JPSC घोटाले में CID का बड़ा धमाका, 5 जिलों के 18 ठिकानों पर रेड, OMR शीट से लेकर लैपटॉप तक जब्त
झारखंड के चर्चित JPSC परीक्षा घोटाला मामले में CID ने रांची, धनबाद, बोकारो, पलामू और हजारीबाग समेत 18 ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की। जांच में OMR शीट, लैपटॉप, मोबाइल और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से पूछताछ जारी है जबकि विपक्ष ने CBI जांच की मांग उठाई है।
HighLights:
- JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID ने 5 जिलों के 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की
- कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के नेटवर्क पर कार्रवाई
- लैपटॉप, मोबाइल, OMR शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट और बैंक दस्तावेज बरामद
- JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से आठ घंटे तक पूछताछ, तीन आरोपी रिमांड पर
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में बहुचर्चित JPSC परीक्षा अनियमितता मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने सोमवार को राज्य के रांची, धनबाद, बोकारो, पलामू और हजारीबाग समेत कुल 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर परीक्षा घोटाले से जुड़े बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया। कार्रवाई के दौरान कोचिंग संचालकों, बिचौलियों, कथित मास्टरमाइंड और परीक्षा से जुड़े संदिग्ध लोगों के ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
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CID अधिकारियों के अनुसार बरामद सामग्री में लैपटॉप, मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक, OMR शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट और अन्य गोपनीय दस्तावेज शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों का फोरेंसिक और तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा ताकि परीक्षा में कथित धांधली की पूरी साजिश का खुलासा किया जा सके।
तीन आरोपी रिमांड पर, मास्टरमाइंड से गहन पूछताछ
CID ने परीक्षा संचालन एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी और प्रोग्रामर उस्मान को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की कई अहम कड़ियां इन्हीं आरोपियों से जुड़ी हो सकती हैं।
पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से 8 घंटे पूछताछ
CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से लगातार लगभग आठ घंटे तक पूछताछ की। यह चौथी बार है जब उनसे इस मामले में सवाल-जवाब किए गए। फिलहाल उन्हें जाने दिया गया है, लेकिन जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यदि रिमांड पर लिए गए आरोपियों से नए तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
अभय तिवारी की भूमिका पर बढ़ा संदेह
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने राज्य और केंद्र सरकार की कई प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। इनमें 2018 की सब-इंस्पेक्टर परीक्षा, CRPF हेड कांस्टेबल, नेवी SSR, BARC, JSSC CGL, PGT, ACF, FRO, FSO और 11वीं-13वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा समेत कई परीक्षाएं शामिल हैं। CID अब इन सभी परीक्षाओं में उसकी उम्मीदवारी, आवेदन, मूल्यांकन प्रक्रिया और चयन से जुड़े दस्तावेज संबंधित परीक्षा एजेंसियों से मंगाकर सत्यापन कर रही है।
OMR शीट गायब होने से बढ़ा शक
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी, जिसने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा पास की थी, अपनी OMR शीट उपलब्ध नहीं करा सका। उसने OMR शीट के गायब होने की बात कही, जिसे CID ने संदिग्ध मानते हुए इसकी अलग से जांच शुरू कर दी है।
धनबाद समेत कई जिलों में हुई कार्रवाई
CID की कार्रवाई के दौरान धनबाद के सरायढेला स्थित एक कोचिंग संचालक के फ्लैट से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। बोकारो में बंद मकान का ताला तोड़कर मजिस्ट्रेट और गवाहों की मौजूदगी में तलाशी ली गई। पलामू, रांची और हजारीबाग में भी कई संदिग्ध अभ्यर्थियों और कोचिंग संचालकों के घरों पर जांच की गई।
शिकायतकर्ताओं के बयान भी दर्ज
जिन अभ्यर्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परीक्षा में धांधली की शिकायत की थी, उनके बयान भी CID ने दर्ज किए। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि OMR शीट में कथित हेरफेर कर योग्य उम्मीदवारों को असफल और अयोग्य अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।
बाबूलाल मरांडी ने उठाई CBI जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर नौकरियां बेची गईं और पूरे मामले की CBI जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आयोग के जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की भी मांग की है।
जांच से खुल सकते हैं कई बड़े राज
CID की अब तक की कार्रवाई से संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी राज्य और केंद्र स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की भी पड़ताल कर रही है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो झारखंड की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अब तक के सबसे बड़े घोटालों में यह मामला शामिल हो सकता है। आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




