JPSC Controversy: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित धांधली पर SC पहुंचा मामला, रद्द कर दोबारा परीक्षा की मांग

JPSC Controversy: 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित धांधली का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। परीक्षा रद्द करने, रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच समिति और OMR ऑडिट की मांग की गई है।

JPSC Controversy: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित धांधली पर SC पहुंचा मामला, रद्द कर दोबारा परीक्षा की मांग
14वीं JPSC परीक्षा में कथित धांधली मामला पर SC पहुंचा ।

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  • 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
  • 19 अप्रैल 2026 को हुई परीक्षा रद्द करने की मांग
  • रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने का अनुरोध
  • OMR स्कैनिंग, कोडिंग और मूल्यांकन के ऑडिट की मांग

रांची (Threesocieties.com Desk):  14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने का अनुरोध किया गया है।

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याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर उठे सवालों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजित कराने, OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया का ऑडिट कराने की मांग उठाई गई है।

रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि परीक्षा को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच स्वतंत्र एजेंसी या स्वतंत्र समिति से कराई जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने का अनुरोध किया है। याचिका के मुताबिक, परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच उठे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान जरूरी है। स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा के किसी भी चरण में नियमों का उल्लंघन या किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।

OMR स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रणाली के ऑडिट की मांग

याचिका में OMR शीट की स्कैनिंग, कोडिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी स्वतंत्र ऑडिट की मांग की गई है। इसके अलावा परिणाम तैयार करने में इस्तेमाल की गई तकनीकी प्रणाली की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा में OMR स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इन प्रक्रियाओं का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों का जवाब देने में मदद कर सकता है।

प्रश्नपत्र से रिजल्ट तक पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में केवल परीक्षा के एक चरण की जांच की मांग नहीं की गई है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में लाने का अनुरोध किया गया है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके प्रबंधन से लेकर परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा संचालन, उत्तर पुस्तिकाओं की प्रक्रिया, OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और अंतिम परिणाम तैयार करने तक के चरण शामिल हैं। याचिका में संबंधित तकनीकी प्रणालियों और डेटा की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।

परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं, तो अभ्यर्थियों के हित में पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जानी चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा की प्रक्रिया और परिणाम की विश्वसनीयता उनके भविष्य से सीधे जुड़ी होती है। इसी आधार पर याचिका में निष्पक्ष जांच और आवश्यक होने पर पुनः परीक्षा कराने की मांग की गई है।

अभ्यर्थियों के बीच पारदर्शिता को लेकर सवाल

14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद इस विवाद पर न्यायिक स्तर पर भी चर्चा का रास्ता खुल गया है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत में सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी। केवल याचिका दायर होने से आरोप साबित नहीं माने जा सकते हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें उठाई गई हैं—कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, परीक्षा प्रक्रिया और OMR मूल्यांकन प्रणाली का ऑडिट तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करना। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अदालत के समक्ष संबंधित पक्षों की दलीलों पर अभ्यर्थियों की नजर है। अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, इससे 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के भविष्य को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।