JSSC CGL पेपर लीक का नेटवर्क बेनकाब! चार अभ्यर्थी जेल, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से खुला पैसों का खेल
JSSC CGL Paper Leak: झारखंड JSSC CGL पेपर लीक मामले में CID ने चार सफल अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। अब तक 150 संदिग्धों से पूछताछ, ऑनलाइन लेन-देन के साक्ष्य और परीक्षा एजेंसी के दो कर्मचारी रिमांड पर हैं।
HighLights:
- JSSC CGL पेपर लीक मामले में चार सफल अभ्यर्थी गिरफ्तार, होटवार जेल भेजे गए
- CID की 17 सदस्यीय SIT अब तक करीब 150 संदिग्धों और अभ्यर्थियों से कर चुकी है पूछताछ
- अभ्यर्थियों, दलालों और परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों के बीच ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य मिले
- दिल्ली, यूपी, मुंबई, बिहार और राजस्थान तक मामले के अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की झारखंड स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC CGL)-2023 में कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता की जांच कर रही CID की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। मामले की जांच के लिए गठित 17 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) अब तक करीब 150 संदिग्धों और अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर CID ने परीक्षा में सफल रहे चार अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
CID की जांच में कथित तौर पर अभ्यर्थियों, दलालों, एजेंटों और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के बीच ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि किस अभ्यर्थी ने किस व्यक्ति या खाते में कितनी रकम भेजी और इसके बदले उसे क्या उपलब्ध कराया गया।
चार सफल अभ्यर्थी गिरफ्तार, होटवार जेल भेजे गए
CID ने मामले में जिन चार अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है, उनमें दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी और आनंद कुमार सिंह शामिल हैं। चारों पर कथित तौर पर गलत तरीके से JSSC CGL परीक्षा में सफलता हासिल करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद चारों को रांची स्थित CID की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में रांची के होटवार जेल भेज दिया गया।
कहां के रहने वाले हैं चारों अभ्यर्थी?
दीपक कुमार धनबाद थाना क्षेत्र के नावाडीह स्थित श्यामली होटल के समीप डुप्लेक्स सनशाइन अपार्टमेंट का निवासी बताया गया है। उमेश कुमार राय मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के काकिला डयूल का रहने वाला है। उसका वर्तमान पता बोकारो जिले के दुग्दा थाना क्षेत्र स्थित न्यू बीसीसीएल कॉलोनी का क्वार्टर नंबर एम-25/3 बताया गया है। विजय कुमार तिवारी धनबाद के राजगंज थाना क्षेत्र के रोआम धड़कीड़ो का रहने वाला है। वहीं, आनंद कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के सारण जिले के कोपा थाना क्षेत्र के चतरा गांव का निवासी है। वह वर्तमान में धनबाद के सुदामडीह थाना क्षेत्र स्थित सुदामडीह रिवर साइड कॉलोनी मार्केट में रहता था।
150 संदिग्धों और अभ्यर्थियों से हो चुकी है पूछताछ
JSSC CGL पेपर लीक मामले की जांच में CID की SIT लगातार संदिग्ध अभ्यर्थियों और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। अब तक करीब 150 लोगों को नोटिस जारी कर उनके बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच के दौरान सामने आ रहे नए तथ्यों के आधार पर अन्य अभ्यर्थियों को भी नोटिस जारी किया जा रहा है। CID अभ्यर्थियों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और परीक्षा संचालन से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि पेपर लीक का नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था और इसके तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से खुल रहा पैसों का खेल
CID की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन बताई जा रही है। जांच एजेंसी को अभ्यर्थियों, दलालों, एजेंटों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के बीच पैसों के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किस खाते से किस खाते में रकम भेजी गई, रकम कितनी थी और उसका उद्देश्य क्या था। इन्हीं वित्तीय साक्ष्यों को आरोपियों के बयानों और अन्य दस्तावेजों से मिलाया जा रहा है। CID को पूछताछ के दौरान ऐसे इनपुट भी मिले हैं, जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि पैसे लेकर अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए गए तथा उन्हें परीक्षा में सफल कराने में मदद की गई।
परीक्षा एजेंसी से जुड़े दो कर्मचारी पांच दिन की रिमांड पर
इस मामले में CID ने दिल्ली से परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को भी गिरफ्तार किया है। दोनों को CID ने पांच दिनों की रिमांड पर लिया है और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। दोनों आरोपी JSSC की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी वेबेल टेक्नोलॉजी की सहयोगी संस्था ICN से जुड़े बताए गए हैं। आरोप है कि परीक्षा संचालन की प्रक्रिया के दौरान इन लोगों की भूमिका संदिग्ध रही और कथित पेपर लीक में इनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है। CID को दोनों से पूछताछ में कुछ महत्वपूर्ण इनपुट मिलने की बात सामने आई है। इन इनपुट के आधार पर जांच एजेंसी दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
ICN संचालक मिथिलेश सिंह की तलाश तेज
जांच के दौरान ICN एजेंसी के संचालक मिथिलेश सिंह का नाम भी सामने आया है। बताया गया है कि मिथिलेश सिंह मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और दिल्ली में रहता था। CID उसके संभावित ठिकानों पर पहले भी कई बार छापेमारी कर चुकी है, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। अब जांच एजेंसी उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लेने की तैयारी में है। मिथिलेश सिंह की तलाश के साथ ही CID यह भी पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा संचालन से जुड़े और कौन-कौन लोग कथित नेटवर्क का हिस्सा थे।
दिल्ली, यूपी, मुंबई, बिहार समेत कई राज्यों में कनेक्शन की तलाश
JSSC और JPSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही CID अब मामले के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि नेटवर्क में झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे लोग अभ्यर्थियों को सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल कराने का झांसा देकर पैसे लेते थे। CID की टीमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुंबई, बिहार, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में संभावित आरोपियों और संदिग्धों की तलाश कर सकती हैं।
पहले भी परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों पर हुई है कार्रवाई
JSSC CGL कथित पेपर लीक मामले में CID इससे पहले परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर चुकी है। इस मामले में अभय कुमार तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसी अभय कुमार तिवारी की भूमिका को भी गंभीरता से जांच रही है।
1 जनवरी 2025 को दर्ज हुआ था मामला
JSSC CGL पेपर लीक मामले में CID थाना कांड संख्या 01/2025 के तहत 1 जनवरी 2025 को मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद से जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब तक की जांच में CID को कथित पेपर लीक, अभ्यर्थियों से पैसे लेने, प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका के संबंध में कई साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क तक पहुंचना बड़ी चुनौती
चार अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी और परीक्षा एजेंसी से जुड़े दो कर्मचारियों को रिमांड पर लेने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब CID की कोशिश केवल अभ्यर्थियों तक सीमित न रहकर दलालों, एजेंटों, परीक्षा एजेंसी के कर्मचारियों और कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक की जानकारी सबसे पहले किस स्तर पर बाहर गई, अभ्यर्थियों तक प्रश्न-उत्तर कैसे पहुंचे और इसके बदले कितनी रकम का लेन-देन हुआ। आने वाले दिनों में पूछताछ और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
Threesocieties News Desk 



