BCCL में संडे ड्यूटी पर कैंची! 100 करोड़ बचाने की तैयारी, श्रमिकों की कमाई पर पड़ेगा असर

BCCL में संडे ड्यूटी में कटौती की तैयारी, 80-100 करोड़ रुपये बचाने की कवायद। ड्यूटी बुकिंग और वास्तविक कार्यस्थल में अंतर की शिकायतों की समीक्षा से श्रमिकों की अतिरिक्त आय पर असर पड़ने की संभावना।

BCCL में संडे ड्यूटी पर कैंची! 100 करोड़ बचाने की तैयारी, श्रमिकों की कमाई पर पड़ेगा असर
BCCL संडे ड्यूटी में कटौती कर करीब 80-100 करोड़ रुपये बचाने की तैयारी में।

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        HighLights:

  • BCCL की आंतरिक समीक्षा में कर्मचारियों की उपयोगिता और रविवार की ड्यूटी की जरूरत पर उठे सवाल
  • संडे ड्यूटी की बुकिंग और वास्तविक कार्यस्थल में अंतर की शिकायतों की जांच की कवायद
  • CV एरिया, कुसुंडा, लोदना और बस्ताकोला समेत कुछ क्षेत्रों की व्यवस्था समीक्षा के दायरे में
  • संडे ड्यूटी में कटौती का सीधा असर श्रमिकों की अतिरिक्त आय पर पड़ सकता है

धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में खर्चों को नियंत्रित करने की कवायद के तहत अब संडे ड्यूटी भी प्रबंधन के रडार पर है। कंपनी की आंतरिक समीक्षा के आधार पर रविवार को कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की मौजूदा व्यवस्था में कटौती की तैयारी चल रही है। इससे कंपनी को करीब 80 से 100 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

प्रबंधन का फोकस अब इस बात पर है कि रविवार को केवल उन्हीं विभागों और कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए, जहां उत्पादन, सुरक्षा, मशीनरी संचालन या अन्य जरूरी कार्यों के लिए वास्तव में मानव संसाधन की आवश्यकता हो। यानी जहां काम की वास्तविक जरूरत नहीं है, वहां संडे ड्यूटी पर खर्च को कम करने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, इस पूरी कवायद का दूसरा पहलू श्रमिकों से जुड़ा है। संडे ड्यूटी से मिलने वाली अतिरिक्त आय में कमी आने पर कर्मचारियों की कमाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में प्रबंधन के फैसले को लेकर श्रमिक संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

80-100 करोड़ रुपये बचाने की तैयारी

BCCL की आंतरिक रिपोर्ट में रविवार की ड्यूटी व्यवस्था और कर्मचारियों की वास्तविक उपयोगिता की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि यदि संडे ड्यूटी को आवश्यकता के अनुरूप सीमित किया जाता है, तो कंपनी के खर्च में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इसी आधार पर करीब 80 से 100 करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य सामने रखा गया है। कंपनी के लिए यह कदम लागत नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रबंधन की कोशिश है कि ड्यूटी की बुकिंग केवल आवश्यकता के आधार पर हो और रविवार को जिन कर्मचारियों को लगाया जाए, उनकी वास्तविक कार्यस्थल पर मौजूदगी और कार्य भी रिकॉर्ड में स्पष्ट हो।

बुकिंग कहीं और, काम कहीं और होने की शिकायत

संडे ड्यूटी की व्यवस्था को लेकर कुछ कोयला क्षेत्रों से गंभीर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। विशेष रूप से CV एरिया सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में ड्यूटी की बुकिंग और कर्मचारी के वास्तविक कार्यस्थल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतों में आरोप है कि कुछ मामलों में कर्मचारी या श्रमिक संगठन से जुड़े पदाधिकारी जिस स्थान पर वास्तव में काम करते हैं, उनकी संडे ड्यूटी की बुकिंग किसी दूसरे स्थान के लिए की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि प्रबंधन शिकायतों की निष्पक्ष और गोपनीय जांच कराता है तो ड्यूटी बुकिंग, उपस्थिति रजिस्टर और वास्तविक कार्यस्थल के रिकॉर्ड का मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

कई कोलियरियों की व्यवस्था भी जांच के दायरे में

संडे ड्यूटी को लेकर CV एरिया, कुसुंडा, लोदना और बस्ताकोला समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में भी व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की चर्चा है।सवाल यह है कि रविवार को जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है, क्या वास्तव में उतने ही कर्मचारियों की जरूरत होती है? क्या बुक की गई ड्यूटी के मुताबिक कर्मचारी कार्यस्थल पर मौजूद रहते हैं? और क्या रविवार की ड्यूटी के दौरान सौंपा गया काम वास्तव में पूरा किया जाता है? इन सवालों का जवाब ड्यूटी चार्ट, उपस्थिति रिकॉर्ड, मस्टर रोल, कार्यस्थल के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के मिलान से मिल सकता है।

लिपिकों की संडे ड्यूटी पर भी नजर

संडे ड्यूटी की समीक्षा केवल खदानों में काम करने वाले कर्मचारियों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। लिपिकीय और कार्यालयी कामकाज में लगाई जाने वाली रविवार की ड्यूटी भी जांच के दायरे में आ सकती है। कुछ स्थानों पर रविवार को छुट्टी की बुकिंग, कार्यालयी रिकॉर्ड या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए लिपिकों की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रबंधन यह देख सकता है कि संबंधित कार्य के लिए रविवार को वास्तव में कर्मचारी की मौजूदगी जरूरी थी या वही काम सामान्य कार्यदिवस में किया जा सकता था। यदि किसी कार्यालयी कार्य के लिए संडे ड्यूटी जरूरी नहीं है तो ऐसी ड्यूटी को कम करने से भी कंपनी के खर्च में बचत हो सकती है।

श्रमिकों की अतिरिक्त आय पर पड़ेगा असर

संडे ड्यूटी में कटौती का सबसे सीधा असर कर्मचारियों की अतिरिक्त कमाई पर पड़ सकता है। रविवार को ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली अतिरिक्त आय उनके मासिक वेतन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। ऐसे में प्रबंधन का तर्क लागत कम करने और ड्यूटी को जरूरत आधारित बनाने का हो सकता है, जबकि श्रमिक संगठन यह सवाल उठा सकते हैं कि ड्यूटी कटौती से पहले वास्तविक काम की जरूरत और कर्मचारियों की आय पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कैसे किया गया। यही वजह है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

यूनियनों की भूमिका भी अहम

संडे ड्यूटी की समीक्षा में श्रमिक संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। यदि कहीं ड्यूटी की बुकिंग और वास्तविक उपस्थिति में अंतर की शिकायत है तो यूनियनों को भी वास्तविक स्थिति सामने लाने में सहयोग करना होगा। दूसरी ओर, यदि किसी क्षेत्र में रविवार को वास्तव में उत्पादन, मशीनरी, सुरक्षा या अन्य जरूरी काम के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत है, तो वहां केवल खर्च बचाने के नाम पर ड्यूटी कम करने से कामकाज प्रभावित होने की आशंका भी रहेगी। इसलिए ड्यूटी में कटौती और वास्तविक काम की जरूरत के बीच संतुलन बनाना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर

संडे ड्यूटी को लेकर उठ रहे सवालों का सबसे ठोस जवाब रिकॉर्ड की जांच से मिल सकता है। ड्यूटी बुकिंग, उपस्थिति, संबंधित कर्मचारी के कार्यस्थल, किए गए काम और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। यदि किसी कर्मचारी की ड्यूटी एक स्थान पर बुक है लेकिन उपस्थिति या काम दूसरे स्थान पर पाया जाता है, तो इसकी वजह भी रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट की जा सकती है।

आगे क्या?

BCCL में संडे ड्यूटी को लेकर चल रही समीक्षा अब केवल खर्च कम करने का मामला नहीं रह गई है। एक तरफ कंपनी 80-100 करोड़ रुपये तक की संभावित बचत पर नजर रख रही है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों की अतिरिक्त आय और कार्यस्थलों पर मानव संसाधन की उपलब्धता का सवाल भी जुड़ा हुआ है। यदि प्रबंधन संडे ड्यूटी को वास्तविक जरूरत के आधार पर व्यवस्थित करता है और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराता है, तो अनावश्यक खर्च पर रोक लग सकती है। लेकिन यह भी जरूरी होगा कि आवश्यक उत्पादन और सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता बनी रहे।

फिलहाल, संडे ड्यूटी की बुकिंग और वास्तविक कार्यस्थल के बीच कथित अंतर की शिकायतों की समीक्षा इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा बन गई है। आने वाले दिनों में BCCL प्रबंधन की ओर से ड्यूटी व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं और इसका श्रमिकों पर कितना असर पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।