पश्चिम बंगाल: 15 साल से फरार माओवादी असीम मंडल गिरफ्तार, STF ने ऐसे बिछाया जाल

पश्चिम बंगाल STF ने ₹2.20 करोड़ के इनामी माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को पटाशपुर से गिरफ्तार किया। जानें STF ने कैसे पकड़ा और क्या है पूरा मामला।

पश्चिम बंगाल: 15 साल से फरार माओवादी असीम मंडल गिरफ्तार, STF ने ऐसे बिछाया जाल
₹2.20 करोड़ के इनामी असीम मंडल को STF ने दबोचा।

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  • कोलकाता पुलिस STF ने शीर्ष माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को गिरफ्तार किया
  • 17 सितंबर 2026 को पूर्व मेदिनीपुर के पटाशपुर के ललाट इलाके से हुई गिरफ्तारी
  • असीम मंडल CPI (Maoist) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी-I का है सचिव 
  • झारखंड और ओडिशा सरकार ने उस पर कुल ₹2.20 करोड़ का इनाम घोषित किया था

कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने प्रतिबंधित CPI (Maoist) के शीर्ष नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को गिरफ्तार कर लिया है। 17 सितंबर 2026 को पूर्व मेदिनीपुर जिले के पटाशपुर इलाके में हुई इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम कार्रवाई माना जा रहा है। असीम मंडल लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर था और बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क से जुड़ा रहा था।

पुलिस के अनुसार, असीम मंडल CPI (Maoist) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी-I का सचिव था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी STF की कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पुलिस टीम की सराहना की।

तकनीकी खुफिया जानकारी से मिला सुराग

असीम मंडल को पकड़ने के लिए कोलकाता पुलिस STF लंबे समय से उसके संभावित ठिकानों और गतिविधियों पर नजर रख रही थी। उपलब्ध पुलिस जानकारी के मुताबिक तकनीकी इंटेलिजेंस के आधार पर उसकी मौजूदगी का सुराग मिला। इसके बाद STF ने पूर्व मेदिनीपुर के पटाशपुर इलाके में ऑपरेशन चलाया। रिपोर्टों के अनुसार उसे पटाशपुर के ललाट इलाके में उसके ससुराल पक्ष के घर से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ कर उसके संपर्कों, गतिविधियों और माओवादी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

₹2.20 करोड़ का था इनाम

असीम मंडल उर्फ आकाश पर झारखंड और ओडिशा सरकार ने कुल ₹2.20 करोड़ का इनाम घोषित कर रखा था। इसमें झारखंड सरकार का ₹1 करोड़ और ओडिशा सरकार का ₹1.20 करोड़ का इनाम शामिल था। असीम मंडल लंबे समय से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से जुड़े जंगल क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क का हिस्सा रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब उसके पुराने संपर्कों और संगठन के मौजूदा नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

15 साल से सुरक्षा एजेंसियों को दे रहा था चकमा

असीम मंडल के बारे में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह 15 वर्षों से अधिक समय से कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचता रहा था। पश्चिम बंगाल के जंगलमहल से लेकर झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों तक उसकी गतिविधियों का उल्लेख सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में मिलता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, असीम मंडल पश्चिम मेदिनीपुर का रहने वाला है और उसने छात्र जीवन के दौरान 1980 के दशक में उग्र वामपंथी आंदोलन से जुड़ने के बाद संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं।

तीन राज्यों में दर्ज हैं कई मामले

असीम मंडल के खिलाफ पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में कई आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया कि वह करीब 55 मामलों में वांछित था। वहीं अन्य रिपोर्टों में उसके खिलाफ 100 से अधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है। मामलों की संख्या अलग-अलग स्रोतों में अलग बताई गई है, इसलिए पुलिस के आधिकारिक विस्तृत केस रिकॉर्ड का इंतजार महत्वपूर्ण है। उसका नाम सुरक्षा बलों पर हमले, विस्फोट और माओवादी हिंसा से जुड़े कई मामलों में सामने आया है। झारखंड के कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में भी उसकी गतिविधियों का उल्लेख किया जाता रहा है।

कोटेश्वर राव उर्फ किशन जी के बाद झारखंड की ओर गया

पुलिस के अनुसार, 2011 में माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशन जी के मारे जाने के बाद पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों पर दबाव बढ़ा था। इसके बाद असीम मंडल समेत संगठन के कई सदस्य झारखंड और आसपास के इलाकों में चले गए थे। बाद के वर्षों में असीम मंडल का नाम बंगाल-झारखंड सीमा क्षेत्र और जंगलमहल से जुड़े माओवादी नेटवर्क में सामने आता रहा।

गिरफ्तारी के बाद अब क्या होगी जांच?

असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद STF उसके मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, संपर्कों, संभावित सहयोगियों तथा पिछले कुछ वर्षों की गतिविधियों की जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि वह किन लोगों के संपर्क में था और माओवादी संगठन के मौजूदा नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी। गिरफ्तारी से जुड़े सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से भी पुलिस को आगे की जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने STF की कार्रवाई की सराहना की

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए असीम मंडल की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने कोलकाता पुलिस STF के अधिकारियों और जवानों की कार्रवाई की सराहना की और कहा कि राज्य में माओवादी नेटवर्क को दोबारा मजबूत होने नहीं दिया जाएगा। हालांकि, मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान और पुलिस की जांच से जुड़े तथ्य अलग-अलग विषय हैं। गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से अधिक जानकारी सामने आने की संभावना है।

40 साल के माओवादी सफर का अंत?

असीम मंडल उर्फ आकाश की उम्र करीब 64 वर्ष बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, उसने 1980 के दशक में छात्र जीवन से माओवादी आंदोलन से जुड़ना शुरू किया था और बाद में CPI (Maoist) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। करीब चार दशक लंबे उसके भूमिगत सफर और वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों से बचते रहने के बाद पटाशपुर से गिरफ्तारी हुई है। अब जांच का फोकस उसके नेटवर्क, पुराने मामलों और संगठन में उसकी वर्तमान भूमिका से जुड़े तथ्यों पर रहेगा।

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