सुप्रीम कोर्ट से निलंबित IAS विनय चौबे को बड़ी राहत, हजारीबाग जमीन घोटाले में सशर्त जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को हजारीबाग भूमि घोटाला मामले में सशर्त जमानत दे दी है। जानिए क्या हैं जमानत की शर्तें, क्या है पूरा मामला, किन-किन लोगों के नाम FIR में शामिल हैं और अब आगे क्या होगा।
HighLights:
- सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित IAS विनय कुमार चौबे को सशर्त जमानत दी
- हजारीबाग भूमि घोटाले में झारखंड हाईकोर्ट ने पहले जमानत याचिका खारिज की थी
- देश छोड़ने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्त पर मिली राहत
- ACB ने वर्ष 2025 में किया था गिरफ्तार, लंबे समय से न्यायिक हिरासत में थे
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड के चर्चित निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने हजारीबाग भूमि घोटाला मामले में उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। यह मामला उनके हजारीबाग के उपायुक्त (DC) रहते कथित तौर पर सेवायत, खासमहल और वनभूमि की अवैध खरीद-बिक्री, म्यूटेशन और दस्तावेजों में गड़बड़ी से जुड़ा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत के दौरान विनय चौबे देश नहीं छोड़ सकेंगे, मामले के गवाहों से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं करेंगे और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन हुआ तो राज्य सरकार जमानत रद्द कराने के लिए संबंधित अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।
हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इस मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और चौबे लंबे समय से जेल में बंद हैं। राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि विनय चौबे प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और जमानत मिलने पर वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त राहत दे दी।
क्या है हजारीबाग भूमि घोटाला?
यह मामला हजारीबाग जिले में सरकारी, सेवायत, खासमहल और वनभूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि की प्रकृति बदलकर निजी लोगों के नाम हस्तांतरित करने से जुड़ा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी नियमों की अनदेखी कर प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
73 लोगों को बनाया गया आरोपी
इस चर्चित मामले में कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे के अलावा उनके करीबी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचलाधिकारी शैलेश कुमार, ब्रोकर विजय सिंह सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
ACB की जांच में क्या सामने आया?
ACB के अनुसार, वर्ष 2010 से 2015 के बीच कथित रूप से कई भूमि लेन-देन किए गए। आरोप है कि कुछ वनभूमि का म्यूटेशन नियमों के विपरीत कराया गया और करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन भी हुए। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि संबंधित दस्तावेजों और आर्थिक लेन-देन की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
कब हुई थी गिरफ्तारी?
एंटी करप्शन ब्यूरो ने विनय चौबे को वर्ष 2025 में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वे लगातार न्यायिक हिरासत में थे। हजारीबाग भूमि घोटाले के अलावा उनके खिलाफ उत्पाद नीति (शराब घोटाला), आय से अधिक संपत्ति और अन्य मामलों की भी जांच चल रही है। हालांकि इन मामलों में उन्हें पहले ही अलग-अलग अदालतों से राहत मिल चुकी है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद विनय चौबे की जेल से रिहाई का रास्ता लगभग साफ हो गया है। जमानत की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने और निचली अदालत में आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बाद उनकी रिहाई संभव होगी। हालांकि उन्हें अदालत द्वारा तय की गई सभी शर्तों का पालन करना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है। इससे मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं मानी जाएगी। भूमि घोटाले की सुनवाई और जांच आगे भी जारी रहेगी तथा अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर होगा।




