DVC को मिला नया मुखिया: 1995 बैच के IAS राजेश पांडेय बने चेयरमैन, ACC ने नियुक्ति पर लगाई मुहर

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल कैडर के 1995 बैच के IAS अधिकारी राजेश पांडेय को दामोदर घाटी निगम (DVC) का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। ACC की मंजूरी के बाद जारी आदेश के अनुसार वे पांच वर्षों तक इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।

DVC को मिला नया मुखिया: 1995 बैच के IAS राजेश पांडेय बने चेयरमैन, ACC ने नियुक्ति पर लगाई मुहर
IAS राजेश पांडेय को DVC चेयरमैन बनाया गया।

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     HighLights:

  • 1995 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं राजेश पांडेय।
  • कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने DVC चेयरमैन पद पर नियुक्ति को मंजूरी दी।
  • वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव (MSME एवं वस्त्र विभाग) हैं।
  • कार्यभार संभालने की तिथि से पांच वर्षों तक रहेगा कार्यकाल।
  • ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में DVC के लिए अहम मानी जा रही नियुक्ति।

नई दिल्ली/कोलकाता (Threesocieties.com Desk): केंद्र सरकार ने दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए पश्चिम बंगाल कैडर के 1995 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी राजेश पांडेय को डीवीसी का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दे दी है। इस संबंध में भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने आधिकारिक आदेश जारी किया है।

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सरकार के इस निर्णय को ऊर्जा एवं बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डीवीसी पूर्वी भारत के सबसे महत्वपूर्ण बिजली उत्पादन और जल संसाधन प्रबंधन संस्थानों में शामिल है, ऐसे में अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति से संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर हैं राजेश पांडेय

राजेश पांडेय वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) तथा वस्त्र विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव (Additional Chief Secretary) के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासनिक सेवा में उनका लंबा अनुभव रहा है और उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां निभाई हैं।सरकार का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव और नीति निर्माण की उनकी समझ डीवीसी जैसे रणनीतिक  संस्थान के संचालन में उपयोगी साबित होगी।

पांच वर्षों का होगा कार्यकाल

DoPT द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राजेश पांडेय का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष का होगा। हालांकि यह कार्यकाल उनकी सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने अथवा केंद्र सरकार द्वारा जारी अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा, जो भी पहले हो। आदेश कैबिनेट नियुक्ति समिति के सचिवालय में अवर सचिव रमेश चंद्र झा के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजेश पांडेय जल्द ही डीवीसी चेयरमैन का कार्यभार संभालेंगे।

DVC की भूमिका क्यों है महत्वपूर्ण?

दामोदर घाटी निगम (DVC) देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों में शामिल है। यह झारखंड और पश्चिम बंगाल में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और औद्योगिक क्षेत्रों को ऊर्जा उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। डीवीसी के तापीय एवं जल विद्युत संयंत्र पूर्वी भारत की बिजली व्यवस्था में अहम योगदान देते हैं। इसके अलावा निगम औद्योगिक विकास, सिंचाई और जल संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन भी करता है।

नई चुनौतियां और नई जिम्मेदारियां

डीवीसी के नए चेयरमैन के रूप में राजेश पांडेय के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। इनमें बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना, आधुनिक तकनीक को अपनाना, हरित ऊर्जा परियोजनाओं को गति देना, वित्तीय दक्षता बढ़ाना, पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव के साथ वे संगठन में पारदर्शिता, बेहतर प्रबंधन और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दे सकते हैं।

पूर्वी भारत के लिए अहम फैसला

ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के दृष्टिकोण से डीवीसी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अनुभवी आईएएस अधिकारी की नियुक्ति को पूर्वी भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। झारखंड और पश्चिम बंगाल के लाखों उपभोक्ताओं के साथ-साथ बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की बिजली आपूर्ति व्यवस्था में भी डीवीसी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि नए चेयरमैन के नेतृत्व में डीवीसी भविष्य की चुनौतियों से किस तरह निपटता है और ऊर्जा क्षेत्र में किस प्रकार नए सुधार लागू करता है।