BCCL के पूर्व CMD समेत 8 अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश, ₹165.97 करोड़ के भुगतान मामले में CVC का एक्शन
BCCL के पूर्व CMD समीरण दत्ता समेत 8 अधिकारियों पर देवप्रभा कंस्ट्रक्शन को ₹165.97 करोड़ से अधिक भुगतान मामले में CVC ने कार्रवाई की सिफारिश की है। अनुबंध मूल्य में 59.60% वृद्धि और डेविएशन मंजूरी पर जांच हुई।
HighLights:
- देवप्रभा कंस्ट्रक्शन को ₹165.97 करोड़ से अधिक भुगतान का मामला
- CVC ने 13 जुलाई 2026 के ज्ञापन में जांच के निष्कर्ष बताए
- अनुबंध मूल्य में करीब 59.60% की वृद्धि का मामला सामने आया
- अनुबंध में डेविएशन की सीमा 10-15% तक निर्धारित थी
धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के भौंरा साउथ कोलियरी में आउटसोर्सिंग कंपनी देवप्रभा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2022 में किए गए कथित ₹165.97 करोड़ से अधिक के भुगतान के मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने बड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। CVC की जांच के बाद BCCL के पूर्व CMD समीरण दत्ता समेत आठ अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
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मामला अनुबंध में निर्धारित सीमा से अधिक डेविएशन (विचलन) को मंजूरी देने से जुड़ा है। CVC के 13 जुलाई 2026 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, जांच में पाया गया कि BCCL की कार्यात्मक निदेशक समिति (CFD) ने अनुबंध में दो संशोधनों को मंजूरी दी थी। इन संशोधनों के बाद अनुबंध मूल्य में करीब 59.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार डेविएशन की स्वीकार्य सीमा केवल 10 से 15 प्रतिशत तक थी।
तीन अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से पहले SSA की सलाह
CVC ने तत्कालीन BCCL CMD समीरण दत्ता, तत्कालीन निदेशक (वित्त) राकेश कुमार सहाय और तत्कालीन निदेशक (तकनीकी) शंकर नागाचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने से पहले प्रथम चरण की सतर्कता सलाह (SSA) लेने की अनुशंसा की है।SSA यानी First Stage Vigilance Advice उस प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके बाद संबंधित विभाग अधिकारी के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर निर्णय लेता है।
चार अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह
CVC ने चार अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की भी सलाह दी है। इनमें निदेशक (तकनीकी ऑपरेशन) संजय कुमार सिंह, तत्कालीन निदेशक (तकनीकी) और वर्तमान MCL CMD उदय अनंत कावले, तत्कालीन निदेशक (कार्मिक) हर्षनाथ मिश्रा और निदेशक (कार्मिक) मुरली कृष्ण रमैया शामिल हैं।
हालांकि, कोयला मंत्रालय ने CVC की प्रथम चरण की सलाह पर विचार करने के बाद इनमें से कुछ अधिकारियों के मामले में राहत दी है। मंत्रालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की चेतावनी देकर मामला समाप्त किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इन अधिकारियों की भूमिका और परियोजना के क्रियान्वयन में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी को ध्यान में रखा गया।
किस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई?
समीरण दत्ता, पूर्व CMD, BCCL – SSA के बाद दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश
राकेश कुमार सहाय, पूर्व निदेशक (वित्त) – SSA के बाद कार्रवाई की सिफारिश
शंकर नागाचारी, तत्कालीन निदेशक (तकनीकी) – SSA के बाद कार्रवाई की सिफारिश
संजय कुमार सिंह, निदेशक (तकनीकी ऑपरेशन) – प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह
उदय अनंत कावले, तत्कालीन निदेशक (तकनीकी), वर्तमान MCL CMD – प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह
हर्षनाथ मिश्रा, तत्कालीन निदेशक (कार्मिक) – प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह
मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (कार्मिक) – प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह
संजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त अधिकारी) – कार्रवाई नहीं करने की सलाह
59.60 प्रतिशत तक बढ़ गया था अनुबंध मूल्य
CVC की जांच में सबसे अहम बिंदु अनुबंध में निर्धारित सीमा से अधिक डेविएशन की मंजूरी को माना गया है। BCCL की कार्यात्मक निदेशक समिति ने अनुबंध में दो संशोधनों को मंजूरी दी थी। इसके परिणामस्वरूप अनुबंध मूल्य में लगभग 59.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई। जबकि अनुबंध की मूल शर्तों के तहत डेविएशन की सीमा 10 से 15 प्रतिशत तक निर्धारित थी। CVC ने इसी बिंदु को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की और अलग-अलग अधिकारियों के लिए कार्रवाई की अनुशंसा की।
कोयला मंत्रालय ने कुछ अधिकारियों को दी राहत
CVC की अनुशंसा के बाद मामले में कोयला मंत्रालय की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। प्रथम चरण की सतर्कता सलाह पर विचार करने के बाद मंत्रालय ने कुछ तत्कालीन बोर्ड स्तर के अधिकारियों के खिलाफ केवल भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित अधिकारियों की भूमिका, जिम्मेदारी और परियोजना के क्रियान्वयन में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।
चेतावनी और SSA में क्या है अंतर?
चेतावनी: अधिकारी को भविष्य में अपने कार्यों में अधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी जाती है। इसे सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जाता है। SSA (First Stage Vigilance Advice): यह CVC की ओर से दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया में दी जाने वाली प्रथम चरण की सतर्कता सलाह है। इसके बाद संबंधित विभाग मामले की प्रकृति और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है।
देवप्रभा कंस्ट्रक्शन भुगतान मामला क्यों महत्वपूर्ण?
भौंरा साउथ कोलियरी में संचालित आउटसोर्सिंग परियोजना से जुड़े इस मामले में करोड़ों रुपये के भुगतान और अनुबंध मूल्य में निर्धारित सीमा से काफी अधिक वृद्धि का मुद्दा सामने आया है। CVC की जांच में अनुबंध संशोधन और डेविएशन की मंजूरी से संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
पूर्व CMD समेत वरिष्ठ अधिकारियों के नाम कार्रवाई की सिफारिश में आने से यह मामला BCCL के प्रशासनिक और सतर्कता तंत्र के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, CVC की कार्रवाई की सिफारिश को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
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