24 घंटे तक साइडिंग में खड़ी रही रेलवे रैक, BCCL पर ₹3 लाख की पेनाल्टी; विजिलेंस जांच में कई अधिकारियों पर गिरी गाज!
Dhanbad BCCL News: सुदामडीह-भौरा कोयला साइडिंग में 24 घंटे से अधिक समय तक रेलवे रैक खड़ी रहने पर BCCL पर ₹3 लाख से अधिक की पेनाल्टी लगी। मामले की विजिलेंस जांच शुरू हो गई है और कई अधिकारी व लोडिंग एजेंसी जांच के घेरे में हैं।
Highlights:
- सुदामडीह-भौरा साइडिंग में 24 घंटे से अधिक समय तक खड़ी रही रेलवे रैक।
- कोयला उपलब्ध होने के बावजूद समय पर नहीं हुई लोडिंग।
- रेलवे ने BCCL पर तीन लाख रुपये से अधिक की पेनाल्टी लगाई।
- विजिलेंस और BCCL मुख्यालय ने शुरू की जांच।
- कई अधिकारियों और लोडिंग एजेंसी की भूमिका जांच के दायरे में।
- संबलपुर प्लांट के लिए भेजी जानी थी कोयले की रैक।
धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की सुदामडीह-भौरा कोयला साइडिंग में हुई कथित प्रशासनिक लापरवाही अब बड़े विवाद का रूप लेती दिखाई दे रही है। छह हजार टन से अधिक उच्च गुणवत्ता का कोयला उपलब्ध होने के बावजूद रेलवे की एक मालगाड़ी (रैक) 24 घंटे से अधिक समय तक लोडिंग का इंतजार करती रही। समय सीमा के भीतर रैक का उपयोग नहीं होने पर रेलवे ने BCCL पर तीन लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगा दिया।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए BCCL मुख्यालय और विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जांच में संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ कोयला लोडिंग का कार्य करने वाली एजेंसी की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
संबलपुर प्लांट के लिए भेजी जानी थी रैक
जानकारी के अनुसार, यह रैक ओडिशा स्थित JSW के संबलपुर प्लांट के लिए कोयला लेकर रवाना होनी थी। लेकिन संबलपुर की संबंधित रेलवे साइडिंग में जलभराव होने के कारण वहां कोयला भेजने पर आपत्ति जताई गई और निर्धारित योजना के अनुसार लोडिंग नहीं हो सकी। इसी बीच रेलवे के आंध्रा डिवीजन की ओर से उपलब्ध कराई गई रैक को भूजोडीह वाशरी के लिए सुदामडीह-भौरा साइडिंग में खड़ा कर दिया गया। हालांकि, वहां पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने के बावजूद रैक का उपयोग समय पर नहीं किया गया।
6 जुलाई की रात से 7 जुलाई की देर रात तक खड़ी रही रैक
सूत्रों के अनुसार, मालगाड़ी 6 जुलाई की रात से ही साइडिंग में मौजूद थी। लेकिन लोडिंग प्रक्रिया 7 जुलाई की देर रात पूरी हो सकी। बाद में निर्णय बदलते हुए उसी रैक में भौरा क्षेत्र से दूसरा कोयला लोड कर न्यू भोजूडीह वाशरी भेजा गया। रेलवे के निर्धारित समय से अधिक रैक खड़ी रहने के कारण BCCL पर करीब तीन लाख रुपये से अधिक की पेनाल्टी लगा दी गई।
कई गंभीर सवाल खड़े
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब साइडिंग में पर्याप्त मात्रा में कोयला मौजूद था तो लोडिंग में इतनी देरी क्यों हुई?
किस स्तर पर निर्णय लेने में विलंब हुआ?
क्या विभागीय समन्वय की कमी थी या फिर प्रशासनिक लापरवाही?
आखिर BCCL को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान किसकी वजह से उठाना पड़ा?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
विजिलेंस की जांच में अधिकारी और एजेंसी दोनों
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, BCCL मुख्यालय और विजिलेंस विभाग पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रहे हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लोडिंग में देरी किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। बताया जा रहा है कि जांच के दायरे में संबंधित विभाग के कई अधिकारी, संचालन से जुड़े कर्मचारी तथा कोयला लोडिंग का कार्य करने वाली एजेंसी भी शामिल है। यदि जांच में लापरवाही या जानबूझकर देरी के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
BCCL की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
रेलवे की पेनाल्टी केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि BCCL की परिचालन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। कोयला उपलब्ध होने के बावजूद समय पर लोडिंग नहीं होना समन्वय और प्रबंधन में कमी की ओर संकेत करता है। अब सभी की नजर विजिलेंस जांच की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस देरी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन था।




