IIT दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी का छात्रों को ‘गुरुमंत्र’: बोले- सिर्फ सवाल नहीं, समाधान खोजिए
IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में PM मोदी ने छात्रों से कहा कि सिर्फ सवाल न पूछें, समाधान भी खोजें। बोले- अगले 30-35 साल युवाओं के फैसले विकसित भारत की दिशा तय करेंगे। पैकेज की तुलना से बचने, लगातार सीखने और AI-टेक्नोलॉजी में नवाचार की अपील की।
HighLights:
- IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में PM मोदी ने छात्रों को दिया सफलता का मंत्र
- बोले- “सिर्फ सवाल मत पूछिए, समाधान भी खोजिए”
- अगले 30-35 साल युवाओं के फैसले विकसित भारत की दिशा तय करेंगे
- “जो सीखेगा, वही जीतेगा”—तेजी से बदलती दुनिया में लगातार सीखने पर जोर
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के दौर में चुनौतियों के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं। उन्होंने युवाओं से लगातार सीखते रहने, जिज्ञासा बनाए रखने और समस्याओं के समाधान खोजने का साहस दिखाने की अपील की।
यह भी पढ़ें: JPSC Controversy: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित धांधली पर SC पहुंचा मामला, रद्द कर दोबारा परीक्षा की मांग
At IIT Delhi, spoke about the special journey from orientation to convocation. From hostel memories and friendships to favourite campus addas, these are experiences that will remain for a lifetime.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 8, 2026
As our young graduates step into a new chapter, I urged them to cherish everyone… pic.twitter.com/RetE9wbz8F
मोदी ने कहा कि आने वाले 30 से 35 साल भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। आज के युवा इस दौरान जो फैसले लेंगे और जिस दिशा में काम करेंगे, वही विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपने हर बड़े फैसले में यह जरूर सोचें कि उससे देश को क्या फायदा होगा और वह देश की कौन-सी जरूरत पूरी करेगा।
सिर्फ सवाल मत पूछिए, समाधान भी खोजिए
प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि जीवन में केवल सवाल खड़े करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत उन सवालों के समाधान खोजने की भी है, जिन पर शायद दुनिया ने ध्यान देना ही छोड़ दिया हो। उन्होंने IIT के पूर्व छात्रों की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि कई सफल लोगों ने ऐसी समस्याओं को पहचाना, जिन्हें दूसरे लोग समस्या मानना ही छोड़ चुके थे। यही सोच उन्हें आगे ले गई। मोदी ने छात्रों से कहा कि अपनी जिज्ञासा को हमेशा जीवित रखें और सीखने की इच्छा को कभी खत्म न होने दें। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में वही लोग आगे बढ़ेंगे, जो लगातार नई चीजें सीखते रहेंगे।
‘जो सीखेगा, वही जीतेगा’
प्रधानमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी की रफ्तार इतनी तेज है कि यह निश्चित तौर पर कहना मुश्किल है कि अगले 20-30 साल में दुनिया कैसी होगी। टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन लगातार बदलेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि बदलाव से घबराने की जरूरत नहीं है। जब भी बदलाव आता है, वह चुनौतियों के साथ अवसर भी लेकर आता है। जो लोग नई चुनौतियों के नए समाधान खोजने का साहस रखते हैं, वे इन्हीं चुनौतियों को अवसर में बदल देते हैं।
पैकेज और नौकरी की तुलना से बचें
प्रधानमंत्री ने छात्रों को दीक्षांत के बाद होने वाली पैकेज और नौकरी की तुलना से भी बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोई बड़ी कंपनी में गया, किसी को ज्यादा पैकेज मिला या किसी ने स्टार्टअप शुरू किया—इन चीजों को लेकर खुद की तुलना दूसरों से न करें। मोदी ने कहा कि जिंदगी कोई लीडरबोर्ड नहीं है। असली मुकाबला दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से है। उन्होंने छात्रों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की सलाह दी।
IIT की परीक्षा में सिलेबस, जिंदगी की परीक्षा ‘आउट ऑफ सिलेबस’
प्रधानमंत्री ने कैंपस लाइफ और वास्तविक जीवन के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि IIT में परीक्षा का सिलेबस तय होता है। आपको पता होता है कि कौन-सा विषय पढ़ना है, कब परीक्षा देनी है और कौन-सा असाइनमेंट पूरा करना है।लेकिन जिंदगी की परीक्षा अलग होती है। यहां सब कुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’ होता है। कई बार यह भी खुद तय करना पड़ता है कि असली सवाल क्या है। उन्होंने छात्रों को मुश्किल समस्याओं से घबराने के बजाय उन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हल करने की सलाह दी।
‘अगले 35 साल आपके काम से बनेगा विकसित भारत’
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अलग चुनौतियां और अलग राष्ट्रीय जिम्मेदारियां होती हैं। आज भारत की युवा पीढ़ी के सामने विकसित भारत बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस मजबूत नींव पर विकसित भारत का निर्माण आज के युवाओं को करना है। मोदी ने छात्रों से कहा कि आने वाले 30-35 वर्षों में उनके फैसले देश की दिशा को प्रभावित करेंगे। इसलिए युवाओं को अपने निर्णय लेते समय यह जरूर सोचना चाहिए कि उससे देश की जरूरत कैसे पूरी होगी।
‘चिप से लेकर शिप तक यहीं बनेगा’
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों में भारत की बढ़ती क्षमता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम तेजी से आगे बढ़ा है और पहली यूनिट में उत्पादन शुरू हो चुका है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में ‘चिप से लेकर शिप’ तक देश में ही तैयार होगा और इसमें युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मोदी ने छात्रों से AI, डेटा सेंटर, क्रिटिकल मिनरल्स, बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में रिसर्च और इनोवेशन के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये तक की फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है।
‘मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं...’
दीक्षांत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने छात्रों से हल्के-फुल्के अंदाज में भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि यहां मौजूद हर छात्र के मन में भविष्य को लेकर कुछ न कुछ चल रहा होगा। मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तो बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन कुछ तो आपके मन में चलता होगा।” प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर सभागार में ठहाके गूंज उठे। उन्होंने कहा कि कोई छात्र अपनी पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, कोई नए शहर जाने की तैयारी कर रहा होगा और कोई स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहा होगा। सभी के अपने सपने हैं और अब कैंपस से निकलकर उन्हें वास्तविक दुनिया में उन्हें साकार करना है।
IIT दिल्ली में 3,000 से ज्यादा छात्रों को डिग्री
IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में 3,000 से अधिक छात्र शामिल हुए। इनमें 587 PhD शोधार्थी भी शामिल रहे। प्रधानमंत्री ने मेधावी छात्रों को डिग्री और मेडल प्रदान किए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित ‘परम प्रज्ञा’ AI आधारित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटर का रिमोट के जरिए उद्घाटन भी किया। यह सुपरकंप्यूटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और रिसर्च के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
देश में 37 सुपरकंप्यूटर स्थापित
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देश में अब तक 37 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं। इन्हें IIT, IISc, NIT, C-DAC, IISER और अन्य प्रमुख शोध संस्थानों में लगाया गया है। इनमें परम सिद्धि, परम प्रवेग, परम शक्ति, परम संगणक, परम सेवा, परम रुद्र, परम ब्रह्मा, परम युक्ति और परम शिवाय जैसे सुपरकंप्यूटर शामिल हैं।
छात्रों को मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री केवल पढ़ाई पूरी होने का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि वे कठिन समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे सीखना बंद न करें, नई चुनौतियों से न घबराएं और दूसरों से तुलना करने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दें। मोदी ने कहा कि भारत जिस विकसित भविष्य की ओर बढ़ रहा है, उसमें आज IIT से निकलने वाले युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। आने वाले दशकों में उनके ज्ञान, नवाचार और निर्णय देश की जरूरतों को पूरा करने और विकसित भारत के निर्माण की दिशा तय करेंगे।




