झारखंड: 2007 के डबल मर्डर से बना था डॉन, जामताड़ा एनकाउंटर में खत्म हुआ सुजीत सिन्हा का साम्राज्य
जामताड़ा में पुलिस एनकाउंटर में कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत हो गई। साहिबगंज से धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान हथियार छीनकर भागने की कोशिश में वह मारा गया। 2007 के डबल मर्डर केस से कुख्यात बने सुजीत पर 60 से अधिक मामले दर्ज थे। घटनास्थल पर आठ घंटे बाद एफएसएल जांच पूरी हुई।
HighLights:
- एफएसएल टीम ने खून, डीएनए, हथियार और फिंगरप्रिंट सहित कई साक्ष्य जुटाए
- 2007 के चर्चित दोहरे हत्याकांड से अपराध की दुनिया में आया था सुजीत सिन्हा
- हत्या, रंगदारी, लेवी और आर्म्स एक्ट समेत 60 से अधिक मामलों का आरोपी था
- पलामू, धनबाद, रांची, लातेहार, चतरा और रामगढ़ तक फैला था उसका नेटवर्क
जामताड़ा/मेदिनीनगर (Threesocieties.com Desk): झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का रविवार देर रात जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में अंत हो गया। पुलिस के अनुसार, साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा शिफ्टिंग के दौरान उसने पुलिस अभिरक्षा से भागने की कोशिश की। इस दौरान कथित तौर पर उसने एक जवान की इंसास राइफल छीन ली और फायरिंग का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में वह मौके पर ही मारा गया।
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एनकाउंटर के बाद घटनास्थल को पूरी तरह सील कर दिया गया। रांची से एफएसएल टीम के पहुंचने में देर होने के कारण करीब आठ घंटे तक सुजीत सिन्हा का शव घटनास्थल पर ही पड़ा रहा। सोमवार सुबह एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से फॉरेंसिक जांच की और उसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
FSL टीम ने जुटाए अहम साक्ष्य
सूत्रों के अनुसार एफएसएल टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने, डीएनए सैंपल, हथियार, फिंगरप्रिंट, कारतूस, गोली के खोखे, पैरों के निशान और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए। टीम ने यह भी जांच की कि घटनास्थल पर चली गोलियां और बरामद हथियारों का तकनीकी मिलान कैसे बैठता है। हल्की बारिश के बावजूद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर साक्ष्यों को सुरक्षित रखा।
टायर पंक्चर होने के बाद भागने की कोशिश
जामताड़ा एसपी शंभू कुमार सिंह के अनुसार साहिबगंज डीएसपी नितिन खंडेलवाल के नेतृत्व में पुलिस टीम सुजीत सिन्हा को धनबाद सेंट्रल जेल लेकर जा रही थी। रात करीब दस बजे सुपायडीह गांव के पास पुलिस वाहन का टायर पंक्चर हो गया। इसी दौरान सुजीत ने कथित रूप से मौके का फायदा उठाकर जवान की राइफल छीन ली और भागने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि उसने फायरिंग का प्रयास भी किया, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।
आठ घंटे तक घटनास्थल पर पड़ा रहा शव
रात करीब 10 बजे हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया। एफएसएल टीम के रांची से पहुंचने तक किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो, इसके लिए शव को वहीं सुरक्षित रखा गया। सुबह करीब छह बजे वैज्ञानिक जांच शुरू हुई, जिसके बाद ही शव हटाया गया। इस दौरान साहिबगंज-गोविंदपुर स्टेट हाईवे पर यातायात भी डायवर्ट किया गया।
2007 के दोहरे हत्याकांड से बना था अपराध की दुनिया का बड़ा नाम
सुजीत सिन्हा का नाम पहली बार वर्ष 2007 में सुर्खियों में आया था। मेदिनीनगर के कांदू मोहल्ला में टेंडर विवाद के दौरान अनिल सिंह और भूषण सिंह नामक दो भाइयों की हत्या हुई थी। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड सुजीत सिन्हा को माना। वर्ष 2019 में पलामू व्यवहार न्यायालय ने उसे इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
पलामू से कोयलांचल तक फैला था नेटवर्क
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सुजीत सिन्हा का आपराधिक नेटवर्क पलामू से शुरू होकर धनबाद, रांची, लातेहार, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा और कोयलांचल क्षेत्र तक फैला हुआ था। हत्या, रंगदारी, लेवी, हथियार तस्करी, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े 60 से अधिक मामले उसके खिलाफ दर्ज बताए जाते हैं। जांच एजेंसियों का दावा रहा है कि जेल में बंद रहने के बावजूद उसका गिरोह सक्रिय था। ठेकेदारों, कोयला कारोबारियों, क्रशर संचालकों और व्यवसायियों से रंगदारी वसूली का नेटवर्क उसके गिरोह के जरिए संचालित होता था।
कई मामलों में मिला था बरी होने का लाभ
वर्ष 2024 में सुजीत सिन्हा को 16 से अधिक मामलों में अदालत से बरी होने का लाभ मिला था। इसी दौरान पलामू पुलिस ने उसके संबंध कोयलांचल के अपराधी प्रिंस खान गिरोह से होने का दावा किया था। हालांकि कई मामलों में वह साक्ष्य के अभाव में बरी भी हुआ, जबकि उसके खिलाफ नए मामले लगातार दर्ज होते रहे।
पत्नी भी है जेल में बंद
सुजीत सिन्हा मूल रूप से पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के पथरा गांव का निवासी था। उसका पालन-पोषण मेदिनीनगर शहर के श्रीरामपथ इलाके में हुआ। उसकी पत्नी रिया सिन्हा भी आपराधिक मामलों में जेल में बंद है। पुलिस का आरोप रहा है कि गिरोह के आर्थिक संचालन में पहले प्रियंका कुमारी उर्फ खुशबू उर्फ सृष्टि और बाद में रिया सिन्हा की भूमिका रही।
अमन साहू के बाद दूसरा बड़ा एनकाउंटर
कुछ महीने पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। अब सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर को झारखंड पुलिस की संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस मुठभेड़ की वैधानिक प्रक्रिया के तहत पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच और अन्य कानूनी औपचारिकताएं आगे भी जारी रहेंगी।
झारखंड में खत्म हुआ आतंक का एक चैप्टर, रंगदारी नेटवर्क को बड़ा झटका
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत के साथ ही झारखंड के रंगदारी नेटवर्क के एक ऐसे चेहरे का अंत हो गया, जिसने पिछले कई वर्षों में अपराध की दुनिया में अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए लगातार अलग-अलग आपराधिक गिरोहों से गठजोड़ किया। पुलिस रिकॉर्ड और जांच में सामने आ चुका है कि सुजीत सिन्हा हमेशा उसी गिरोह के साथ खड़ा होता था, जिसका उस समय अपराध जगत में दबदबा अधिक होता था।
झारखंड में रंगदारी के संगठित नेटवर्क के विस्तार के दौरान सुजीत सिन्हा ने सबसे पहले कुख्यात अपराधी अमन साहू से हाथ मिलाया। दोनों के गठजोड़ के बाद कई कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि अमन साहू के नेटवर्क के जरिए कई इलाकों में रंगदारी का समानांतर तंत्र तैयार किया गया था। अमन साहू के एनकाउंटर के बाद सुजीत सिन्हा ने अपना ठिकाना और रणनीति दोनों बदल दिए। पुलिस के अनुसार, उसने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संपर्क बढ़ाया और उनके नेटवर्क का इस्तेमाल अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए किया।
तैयार किया नया गैंग
सुजीत ने एक नया गैंग तैयार किया। बाद के दिनों में जब धनबाद क्षेत्र में प्रिंस खान का दबदबा बढ़ा तो सुजीत सिन्हा ने उससे भी गठजोड़ कर लिया। पुलिस के अनुसार, प्रिंस खान कारोबारियों से रंगदारी की मांग करता था। यदि कोई कारोबारी रंगदारी देने से इनकार करता था तो सुजीत सिन्हा अपने गिरोह के शूटर उपलब्ध कराता था। इन्हीं शूटरों के माध्यम से फायरिंग, जानलेवा हमला और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दिया जाता था। यही वजह रही कि झारखंड के कई जिलों में दोनों गिरोहों का नाम कारोबारियों के बीच दहशत का पर्याय बन गया था।
राजधानी रांची भी सुजीत सिन्हा के नेटवर्क से अछूता नहीं रहा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शहर के कई कारोबारियों से उसके गिरोह द्वारा रंगदारी की मांग की जा चुकी थी। कारोबारियों को धमकी भरे फोन, इंटरनेट कॉल और शूटरों के जरिए दबाव बनाने की कई घटनाएं जांच में सामने आई थीं। सुजीत सिन्हा गिरोह का सक्रिय सदस्य रहा अभिषेक राय बाद में उससे अलग होकर अमन साहू के साथ जुड़ गया था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि झारखंड के अपराध जगत में गिरोहों के बीच बदलते गठजोड़ और वर्चस्व की लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम था।
सुजीत सिन्हा का पाकिस्तान कनेक्शन
पुलिस जांच में यह खुलासा भी हो चुका है कि सुजीत सिन्हा अवैध हथियारों की आपूर्ति के बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पाकिस्तान से हथियार मंगवाने वाले नेटवर्क के संपर्क में था और इन हथियारों को अपने गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाता था। इस संबंध में पुलिस को जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मिले थे। कभी रांची और आसपास के जिलों में अमन साहू और सुजीत सिन्हा का नाम सुनते ही कारोबारी और ठेकेदार दहशत में आ जाते थे। लेकिन लगातार पुलिस कार्रवाई, गैंगवार, गिरफ्तारियों और एनकाउंटर की घटनाओं के बाद दोनों के नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा।
अब सुजीत सिन्हा की मौत के बाद माना जा रहा है कि झारखंड में उसके गिरोह का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है और रंगदारी के उस पुराने नेटवर्क को भी बड़ा झटका लगा है, जिसने वर्षों तक राज्य के कई जिलों में भय का माहौल बना रखा था।सुजीत सिन्हा के अपराध
चाईबासा जेल में है सुजीत सिन्हा की पत्नी
सुजीत सिन्हा का जमशेदपुर के अपराध से भी जुड़ा रहा है। वहीं उसकी पत्नी रिया सिन्हा चाईबासा मंडल कारा में बंद है। उसके पास से पुलिस ने मोबाइल और सिम बरामद किया था। जमशेदपुर के घाघीडीह सेंट्रल जेल में 2018 में जेल में बंद रहने के दौरान वह जेल से ही अपने गैंग को संचालित कर रहा था। रंगदारी की मांग कर रहा था।
सुजीत के संबंध जमशेदपुर के गैंगस्टर अखिलेश सिंह से भी रहे है। जो वर्तमान में दुमका जेल में बंद है। घाघीडीह सेंट्रल जेल में रहने के दौरान सुजीत सिन्हा ने अपने सहयोगियों के माध्यम से फर्जी सिम दूसरे के नाम से हासिल किया था। सिम का उपयोग झारखंड के कारोबारियों से रंगदारी मांगने में की जा रही थी। इसको लेकर परसुडीह थाना में सुजीत सिन्हा, उसकी पत्नी और गिरोह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जमशेदपुर के भुइयांडीह निवासी कारोबारी हरेराम सिंह से दो करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में वांटेड धनबाद के अपराधी प्रिंस खान और उसकी संलिप्तता सामने आई थी। गिरोह के छह सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हरेराम सिंह से रंगदारी मांगने के मामले में सीतारामडेरा थाना में सुजीत सिन्हा, उसकी पत्नी, वांटेड प्रिंस खान, बबलू खान समेत अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है। सुजीत सिन्हा इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय रहा है।
परसुडीह थाना की पुलिस ने उसे पूछताछ को रिमांड पर लिया था। उस समय पुलिस को उसने बताया था कि सुजीत ने बताया कि जमशेदपुर के कदमा थाना क्षेत्र में पतरातू के गैंगस्टर किशोर पांडेय, उसके अंगरक्षक बबलू सिंह और एक अन्य की गोली मारकर हत्या 16 अक्टूबर 2014 को की गई थी। इस मामले में भी सुजीत ने कई महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस को दी है। उसके अनुसार हत्या को संजय सिंह, विशाल सिंह और सूरज ने अंजाम दिया था। सभी सुशील श्रीवास्तव के लिए काम करते थे। अब हत्या का मुकदमा हजारीबाग के सुशील श्रीवास्तव के खिलाफ किशोर पांडेय की पत्नी की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
सुजीत सिन्हा ने बताया कि उसने अपनी कारबाइन, दो पिस्तौल चार साल पहले धनबाद के तेतुलमारी निवासी सूरज सिंह को रखने के लिए दी थी। एक कारबाइन व 200 राउंड गोली एक साल पहले बबलू खान के पास से पकड़ी गयी थी। गिरोह के पास स्कॉर्पियो गाड़ी और 40-50 दोपहिया वाहन हैं, जिन्हें ओएलएक्स से खरीदा गया था। रांची में पकड़े गए गिरोह के साथ इमरान को भी बाइक ओएलक्स से ही खरीद कर दी थी। तुपुदाना बीयर फैक्ट्री के मालिक योगेंद्र तिवारी को 50 लाख रुपये दिए थे। जब भी कॉल करता हूं। चार-पांच लाख पहुंचा जाता है। बताया कि चतरा जिले के शिवपुर साइडिंग में गोली अमन साव ने चलवायी है, जिसमें राजकिशोर सिंह यादव व लखीसराय के विशाल सिंह की संलिप्तता है। सुधीर ने बताया कि मैंने हत्या भी कराई थी।
कई कारोबारियों से मांगी थी रंगदारी
सुजीत सिन्हा ने बताया था कि उसके निर्देश पर शिवपुर साइडिंग पर गिरोह के अमन साहू, आशीष साहू, विशाल सिंह, राजकिशोर यादव व अन्य ने गोलियां चलाई। एक पेलोडर मालिक की हत्या कर दी गई। अंबे माइनिंग कंपनी से 50 लाख रुपये रंगदारी एवं प्रति टन 100 रुपये रंगदारी मांगी गई थी। विशाल के नाम से मेरे गिरोह के अमन साहू, आशीष एवं अन्य ने सारे कारोबारियों को फोन किया। वॉट्सएप आदि के माध्यम से धमकी दी जा रही है। इसके लिए सिम नंबर 7079480574 के नंबर प्रयोग किए गए। उस पर प्रोफाइल तस्वीर मेरी (सुजीत सिन्हा) की है। इसके लिए कई विदेशी नंबरों एवं अन्य नंबरों का प्रयोग करके भी रंगदारी मांगी जा रही है। जान से मारने की धमकी दी जा रही है। जनवरी में राजेंद्र साहू के नाम से ट्रांसपोर्टर के लिफ्टर अशोक साव की बोलेरो को मेरे कहने पर ही गिरोह के सदस्यों ने जलवाया था।
पीएलएफआई के सदस्य प्रेम गोप ने दिया था मोबाइल सिम
सुजीत बताया था कि जिस मोबाइल नंबर 7563828476 का प्रयोग घाघीडीह सेंट्रल जेल में रहकर कर रहा था। वह सिम उसे पीएलएफआइ का सदस्य प्रेम गोप, जो जेल में था। उसने दिया था। इस सिम से वह अपने गुर्गों और कारोबारियों से बात करता था। उसे तोड़कर फेंक दिया गया। जेटू कंपनी का मोबाइल और सैमसंग का छोटा वाला मोबाइल प्रेम गोप ने जेल से छूटने के बाद उपलब्ध कराया था। मोबाइल का पासवर्ड नहीं रहने के कारण मोबाइल नहीं खुला, तो उसको तोड़कर फेंक दिया। दूसरे मोबाइल में आइडिया कंपनी का सिम प्रयोग करने के बाद सिम निकालकर मोबाइल जेल में ही बंदी को दे दिया।
आईपीएल सट्टा के लिए अभिजीत के भाई ने लिए थे पांच लाख
इमरान का परिचय सेंटी उर्फ अभिजीत सिंह मोबाइल संख्या 6205837838 फोन से घटना के पांच-छह दिन पहले कराया था। सेंटी उर्फ अभिजीत सिंह को वह जानता है। उसका भाई बंटी सिंह है, जो तेतुलमारी धनबाद जिला का रहने वाला है। धनबाद जाने के क्रम में उससे परिचय हुआ था। उसने मुझसे आइपीएल में सट्टा लगाने के लिए पांच लाख रुपये लिए थे। इमरान का नाम साहिल मलिक है। सुजीत सिन्हा ने बताया कि जिस सिम का वह इस्तेमाल इमरान की मोबाइल सिम से बातचीत करने में करता था। इमरान के साथ जो दो लड़के थे। उसे वह नहीं जानता। ये सभी ङ्क्षहडाल्को के बीके झा की रेकी कर रहे थे। इस दौरान रांची मेंं इमरान पकड़ा गया।
बीयर फैक्ट्री के मालिक की हत्या से इनकार
सुजीत सिन्हा ने पुलिस को बताया कि अविनाश झा हिंडाल्को और बीयर फैक्ट्री के रमेश सिंह की हत्या की योजना मेरी नहीं थी। कटोटिया माइंस में काम चाहिए था, इसलिए बीके झा की रेकी कराई थी। फोन करके दबाव बना रहा था। कोई रंगदारी नहीं मांगी ताकि काम मिल जाए।




