NEET आंदोलन पर बढ़ा सियासी संकट, CJP ने सरकार को दिया खुली बातचीत का प्रस्ताव; जंतर-मंतर पर झड़प
NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर पर हिंसा, 2 ACP समेत 4 पुलिसकर्मी घायल। सरकार ने CJP से बातचीत की पेशकश की, लेकिन संगठन ने जंतर-मंतर या न्यूट्रल स्थान पर वार्ता की शर्त रखी। देशभर में प्रदर्शन का ऐलान।
HighLights:
- NEET पेपर लीक विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार जारी
- हिंसक झड़प में 2 ACP समेत 4 पुलिसकर्मी घायल
- CJP ने कहा- बातचीत जंतर-मंतर या न्यूट्रल स्थान पर ही होगी
- 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। बुधवार को प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस पर पथराव के बाद गुरुवार को भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए भारी पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं।
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सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से किसी भी समय बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में चार बार CJP को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन संगठन ने इसे स्वीकार नहीं किया।
CJP की दो टूक- सरकार को जंतर-मंतर आना होगा
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि अब बातचीत केवल जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर ही होगी। उनका कहना है कि किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में जाकर बातचीत करने से आंदोलन की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे। संगठन खुद को छात्र आंदोलन बता रहा है और किसी भी राजनीतिक छवि से बचना चाहता है। संगठन ने 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का भी आह्वान किया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि NEET पेपर लीक मामले में जिम्मेदारी तय हो और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
हिंसक हुआ प्रदर्शन, पुलिस पर पथराव
बुधवार को दोपहर और शाम के दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार धक्का-मुक्की हुई। हालात उस समय बिगड़ गए जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान पंजाबी बाग के ACP जयप्रकाश घायल हो गए। रात करीब 8:30 बजे एनडीएमसी चौराहे और टालस्टॉय मार्ग के पास फिर से पथराव हुआ, जिसमें ACP विवेक भगत समेत कुल चार पुलिसकर्मी घायल हुए। घायलों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। करीब दस मिनट के भीतर हालात पर काबू पा लिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की चेतावनी
दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों और शिक्षकों से आंदोलन से दूर रहने की अपील की है। विश्वविद्यालय ने चेतावनी दी है कि यदि कोई छात्र या शिक्षक कानून-व्यवस्था भंग करने वाली गतिविधियों में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है, जिसका असर उसके करियर पर भी पड़ सकता है।
सोनम वांगचुक का अनशन जारी
आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन 26वें दिन भी जारी है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का भरोसा देती है तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
CRPF की अतिरिक्त कंपनियां तैनात
गृह मंत्रालय ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल से CRPF की 20 अतिरिक्त कंपनियां बुला ली हैं। संसद मार्ग, जनपथ, टालस्टॉय मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए आसपास के कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार भी बंद किए गए थे।
केजरीवाल ने सरकार को दी नसीहत
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सरकार से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई हालात को और बिगाड़ सकती है। उन्होंने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की सलाह दी।
देशभर से पहुंच रहे प्रदर्शनकारी
जंतर-मंतर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, कर्नाटक समेत कई राज्यों से छात्र और सामाजिक संगठनों के सदस्य पहुंच रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर स्वयंसेवकों द्वारा भोजन, पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।
सरकार क्यों बदली रणनीति?
करीब एक महीने से जारी आंदोलन ने अब राष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। संसद मार्च के दौरान हुई झड़प, विपक्षी दलों का समर्थन, सोनम वांगचुक के अनशन और लगातार बढ़ते जनसमर्थन के बाद सरकार ने सख्ती की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं। हालांकि बातचीत की जगह को लेकर अभी भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है।
फिलहाल जंतर-मंतर पर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। सरकार और आंदोलनकारी संगठन दोनों बातचीत की बात तो कर रहे हैं, लेकिन वार्ता कब और कहां होगी, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
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