IIT पटना का कमाल! सूटकेस में बिजली, अब दांत निकालना भी होगा आसान

IIT पटना के छात्रों और प्राध्यापकों ने दो खास नवाचार किए हैं। पोर्टेबल सूटकेस इन्वर्टर बिजली की जरूरत पूरी करेगा, जबकि मैकेनाइज्ड पावर एलिवेटर दांत निकालने की प्रक्रिया आसान बनाएगा।

IIT पटना का कमाल! सूटकेस में बिजली, अब दांत निकालना भी होगा आसान
आईआईटी पटना के छात्र अभिजीत कुमार।

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   HighLights:

  • IIT पटना ने दो उपयोगी तकनीकी नवाचार पेश किए
  • लिथियम बैट्री वाला पोर्टेबल सूटकेस इन्वर्टर बिजली देगा
  • 250 VA से 5 KVA तक क्षमता में तैयार किया गया इन्वर्टर
  • बिहार समेत कई राज्यों में करीब 2000 यूनिट की बिक्री

पटना (Threesocieties.com Desk): भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना (IIT Patna) के छात्रों और प्राध्यापकों की टीम ने तकनीक को रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ते हुए दो महत्वपूर्ण नवाचार विकसित किए हैं। इनमें एक लिथियम आयन बैट्री से लैस पोर्टेबल सूटकेस इन्वर्टर है, जिसे जरूरत के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता है। वहीं दूसरा नवाचार मैकेनाइज्ड पावर एलिवेटर है, जिसका उद्देश्य दांत निकालने की प्रक्रिया में मैनुअल प्रयास को कम करना है।

दोनों तकनीकों को अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। एक तरफ पोर्टेबल इन्वर्टर बिजली की जरूरत वाले स्थानों पर उपयोगी साबित हो सकता है, तो दूसरी तरफ दंत चिकित्सा से जुड़े उपकरण के जरिए दांत निकालने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।

सूटकेस खोलिए और जरूरत के समय बिजली पाइए

IIT पटना के छात्र अभिजीत कुमार और उनकी टीम ने लिथियम आयन बैट्री आधारित सूटकेस इन्वर्टर विकसित किया है। इसकी सबसे खास बात इसका पोर्टेबल डिजाइन है। इसे सूटकेस की तरह एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। टीम के अनुसार, इन्वर्टर को एक बार चार्ज करने के बाद इसकी क्षमता के अनुसार कई घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है। इस तकनीक का विकास कुलसचिव सह वरीय प्राध्यापक डॉ. एके ठाकुर के निर्देशन में किया गया है।

सेना के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर किया गया विकास

इस पोर्टेबल इन्वर्टर को DRDO और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की परियोजना के तहत विकसित किया गया था। इसके विकास में खास तौर पर ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया, जहां तत्काल बिजली की जरूरत हो और सामान्य बिजली व्यवस्था उपलब्ध न हो।इन्वर्टर का वजन इसकी क्षमता के आधार पर करीब 7 से 17 किलोग्राम तक बताया गया है। इसकी क्षमता 250 VA, 500 VA, 850 VA, 1000 VA से लेकर 5 KVA तक बताई गई है। इसका विकास विशेष रूप से सेना के उपयोग को ध्यान में रखकर किया गया था। ऐसे स्थानों पर जहां बिजली की नियमित सुविधा उपलब्ध नहीं होती, वहां पोर्टेबल बिजली व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

बिहार समेत कई राज्यों में बिक चुकी हैं करीब 2000 यूनिट

IIT पटना की टीम के अनुसार, यह सूटकेस इन्वर्टर करीब दो वर्ष पहले बाजार में आ चुका है। अब तक इसके लगभग 2000 यूनिट तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और बिहार के विभिन्न जिलों में बेचे जाने की जानकारी दी गई है। इससे साफ है कि संस्थान में विकसित तकनीक को केवल प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक उपयोग और बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अब दांत निकालने में कम होगा मैनुअल प्रयास

IIT पटना का दूसरा नवाचार दंत चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़ा है। संस्थान के मैकेनिकल विभाग के प्राध्यापक डॉ. कराली पात्रा और उनकी टीम ने मैकेनाइज्ड पावर एलिवेटर विकसित किया है। इस उपकरण को हाजीपुर के दंत चिकित्सक डॉ. शशि कुमार के सहयोग से तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दांत निकालने की प्रक्रिया में चिकित्सक द्वारा किए जाने वाले मैनुअल प्रयास को कम करना है। पारंपरिक प्रक्रिया में दांत निकालने के दौरान चिकित्सक को उपकरण के माध्यम से मैनुअल बल का इस्तेमाल करना पड़ता है। नए मैकेनाइज्ड उपकरण के जरिए इस प्रक्रिया को तकनीकी सहायता देने की कोशिश की गई है।

चार साल की मेहनत के बाद मिला पेटेंट

इस उपकरण पर टीम ने वर्ष 2022 से काम शुरू किया था। लंबे शोध और विकास के बाद इसे अप्रैल 2024 में पेटेंट ग्रांट हुआ। इसके विकास में शोध छात्र अक्षय सक्सेना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब टीम इस उपकरण को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इसे बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।

रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ रही IIT की तकनीक

IIT पटना के इन दोनों नवाचारों की खासियत यह है कि दोनों का संबंध सीधे व्यावहारिक जरूरतों से है। सूटकेस इन्वर्टर का उद्देश्य जरूरत के समय पोर्टेबल बिजली उपलब्ध कराना है, जबकि मैकेनाइज्ड पावर एलिवेटर दंत चिकित्सा की एक प्रक्रिया में मैनुअल प्रयास को कम करने पर केंद्रित है। एक नवाचार ऊर्जा और पोर्टेबिलिटी से जुड़ा है, तो दूसरा मेडिकल एवं डेंटल टेक्नोलॉजी से। दोनों परियोजनाएं इस बात का उदाहरण हैं कि शैक्षणिक संस्थानों में होने वाला शोध किस तरह रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी उत्पादों का रूप ले सकता है।

IIT पटना के इन दोनों नवाचारों में अब अगली चुनौती इन्हें बड़े स्तर पर उपयोग और बाजार तक पहुंचाने की है। सूटकेस इन्वर्टर पहले ही बाजार में पहुंच चुका है, जबकि दांत निकालने वाले मैकेनाइज्ड उपकरण को आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है।