JPSC-JSSC विवाद: 15 सितंबर को सरकार की पैरवी कमजोर पड़ी तो CM आवास घेरेंगे छात्र, देवेंद्रनाथ महतो का ऐलान
JPSC-JSSC विवाद पर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार की पैरवी पर सवाल उठाए। 15 सितंबर को कमजोर पक्ष रखने पर CM आवास घेराव की चेतावनी, 24 अगस्त से भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा।
HighLights:
- देवेंद्रनाथ महतो का आरोप- सरकार ने कोर्ट में CID जांच और अपने फैसले का मजबूती से बचाव नहीं किया
- 15 सितंबर की सुनवाई पर सरकार की पैरवी पर रहेगी छात्रों की नजर, कमजोर पक्ष रखने पर CM आवास घेराव की चेतावनी
- 24 अगस्त से नेमरा से शुरू होगी ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’, झारखंड के सभी 24 जिलों तक जाएगी
- PGT समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी कार्रवाई और पारदर्शी जांच की मांग
रांची (Threesocieties.com Desk): JPSC-JSSC विवाद को लेकर झारखंड में छात्र आंदोलन एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं। झारखंड हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी फैसले पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार की कोर्ट में पैरवी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार ने छात्रों के हित में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा, तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच की ओर से रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि छात्रों की लड़ाई किसी निर्दोष अभ्यर्थी की नौकरी छीनने के लिए नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से अभ्यर्थियों को राहत
JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद में राज्य सरकार ने जांच के आधार पर कई परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था। इस फैसले के खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से CID जांच का हवाला दिया गया। सरकार का पक्ष था कि पूरे मामले की जांच CID कर रही है और जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है। ऐसे में अदालत से परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करने का आग्रह किया गया। हालांकि, सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के रद्द करने संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद संबंधित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है और उनके भविष्य पर मंडरा रही अनिश्चितता कुछ समय के लिए टली है।
देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार की पैरवी पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार की ओर से अदालत में रखे गए पक्ष पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि यदि सरकार ने अपने फैसले के आधार और CID जांच से जुड़े तथ्यों को प्रभावी तरीके से अदालत के सामने रखा होता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के फैसले का आधार जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई थी, तो अदालत में उसे मजबूती से क्यों नहीं रखा गया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि सुनवाई के पहले दिन महाधिवक्ता अदालत में क्यों नहीं पहुंचे।
देवेंद्रनाथ महतो ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने से छात्रों के बीच यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर है। उन्होंने कहा कि छात्र अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में कथित धांधली के मुद्दे पर उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
15 सितंबर को अगली सुनवाई, सरकार को चेतावनी
छात्र नेता ने कहा कि 15 सितंबर की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी। अगर उस दिन सरकार ने JPSC-JSSC विवाद में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा और छात्रों के हितों की अनदेखी हुई, तो छात्र आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाने तथा चक्का जाम जैसे कार्यक्रमों की भी घोषणा की जा सकती है। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि अब आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या एक भर्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आगे बढ़ेगा।
24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’
आंदोलन के अगले चरण के तहत 24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरू करने की घोषणा की गई है। यह यात्रा दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से शुरू होगी और झारखंड के सभी 24 जिलों तक पहुंचने का दावा किया गया है। मंच का कहना है कि यात्रा का उद्देश्य सिर्फ सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि राज्य में ऐसी भर्ती व्यवस्था की मांग को मजबूत करना है, जिसमें पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं की कोई गुंजाइश न रहे। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि छात्रों को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें परीक्षा आयोजित होने से लेकर रिजल्ट और नियुक्ति तक हर स्तर पर पारदर्शिता बनी रहे।
5 जुलाई से शुरू हुआ था आंदोलन
देवेंद्रनाथ महतो के मुताबिक, छात्रों का आंदोलन 5 जुलाई से शुरू हुआ था। इसके बाद 25 जुलाई से आंदोलन को अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में बदल दिया गया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दबाव में सरकार को कई परीक्षाओं पर कार्रवाई करनी पड़ी। उनके अनुसार, 22 परीक्षाएं रद्द हुईं, छह परीक्षाएं स्थगित की गईं और 17 मामलों में जांच बैठाई गई। छात्र नेता ने कहा कि इसके बावजूद कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। उनका कहना है कि सिर्फ परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोषियों की पहचान हो, कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
CID जांच को लेकर भी सवाल
JPSC-JSSC विवाद की जांच CID कर रही है। छात्र मंच के अनुसार, जांच के दौरान कई संदिग्धों से पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है और बड़ी संख्या में लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। देवेंद्रनाथ महतो का सवाल है कि अगर CID जांच सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले का आधार है, तो जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत के सामने प्रभावी तरीके से क्यों नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि छात्रों को जांच की निष्पक्षता और उसके परिणाम दोनों पर भरोसा होना चाहिए। जांच के नाम पर मामला लंबा खिंचने के बजाय दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
PGT समेत अन्य परीक्षाओं पर भी उठे सवाल
प्रेस वार्ता में PGT भर्ती समेत कई अन्य परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए। देवेंद्रनाथ महतो ने आरोप लगाया कि कुछ भर्ती मामलों में गंभीर शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मांग की कि जिन नियुक्तियों को लेकर जांच या गंभीर विवाद चल रहा है, उनमें जल्दबाजी में आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जाए। उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे अभ्यर्थियों से जुड़े मामलों की भी जांच पूरी होने तक समीक्षा की मांग की। हालांकि, छात्र मंच ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी लड़ाई किसी निर्दोष अभ्यर्थी को नुकसान पहुंचाने की नहीं है। मांग यह है कि दोषी और निर्दोष की पहचान जांच के आधार पर हो तथा पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।
राजेश प्रसाद बोले- सरकार ने भरोसा मांगा था
प्रेस वार्ता में मंच के प्रतिनिधि राजेश प्रसाद ने भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से भरोसा रखने की अपील की गई थी और छात्रों ने उस भरोसे पर आंदोलन को आगे बढ़ाया। उनका आरोप है कि बाद में जब परीक्षाओं को रद्द करने के सरकारी फैसले को अदालत में चुनौती मिली, तब सरकार की ओर से अपेक्षित मजबूती से पक्ष नहीं रखा गया।
राजेश प्रसाद के मुताबिक, सरकार के पास अपने फैसले के समर्थन में CID जांच और अन्य प्रशासनिक आधार मौजूद थे। अगर इन्हें अदालत के सामने विस्तार से रखा जाता तो शायद वर्तमान स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने कहा कि मंच फिलहाल यह नहीं कह रहा कि सरकार ने जानबूझकर छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के लिए कोई साजिश की, लेकिन अगर छात्रों के आंदोलन को शांत कराने के लिए फैसले लिए गए और बाद में अदालत में उनका प्रभावी बचाव नहीं किया गया, तो यह छात्रों के साथ विश्वासघात के समान होगा।
छात्रों की मांग- भर्ती व्यवस्था में हो स्थायी सुधार
छात्र मंच ने कहा कि झारखंड में बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षा में कथित अनियमितता और नियुक्तियों को लेकर विवाद ने युवाओं के भरोसे को प्रभावित किया है। मंच की प्रमुख मांग है कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्र की गोपनीयता, ऑनलाइन प्रक्रिया, मूल्यांकन और नियुक्ति तक हर स्तर पर जवाबदेही तय हो। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि छात्रों को बार-बार आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। सरकार को ऐसी स्थायी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें अभ्यर्थियों को अपनी मेहनत और परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा रहे।
अब 15 सितंबर पर टिकी नजर
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल अभ्यर्थियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन छात्र आंदोलन समाप्त होने के बजाय नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। एक तरफ 24 अगस्त से भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा शुरू करने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर 15 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई को लेकर छात्र मंच ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है।
अब देखना होगा कि अगली सुनवाई में राज्य सरकार JPSC-JSSC विवाद, CID जांच और परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का अदालत में किस तरह बचाव करती है। फिलहाल देवेंद्रनाथ महतो के ऐलान के बाद झारखंड में भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा एक बार फिर आंदोलन और सियासत के केंद्र में आ गया है।
Anjala Kumar 



