रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन पर IT का बड़ा शिकंजा, 350 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा

झारखंड की बड़ी निर्माण कंपनी रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन पर आयकर विभाग की चार दिवसीय कार्रवाई में 350 करोड़ रुपये की अघोषित आय और 50 करोड़ रुपये के कथित हवाला लेन-देन के संकेत मिले हैं। तीन राज्यों में 200 अधिकारियों ने सर्च ऑपरेशन चलाकर फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के नेटवर्क की जांच शुरू की है।

रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन पर IT का बड़ा शिकंजा, 350 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा
फर्जी बिलिंग से टैक्स चोरी का खेल! हवाला नेटवर्क की भी जांच।

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      HighLights:

  • 4 दिन तक झारखंड, बिहार और हरियाणा में चली आयकर विभाग की कार्रवाई
  • 350 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा, कंपनी हिसाब नहीं दे सकी
  • व्हाट्सएप चैट और डिजिटल रिकॉर्ड में 50 करोड़ रुपये के हवाला ट्रांजेक्शन के संकेत
  • फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी बिल बनाकर टैक्स चोरी करने का आरोप

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की प्रमुख निर्माण कंपनियों में शामिल मेसर्स रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी 10 सहयोगी कंपनियों पर आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा द्वारा चार दिनों तक चलाया गया सर्च एवं सर्वे ऑपरेशन रविवार को समाप्त हो गया। इस कार्रवाई में विभाग के हाथ बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य लगे हैं। प्रारंभिक जांच में करीब 350 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा हुआ है, जिसका संतोषजनक हिसाब कंपनी प्रबंधन नहीं दे सका है।

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जांच के दौरान आयकर विभाग को ऐसे डिजिटल दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनसे करीब 50 करोड़ रुपये के हवाला लेन-देन के संकेत मिले हैं। विभाग अब इन वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रहा है।

व्हाट्सएप चैट और डिजिटल रिकॉर्ड बने जांच का आधार

सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों से कई अहम जानकारियां मिली हैं। व्हाट्सएप चैट, अकाउंटिंग रिकॉर्ड और डिजिटल फाइलों में हवाला नेटवर्क के जरिए रकम के आदान-प्रदान के संकेत मिले हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए दिल्ली और कोलकाता से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है, जो डेटा रिकवरी और दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है।

फर्जी बिलिंग के जरिए टैक्स चोरी का बड़ा नेटवर्क

आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने कई फर्जी कंपनियों के नाम पर बिल तैयार कर करोड़ों रुपये की टैक्स देनदारी कम दिखाई। प्रारंभिक जांच में फर्जी बिलिंग के माध्यम से टैक्स चोरी का संगठित नेटवर्क सामने आया है। विभाग अब उन सभी कंपनियों और व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है, जिनके नाम इन लेन-देन में सामने आए हैं।

तीन राज्यों में एक साथ हुई कार्रवाई

आयकर विभाग की यह बड़ी कार्रवाई झारखंड, बिहार और हरियाणा में एक साथ की गई। छापेमारी के प्रमुख स्थानों में शामिल रहे—

रांची के कचहरी रोड स्थित पंचवटी प्लाजा में कंपनी का कार्यालय।
बिहार के बेगूसराय स्थित कृष्णा नगर कार्यालय।
हरियाणा के गुरुग्राम सेक्टर-54 स्थित सनसिटी शॉपिंग आर्केड में कॉरपोरेट कार्यालय।

इस पूरे ऑपरेशन में 200 से अधिक आयकर अधिकारी एवं सुरक्षा बल के जवान शामिल रहे।

इन सहयोगी कंपनियों पर भी जांच

आयकर विभाग की कार्रवाई केवल रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन तक सीमित नहीं रही। जांच के दायरे में उसकी कई सहयोगी कंपनियां भी शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

आयुष श्रेयस प्रॉपर्टी प्राइवेट लिमिटेड
आरकेएससीपीएल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड
आरकेएससीपीएल प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड

ये कंपनियां राष्ट्रीय राजमार्ग, पुल-पुलिया, स्टेडियम, आवासीय भवन निर्माण और खनन परियोजनाओं में सक्रिय हैं।

जांच अभी जारी, बढ़ सकती है कार्रवाई

आयकर विभाग का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन का विश्लेषण अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद टैक्स चोरी, हवाला लेन-देन और फर्जी बिलिंग से जुड़े मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि जांच के दायरे में आने वाले व्यक्तियों और कंपनियों की संख्या अभी बढ़ सकती है।