नॉर्वे की गद्दी पर बैठे हेकॉन VIII: कभी शाही पहचान से भागते थे, अब पिता की विरासत संभालेंगे नए राजा

जा हेराल्ड पंचम के निधन के बाद क्राउन प्रिंस हेकॉन बने किंग हेकॉन VIII। जानिए कभी शाही जिंदगी से दूरी बनाने वाले हेकॉन की कहानी, मेटे-मारिट से शादी और परिवार से जुड़े विवादों के बीच उनकी नई जिम्मेदारी।

नॉर्वे की गद्दी पर बैठे हेकॉन VIII: कभी शाही पहचान से भागते थे, अब पिता की विरासत संभालेंगे नए राजा
पारिवारिक विवादों के बीच क्राउन प्रिंस हेकॉन को बड़ी जिम्मेदारी।

Advertisement

        HighLights:

  • 89 साल की उम्र में राजा हेराल्ड पंचम का निधन, बेटे हेकॉन ने संभाली नॉर्वे की गद्दी।
  • 53 वर्षीय हेकॉन अब किंग हेकॉन VIII के नाम से जाने जाएंगे
  • युवावस्था में हेकॉन शाही पहचान और मीडिया की लाइमलाइट से दूरी बनाना चाहते थे
  • उन्होंने अमेरिका की UC Berkeley में पढ़ाई की और सर्फिंग के प्रति गहरी रुचि विकसित की

ओस्लो(Threesocieties.com Desk):  नॉर्वे में राजशाही का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राजा हेराल्ड पंचम के निधन के बाद उनके इकलौते बेटे क्राउन प्रिंस हेकॉन ने देश की गद्दी संभाल ली है। 53 वर्षीय हेकॉन अब किंग हेकॉन VIII के रूप में नॉर्वे के नए सम्राट हैं। उनके पिता राजा हेराल्ड पंचम का शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को सुबह 6:35 बजे ओस्लो यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में निधन हुआ। वे 89 वर्ष के थे।

हेकॉन के लिए यह जिम्मेदारी अचानक नहीं आई। पिता की तबीयत खराब होने के दौरान वह पहले से ही रीजेंट के तौर पर शाही जिम्मेदारियां निभा रहे थे। अब उनके सामने नॉर्वे की आधुनिक राजशाही की विरासत को आगे बढ़ाने और बदलते दौर में जनता का भरोसा बनाए रखने की चुनौती है।

कभी शाही पहचान से ही घबराते थे हेकॉन

आज जो शख्स नॉर्वे की राजगद्दी पर बैठा है, उसकी युवावस्था शाही जिंदगी से बिल्कुल अलग थी। हेकॉन ने अपनी आत्मकथा में बताया था कि स्कूल के दिनों में शाही परिवार का सदस्य होने की पहचान उन्हें असहज करती थी। वह मीडिया की लगातार नजरों और रॉयल लाइमलाइट से बचना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अपने लिए एक ऐसी जिंदगी तलाशने की कोशिश की, जिसमें राजपरिवार की पहचान से दूरी हो। अपने पिता और दादा की तरह ऑक्सफोर्ड जाने के बजाय उन्होंने अमेरिका की University of California, Berkeley में पढ़ाई की। बाद में उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी अध्ययन किया।

हेकॉन को सर्फिंग का भी काफी शौक रहा है। समुद्र उनके लिए सिर्फ खेल का मैदान नहीं बल्कि खुद को अभिव्यक्त करने की जगह भी रहा। यही वजह है कि उनका व्यक्तित्व पारंपरिक राजघराने के वारिस की अपेक्षाकृत अलग छवि बनाता रहा है।

1999 में बदली जिंदगी, मेटे-मारिट से हुई मुलाकात

हेकॉन की जिंदगी में बड़ा बदलाव 1999 में आया, जब एक संगीत समारोह में उनकी मुलाकात मेटे-मारिट से हुई। दोनों के रिश्ते ने उस समय नॉर्वे में काफी सुर्खियां बटोरीं। मेटे-मारिट आम नागरिक थीं और पहले से एक बेटे की मां थीं। इसलिए क्राउन प्रिंस के साथ उनके रिश्ते को लेकर नॉर्वे में बहस भी हुई। लेकिन राजा हेराल्ड और रानी सोन्या ने इस रिश्ते का समर्थन किया। 2001 में हेकॉन और मेटे-मारिट ने शादी कर ली। उनके दो बच्चे हैं—प्रिंसेस इंग्रिड एलेक्जेंड्रा और प्रिंस स्वेरे मैग्नस। मेटे-मारिट के पहले रिश्ते से हुए बेटे मारियस बोर्ग होइबी भी परिवार का हिस्सा बने।

पत्नी ने बदली हेकॉन की सार्वजनिक छवि

हेकॉन ने अपनी आत्मकथा में अपनी पत्नी को सामाजिक परिस्थितियों में सहज होने का श्रेय दिया था। खुद को अपेक्षाकृत कम सामाजिक बताते हुए उन्होंने मेटे-मारिट की लोगों से आसानी से घुलने-मिलने की क्षमता की तारीफ की थी। समय के साथ हेकॉन भी सार्वजनिक जीवन में अधिक सहज होते गए। उन्होंने पिता की बीमारी के दौरान लगातार आधिकारिक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को संभाला और धीरे-धीरे यह स्पष्ट हो गया कि वह नॉर्वे की अगली पीढ़ी की राजशाही का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।

पिता की लोकप्रिय विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती

राजा हेराल्ड पंचम ने 1991 में नॉर्वे की गद्दी संभाली थी और तीन दशक से अधिक समय तक देश के संवैधानिक प्रमुख रहे। उन्हें आधुनिक और अपेक्षाकृत सहज राजशाही की छवि बनाने के लिए जाना जाता था। 2011 के आतंकी हमलों जैसे राष्ट्रीय संकटों के दौरान उनके संदेशों ने उन्हें जनता के बीच खास सम्मान दिलाया। अब यही विरासत हेकॉन के सामने है। उन्हें एक ऐसी राजशाही का नेतृत्व करना है, जो आधुनिक, लोकतांत्रिक और आम लोगों के करीब दिखने की कोशिश करती रही है।

परिवार के विवादों के बीच मिली गद्दी

हेकॉन का राज्यारोहण ऐसे समय हुआ है जब नॉर्वे का शाही परिवार कई विवादों से घिरा हुआ है। उनकी पत्नी मेटे-मारिट के दिवंगत अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ पुराने संपर्क और पत्राचार को लेकर हाल के दिनों में सवाल उठे हैं। मेटे-मारिट ने इस संबंध को लेकर खेद भी जताया है।

दूसरी ओर, मेटे-मारिट के बेटे मारियस बोर्ग होइबी से जुड़े कानूनी मामले ने भी शाही परिवार पर दबाव बढ़ाया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार उन्हें बलात्कार और घरेलू हिंसा समेत कई मामलों में दोषी ठहराया गया और जेल की सजा सुनाई गई है; उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील की है। ऐसे माहौल में हेकॉन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह व्यक्तिगत और पारिवारिक विवादों से अलग राजशाही की विश्वसनीयता और जनता का विश्वास बनाए रखें।

अब अगली कतार में कौन?

नॉर्वे के उत्तराधिकार नियमों के तहत हेकॉन की बेटी प्रिंसेस इंग्रिड एलेक्जेंड्रा अब अगली पीढ़ी में सिंहासन की उत्तराधिकारी हैं। नॉर्वे के संविधान में 1990 में बदलाव के बाद उत्तराधिकार में सबसे बड़े बच्चे को, लिंग की परवाह किए बिना, प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि पुराने नियम के तहत हेकॉन खुद अपने पिता के उत्तराधिकारी बने। यानी एक ऐसे व्यक्ति ने नॉर्वे की गद्दी संभाली है, जो कभी राजपरिवार की पहचान से दूरी बनाना चाहता था। लेकिन समय ने उन्हें उसी शाही जिम्मेदारी के केंद्र में ला खड़ा किया, जिससे वह युवावस्था में दूर जाना चाहते थे। अब किंग हेकॉन VIII के सामने सवाल सिर्फ गद्दी संभालने का नहीं, बल्कि बदलते नॉर्वे में राजशाही की प्रासंगिकता और भरोसे को बनाए रखने का भी है।