105 साल के रसिक चंद्र को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, 38 साल पुराने हत्या केस में बाकी सजा माफ
पश्चिम बंगाल के मालदा के 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। 1988 के हत्या मामले में उम्रकैद की बाकी सजा माफ करते हुए कोर्ट ने 2024 की अंतरिम जमानत को अंतिम आदेश माना। जानें 38 साल पुराने मामले की पूरी कहानी और टाइमलाइन।
HighLights:
- 1988 के हत्या मामले में 1994 में रसिक चंद्र मंडल को सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
- 2024 में स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए मिली थी अंतरिम जमानत
- चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने 2024 के जमानत आदेश को अंतिम आदेश माना
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बची हुई सजा के लिए अब मंडल को दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा
नई दिल्ली/कोलकाता(Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रहने वाले 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब 38 साल पुराने हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए मंडल की बची हुई सजा अब उन्हें पूरी नहीं करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में दी गई उनकी अंतरिम जमानत को ही अंतिम आदेश मानते हुए मामले को बंद कर दिया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान मंडल की उम्र को देखते हुए यह राहत दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी उम्रकैद की कोई सजा अभी शेष है, तो उसे माफ किया जाता है। इसके साथ ही उन्हें दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
1988 में हत्या, 1994 में उम्रकैद
रसिक चंद्र मंडल का जन्म वर्ष 1920 में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हुआ था। वर्ष 1988 में मालदा में हुई एक हत्या के मामले में उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया। करीब छह साल बाद, वर्ष 1994 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। उस समय मंडल की उम्र करीब 68 वर्ष थी। मंडल ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कानूनी लड़ाई जारी रखी। वर्ष 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां भी उनकी याचिका खारिज हो गई।
99 साल की उम्र में मांगी थी रिहाई
उम्र बढ़ने के साथ मंडल की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आईं। वर्ष 2020 में करीब 99 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए समयपूर्व रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया। मामला आगे बढ़ता रहा और मंडल की उम्र भी 100 वर्ष के पार पहुंच गई।
2024 में मिली थी अंतरिम जमानत
वर्ष 2024 में जब मंडल की उम्र 105 वर्ष के करीब पहुंच चुकी थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गंभीर उम्र संबंधी स्वास्थ्य परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम जमानत/पैरोल पर रिहाई का निर्देश दिया। अदालत ने निचली अदालत को जमानत की शर्तें तय करने का निर्देश दिया था। मंडल 29 नवंबर 2024 तक जेल में रहे थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें राहत मिली।
अब दोबारा जेल नहीं जाएंगे रसिक चंद्र
अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अंतिम रूप देते हुए वर्ष 2024 के अंतरिम जमानत आदेश को ही अंतिम आदेश मान लिया है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की उम्र को देखते हुए मामले को बंद किया जा रहा है और यदि कोई सजा बाकी है तो उसे माफ किया जाता है। इसका सीधा मतलब है कि 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को उम्रकैद की बची हुई अवधि पूरी करने के लिए दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा।
38 साल पुराने मामले की पूरी टाइमलाइन
1920: मालदा जिले में रसिक चंद्र मंडल का जन्म।
1988: मालदा में हत्या की घटना हुई और मंडल को मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया।
1994: ट्रायल कोर्ट ने 68 वर्ष की उम्र में मंडल को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
2018: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई, लेकिन राहत नहीं मिली।
2020: 99 वर्ष की उम्र में मंडल ने बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर समयपूर्व रिहाई की मांग की।
मई 2021: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया।
2024: करीब 105 वर्ष की उम्र में सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए उन्हें अंतरिम जमानत/पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया।
21 अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट ने 2024 की अंतरिम जमानत को अंतिम आदेश माना और बची हुई सजा माफ करते हुए मंडल को दोबारा हिरासत में नहीं लेने का आदेश दिया।
उम्र बनी राहत का सबसे बड़ा आधार
रसिक चंद्र मंडल का मामला इसलिए भी असाधारण है क्योंकि मुकदमे की शुरुआत के समय और सजा के दौरान उनकी उम्र काफी अधिक थी और अब वह 105 वर्ष के हो चुके हैं। लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनकी उम्र और स्वास्थ्य लगातार अदालत के सामने महत्वपूर्ण तथ्य बने रहे।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के साथ दशकों पुराने इस आपराधिक मामले में मंडल को बड़ी राहत मिल गई है। अदालत ने उनकी उम्र को देखते हुए शेष सजा से राहत दी और 2024 में मिली अंतरिम जमानत को ही अंतिम रूप दे दिया।




