टाटा संस की कमान फिर चंद्रशेखरन के हाथ, 5 साल का कार्यकाल; IPO की राह साफ

Tata Sons Board ने N. Chandrasekaran को पांच साल के तीसरे कार्यकाल के लिए चेयरमैन मंजूर किया। RBI के फैसले के बाद Tata Sons की लिस्टिंग और IPO को लेकर भी हलचल तेज हुई।

टाटा संस की कमान फिर चंद्रशेखरन के हाथ, 5 साल का कार्यकाल; IPO की राह साफ
टाटा संस में बड़ा फैसला: चंद्रशेखरन फिर चेयरमैन।

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  HighLights:

  • टाटा संस बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को तीसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दी
  •  चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना था
  • अगस्त 2026 में चंद्रशेखरन ने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्ति की पेशकश नहीं करने की जानकारी दी थी

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को बड़ा फैसला हुआ। कंपनी के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने को मंजूरी दे दी। यह उनका तीसरा पांच साल का कार्यकाल होगा। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब एक महीने पहले चंद्रशेखरन ने Tata Trusts के नामित निदेशकों को जानकारी दी थी कि वे 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। Tata Trusts ने 13 अगस्त को जारी बयान में इसकी पुष्टि करते हुए उनके योगदान की सराहना की थी और नए चेयरमैन के चयन के लिए प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। अब बोर्ड के ताजा फैसले से नेतृत्व परिवर्तन की संभावित प्रक्रिया फिलहाल टल गई है और चंद्रशेखरन को Tata Sons की कमान आगे भी संभालने का रास्ता साफ हो गया है।

RBI के फैसले के बाद Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा अहम

चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार का फैसला ऐसे समय हुआ है जब Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में है। RBI ने Tata Sons की उस कोशिश को स्वीकार नहीं किया, जिसके तहत कंपनी अपनी NBFC/CIC स्थिति से बाहर निकलकर अनिवार्य लिस्टिंग से बचना चाहती थी। Reuters के अनुसार, RBI के इस फैसले से Tata Sons के लिए सार्वजनिक लिस्टिंग की संभावना फिर मजबूत हुई है।

Tata Sons को RBI के नियामकीय ढांचे के तहत एक Core Investment Company के रूप में वर्गीकृत किया गया है। RBI के उपलब्ध रिकॉर्ड में भी Tata Sons को Upper Layer CIC के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 तक Tata Sons की standalone assets करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये थीं। नियामकीय शर्तों के कारण कंपनी की लिस्टिंग का सवाल महत्वपूर्ण बन गया है। हालांकि, IPO की औपचारिक प्रक्रिया के सभी चरण शुरू होने की आधिकारिक घोषणा अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे Tata Sons की संभावित/नियामकीय रूप से जरूरी लिस्टिंग की दिशा में बड़ा घटनाक्रम कहना अधिक सटीक होगा।

अगस्त में खुद नहीं चाहते थे तीसरा कार्यकाल

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि अगस्त में चंद्रशेखरन ने खुद तीसरे कार्यकाल की पेशकश नहीं करने का फैसला बताया था। Tata Trusts की ओर से 13 अगस्त को जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, 12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने Tata Sons के चेयरमैन पद पर अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करने की जानकारी दी थी। इसके बाद Sir Dorabji Tata Trust ने नए चेयरमैन के चयन के लिए Selection Committee बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। लेकिन 17 सितंबर की बोर्ड बैठक के बाद स्थिति बदल गई और बोर्ड ने उन्हें एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए मंजूरी दे दी। Reuters ने भी इसे उनके पहले के फैसले में बदलाव के रूप में रिपोर्ट किया है।

चंद्रशेखरन और Tata Group का लंबा रिश्ता

एन. चंद्रशेखरन 2017 में Tata Sons के चेयरमैन बने थे। 2022 में उन्हें दूसरा पांच साल का कार्यकाल मिला था, जो फरवरी 2027 में पूरा होना था। Tata Sons के आधिकारिक दस्तावेज में उनके दूसरे कार्यकाल की अवधि 21 फरवरी 2022 से 20 फरवरी 2027 दर्ज है।अब तीसरे पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी मिलने के बाद वह अगले चरण में भी Tata Group की रणनीति और उसकी प्रमुख कंपनियों के साथ समूह की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे।

जमशेदपुर से है चंद्रशेखरन का खास रिश्ता

चंद्रशेखरन के दोबारा Tata Sons की कमान संभालने की खबर का जमशेदपुर में खास महत्व है। Tata Steel और Tata Group के साथ शहर का ऐतिहासिक रिश्ता रहा है और चंद्रशेखरन का भी जमशेदपुर से पारिवारिक जुड़ाव बताया जाता है। उनकी पत्नी ललिता चंद्रशेखरन का संबंध जमशेदपुर से है। बताया जाता है कि उन्होंने शहर के Sacred Heart Convent School से पढ़ाई की। उनके परिवार का Tata Steel से भी पुराना संबंध रहा है। इसी वजह से चंद्रशेखरन का जमशेदपुर से जुड़ाव केवल कारोबारी नहीं बल्कि पारिवारिक भी माना जाता है। शहर में Tata Steel से जुड़े कारोबारी और कर्मचारी संगठनों के बीच भी चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कारोबारियों का मानना है कि Tata Sons में नेतृत्व की निरंतरता समूह के लिए महत्वपूर्ण है।

झारखंड में निवेश पर भी रहा है जोर

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में Tata Group की झारखंड और जमशेदपुर में मौजूदगी को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हुई हैं। 2026 में झारखंड में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और निवेश को लेकर Tata Group की योजनाओं ने भी राज्य में उद्योग जगत का ध्यान खींचा।जमशेदपुर के लिए Tata Group का महत्व केवल रोजगार या Tata Steel तक सीमित नहीं है। शहर की अर्थव्यवस्था, कारोबार, सामाजिक संस्थाओं और औद्योगिक पहचान में Tata Group की बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में Tata Sons के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को लेकर होने वाला कोई भी बड़ा फैसला जमशेदपुर में विशेष रुचि पैदा करता है।

अब आगे क्या?

चंद्रशेखरन को तीसरे पांच साल के कार्यकाल की मंजूरी और Tata Sons की लिस्टिंग से जुड़े नियामकीय घटनाक्रम ने कंपनी के लिए अगले कुछ वर्षों की तस्वीर को महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ नेतृत्व में निरंतरता बनी है, वहीं दूसरी तरफ RBI के फैसले के बाद Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा आगे बढ़ सकता है। हालांकि लिस्टिंग की समयसीमा, IPO का आकार, वैल्यूएशन और शेयर बिक्री की अंतिम संरचना जैसी जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में Tata Sons की ओर से लिस्टिंग को लेकर उठाए जाने वाले औपचारिक कदम और बोर्ड स्तर पर लिए जाने वाले फैसले खास तौर पर महत्वपूर्ण होंगे।