रंजय हत्याकांड में 5 सितंबर को फैसला, हर्ष सिंह को कोर्ट में रहना होगा मौजूद; 9 साल बाद खत्म होगा इंतजार

धनबाद के चर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में 5 सितंबर को फैसला आएगा। नौ साल चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने हर्ष सिंह को सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। जानें मामले की पूरी कहानी।

रंजय हत्याकांड में 5 सितंबर को फैसला, हर्ष सिंह को कोर्ट में रहना होगा मौजूद; 9 साल बाद खत्म होगा इंतजार
29 जनवरी 2017 को चाणक्य नगर मोड़ के पास हुई थी रंजय की हत्या।

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  • रंजय सिंह हत्याकांड में 5 सितंबर को फैसला, करीब नौ साल चली मामले की सुनवाई
  • हर्ष सिंह को कोर्ट में सशरीर मौजूद रहने का निर्देश, नंद कुमार उर्फ ‘मामा’ फिलहाल जेल में बंद
  • पुलिस ने मामा को कथित शूटर बताया था, हर्ष सिंह पर पुलिस ने कथित साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया
  • हर्ष ने 30 नवंबर 2018 को कोर्ट में किया था सरेंडर, जुलाई 2019 में हाईकोर्ट से मिली थी जमानत

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  करीब नौ साल से चल रहे धनबाद के चर्चित रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह हत्याकांड में अब फैसले की तारीख तय हो गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत इस मामले में 5 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी। अदालत ने मामले के आरोपी हर्ष सिंह को फैसले के दिन सशरीर अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरे आरोपी नंद कुमार सिंह उर्फ बबलू/रूना उर्फ ‘मामा’ फिलहाल जेल में बंद है।

रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 की शाम करीब 5:30 बजे धनबाद के चाणक्य नगर मोड़, बिग बाजार के सामने रामेश्वर तिवारी के घर के समीप गोली मारकर कर दी गई थी। रंजय सिंह को मेयर संजीव सिंह का करीबी माना जाता था। इस चर्चित हत्याकांड की सुनवाई करीब नौ वर्षों तक चली और अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 23 गवाहों का परीक्षण कराया गया।

5 सितंबर को कोर्ट सुनाएगी फैसला

लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अब अदालत ने फैसला सुनाने की तारीख तय कर दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने आरोपी हर्ष सिंह को फैसले के दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।इस आदेश के बाद रंजय हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। खासकर इसलिए कि मामले में पुलिस की जांच, कथित साजिश और आरोपी के खिलाफ साक्ष्यों को लेकर बचाव पक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।

पुलिस के अनुसार ‘मामा’ था कथित शूटर

पुलिस की जांच के अनुसार नंद कुमार सिंह उर्फ ‘मामा’ को रंजय सिंह की हत्या में कथित शूटर बताया गया था। पुलिस ने उसे 2 अगस्त 2018 को भोजपुर जिले के बेरथ गांव से गिरफ्तार किया था। इसके बाद 8 अगस्त 2018 को धनबाद लाकर सीजीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामा तब से जेल में बंद है। उसकी जमानत के प्रयास भी सफल नहीं हुए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2025 में हाईकोर्ट से उसकी जमानत खारिज हुई थी, जबकि 2026 में सुप्रीम कोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिली।

हर्ष सिंह पर क्या था आरोप?

पुलिस की कहानी के मुताबिक रंजय सिंह और हर्ष सिंह के बीच गाड़ी ओवरटेक करने को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने इसी विवाद को हत्या की कथित साजिश की वजह बताया था। जांच में हर्ष सिंह को कथित तौर पर साजिशकर्ता और नंद कुमार उर्फ मामा को कथित शूटर बताया गया। हालांकि यह पुलिस/अभियोजन का आरोप है और इसे अदालत द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि मामले में अंतिम निर्णय अदालत को ही करना है। हर्ष सिंह ने 30 नवंबर 2018 को धनबाद की सीजीएम अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। करीब सात महीने जेल में रहने के बाद जुलाई 2019 में झारखंड हाईकोर्ट से उसे जमानत मिली।

बचाव पक्ष ने साक्ष्यों पर उठाए सवाल

हर्ष सिंह के खिलाफ पुलिस की जांच में नंद कुमार उर्फ मामा के कथित बयान को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया था। हालांकि बचाव पक्ष ने इस आधार पर लगातार सवाल उठाए। बचाव पक्ष का तर्क रहा कि हर्ष सिंह के खिलाफ स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य या प्रत्यक्ष गवाह नहीं है और केवल सह-आरोपी के कथित बयान के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। यही वजह है कि नौ साल चली सुनवाई के दौरान इस मामले में पुलिस की जांच और साक्ष्यों की विश्वसनीयता भी चर्चा का विषय रही।

तत्कालीन विधायक संजीव सिंह ने लगाए थे गंभीर आरोप

रंजय सिंह हत्याकांड के दौरान तत्कालीन झरिया विधायक संजीव सिंह ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि रंजय की हत्या की साजिश रघुकुल में रची गई थी। हालांकि इस तरह के आरोपों को संबंधित पक्ष के राजनीतिक/कानूनी आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इन आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, जब तक न्यायालय इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष न दे।

2017 में हुई थी दिनदहाड़े हत्या

रंजय सिंह की हत्या धनबाद के व्यस्त इलाके में हुई थी। 29 जनवरी 2017 की शाम करीब 5:30 बजे चाणक्य नगर मोड़ के पास उन्हें गोलियों से भून दिया गया था। घटना के बाद धनबाद में राजनीतिक और आपराधिक हलकों में काफी हलचल मच गई थी।मामले की जांच आगे बढ़ी और पुलिस ने अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। करीब नौ वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया में अभियोजन ने कुल 23 गवाह पेश किए।

अब सभी की निगाहें 5 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन अदालत का फैसला यह तय करेगा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोप किस हद तक साबित होते हैं।