मिथिला का मखाना अब कनाडा तक! दरभंगा से पहली बार 7 टन फ्लेवर्ड मखाना निर्यात
दरभंगा से पहली बार 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा निर्यात किया गया है। एपीडा समर्थित इस पहल से मिथिला के किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है। जल्द दक्षिण अफ्रीका और बेल्जियम के लिए भी मखाना की नई खेप भेजी जाएगी।
HighLights:
- पहली बार दरभंगा से 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा निर्यात
- एपीडा के सहयोग से न्यूट्रिविन एग्रो ने शुरू की नई पहल
- वैल्यू एडिशन से किसानों को 10-15% तक अधिक कीमत मिलने लगी
- जल्द दक्षिण अफ्रीका और बेल्जियम के लिए भी भेजी जाएगी नई खेप
दरभंगा (Threesocieties.com Desk): उत्तर बिहार की पहचान बन चुका मिथिला का मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। दरभंगा से पहली बार 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना समुद्री मार्ग से कनाडा निर्यात किया गया है। यह सिर्फ एक निर्यात नहीं, बल्कि मिथिला की कृषि, किसानों और बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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इस पहल को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से न्यूट्रिविन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड ने पूरा किया है। इससे मिथिला के मखाना को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
किसानों को मिल रहा बेहतर दाम
दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों के प्रगतिशील किसान सिकंदर मुखिया, केशव साहनी और महेश मुखिया का कहना है कि पहले वे केवल कच्चा मखाना बेचते थे, लेकिन अब ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग, फ्लेवरिंग और आधुनिक पैकेजिंग के जरिए उत्पाद का मूल्य बढ़ गया है। वैल्यू एडिशन के कारण मखाना का वेस्टेज कम हुआ है और किसानों को अपने उत्पाद का 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक मूल्य मिलने लगा है। इससे उनकी आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
दुनिया के कई देशों में बढ़ रही मांग
मिथिला का मखाना पहले से ही अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपनी पहचान बना चुका है। अब फ्लेवर्ड और पैकेज्ड मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है। शी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं निर्यातक सैय्यद फराज ने बताया कि हजारों किसानों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बाजार का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इसी महीने दक्षिण अफ्रीका और बेल्जियम के लिए भी दरभंगा से नई खेप भेजी जाएगी, जिससे निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।
बिहार के निर्यात को मिलेगा नया आयाम
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि मखाना अब बिहार की वैश्विक पहचान बन चुका है। सुपरफूड के रूप में इसकी मांग दुनिया भर में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी करीब 0.5 प्रतिशत है। यदि मखाना जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात इसी गति से बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में बिहार की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और मिथिला क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
वैल्यू एडिशन बना किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम
विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल उत्पादन बढ़ाने से अधिक महत्वपूर्ण है कृषि उत्पादों का वैल्यू एडिशन। मखाना की वैज्ञानिक ग्रेडिंग, आधुनिक प्रोसेसिंग, फ्लेवरिंग और आकर्षक पैकेजिंग के कारण यह अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप तैयार हो रहा है। यही वजह है कि विदेशी बाजारों में इसकी कीमत और मांग दोनों बढ़ रही हैं।
मिथिला के लिए नई उम्मीद
दरभंगा से कनाडा भेजी गई यह पहली 7 टन की खेप सिर्फ एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। यदि इसी तरह निर्यात का दायरा बढ़ता रहा तो आने वाले समय में मिथिला का मखाना बिहार की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




