हैं। लोन महंगा होने से कुछ ग्राहक खरीदारी का फैसला टाल सकते हैं। खासकर बड़े टिकट वाली खरीदारी पर इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि मजबूत GDP ग्रोथ और निजी खपत से अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद भी बनी हुई है।
रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो सकता है। बैंक इस बढ़ी हुई लागत का असर ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इसका परिणाम लोन की ब्याज दर बढ़ने और EMI बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।
सरल भाषा में समझें:
RBI से बैंक को महंगा कर्ज → बैंक से ग्राहक को महंगा कर्ज → EMI बढ़ने की संभावना → खर्च और कर्ज की मांग में कमी → महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश।
रिवर्स रेपो रेट क्या है?
रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों से पैसा लेता है और उन्हें ब्याज देता है। इसका इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। RBI की मौद्रिक नीति में रेपो रेट एक महत्वपूर्ण हथियार है, जिसके जरिए केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
RBI क्यों बढ़ाता है रेपो रेट?
जब महंगाई तेजी से बढ़ती है तो RBI ब्याज दर बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में मांग को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। कर्ज महंगा होने पर लोग कम उधार लेते हैं और बड़े खर्चों को टाल सकते हैं। इससे बाजार में मांग का दबाव कम हो सकता है और लंबे समय में महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
आम लोगों के लिए इसका सीधा मतलब
नया होम लोन महंगा हो सकता है।
फ्लोटिंग रेट होम लोन की EMI बढ़ सकती है।
ऑटो और दूसरे कर्ज की लागत बढ़ सकती है।
फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग्स पर ब्याज दरों में बदलाव की संभावना रहेगी।
त्योहारी सीजन में बड़ी खरीदारी के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है।
आने वाली बैठकों में तत्काल ब्याज दर कटौती की उम्मीद कम हो गई है।
आगे क्या होगा?
RBI के ताजा फैसले से साफ है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक का फोकस आर्थिक विकास के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित करने पर है। रेपो रेट को 5.50% तक बढ़ाने के बाद आने वाली MPC बैठकों में RBI के अगले कदम पर बाजार की नजर रहेगी। अगर महंगाई का दबाव आगे भी बना रहता है तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, अगर महंगाई नियंत्रण में आती है तो RBI कुछ समय तक दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है। यानी आम आदमी के लिए फिलहाल संदेश साफ है—महंगाई पर दबाव है और कर्ज की लागत कम होने की उम्मीद तत्काल नहीं है।
Threesocieties News Desk 



