धनबाद:'अहंकार से हार, भक्ति से उद्धार'... राजन जी महाराज ने बताया जीवन जीतने का मंत्र

धनबाद जिले के निरसा कंचनडीह में आयोजित श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर राजन जी महाराज ने धनुष यज्ञ, पुष्पवाटिका और श्री सीताराम विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि क्रोध और अहंकार मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं, जबकि विनम्रता, धैर्य और भक्ति ही सच्चा बल है।

धनबाद:'अहंकार से हार, भक्ति से उद्धार'... राजन जी महाराज ने बताया जीवन जीतने का मंत्र
राजन जी महाराज बोले- विनम्रता ही सबसे बड़ा बल।

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  • राजन जी महाराज बोले- क्रोध और अहंकार मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं
  • भगवान श्रीराम ने शक्ति प्रदर्शन नहीं, गुरु आज्ञा पालन के लिए उठाया शिव धनुष
  • धनुष यज्ञ और श्री सीताराम विवाह महोत्सव में हजारों श्रद्धालु भक्ति में सराबोर हुए
  • विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र मिलन है।त्र

धनबाद (Threesocieties.com Desk): निरसा प्रखंड के कंचनडीह में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के पंचम दिवस पर कथा स्थल पूरी तरह भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर नजर आया। मानस मर्मज्ञ राजन जी महाराज ने धनुष यज्ञ, पुष्पवाटिका और श्री सीताराम विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन का गहरा संदेश दिया।

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उन्होंने कहा कि क्रोध और अहंकार मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं। जिस व्यक्ति के भीतर अहंकार होता है, वह अपनी शक्ति का भी सही उपयोग नहीं कर पाता। सच्चा बल वही है, जिसमें विनम्रता, धैर्य और भक्ति का समावेश हो।

विरेंद्र राय एवं उनके परिवार के सौजन्य से आयोजित इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा के दौरान महाराज श्री के मधुर भजनों और ओजस्वी प्रवचन ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

श्रीराम ने नहीं किया शक्ति का प्रदर्शन

राजन जी महाराज ने धनुष यज्ञ प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने शिव धनुष अपनी शक्ति दिखाने के लिए नहीं उठाया था। उन्होंने यह कार्य केवल अपने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा का पालन करने के लिए किया। यही भगवान श्रीराम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी यदि व्यक्ति गुरु, माता-पिता और बड़ों के प्रति सम्मान और आज्ञापालन का भाव रखे, तो उसका जीवन स्वतः सफल हो जाएगा।

ईश्वर की योजना पर भरोसा रखें

कथा के दौरान महाराज श्री ने कहा कि जीवन में जो कुछ भी घटित होता है, वह ईश्वर की योजना का हिस्सा होता है। गुरु विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए लेकर निकले थे, लेकिन उसी यात्रा के दौरान मिथिला में माता जानकी और श्रीराम का दिव्य मिलन हुआ। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हर परिस्थिति को ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि अंततः वही उसके जीवन को मंगलमय बनाती है।

पुष्पवाटिका का दिव्य प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु

राजन जी महाराज ने पुष्पवाटिका प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम और माता जानकी की पहली दृष्टि मिली, तब केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं हुआ, बल्कि धर्म, प्रेम, मर्यादा और आदर्श का संगम हुआ। उस दिव्य क्षण से पूरी पुष्पवाटिका पुलकित हो उठी और वृक्ष, लताएं तथा पुष्प भी मानो आनंद से झूम उठे। कथा सुनते हुए अनेक श्रद्धालुओं की आंखें भावविभोर हो उठीं।

सीताराम विवाह महोत्सव में गूंजे मंगलगीत

धनुष यज्ञ के उपरांत आयोजित श्री सीताराम विवाह महोत्सव ने पूरे कथा परिसर को जनकपुर के विवाहोत्सव जैसा दिव्य स्वरूप प्रदान कर दिया। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की और महाराज श्री के भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे। पूरा वातावरण जय श्रीराम और सीताराम के जयघोष से गूंजता रहा।

विवाह में सेवा और सहयोग का होना चाहिए भाव

राजन जी महाराज ने विवाह प्रसंग के माध्यम से समाज को प्रेरणा देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र मिलन होता है। उन्होंने कहा कि जनकपुर में राजा जनक और अयोध्या से आए सेवकों ने मिलकर विवाह की सारी व्यवस्थाएं संभाली थीं। आज भी विवाह समारोहों में यदि कोई कमी रह जाए तो उसकी आलोचना करने के बजाय सहयोग और सेवा का भाव रखना चाहिए। यही भारतीय संस्कृति की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि विनम्रता, सहयोग, सेवा और भक्ति जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं, जबकि क्रोध और अहंकार व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं।