लोकसभा से पास हुआ बड़ा बिल, सुप्रीम कोर्ट में अब होंगे 38 जज; लंबित मामलों के निपटारे पर सरकार का बड़ा दांव

लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। अब CJI सहित सुप्रीम कोर्ट में 38 जज होंगे। जानिए लंबित मामलों, खाली पदों और सरकार के बड़े फैसले की पूरी जानकारी।

लोकसभा से पास हुआ बड़ा बिल, सुप्रीम कोर्ट में अब होंगे 38 जज; लंबित मामलों के निपटारे पर सरकार का बड़ा दांव
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज, लोकसभा ने पास किया संशोधन बिल।

Advertisement

    HighLights:

  • लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया
  • CJI सहित सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 38 होगी
  • सरकार का दावा- लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मिलेगी मदद
  • सुप्रीम कोर्ट में 10 हजार से अधिक मामले 10 साल से लंबित

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोकसभा ने सोमवार को 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026' ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के लागू होने के बाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश (CJI) सहित कुल 38 जज होंगे। वर्तमान व्यवस्था में CJI को छोड़कर 33 जजों का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर 37 कर दिया गया है।

यह भी पढ़ें: JPSC घोटाले में CID का बड़ा धमाका, 5 जिलों के 18 ठिकानों पर रेड, OMR शीट से लेकर लैपटॉप तक जब्त

सरकार का कहना है कि जजों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाना है।

हंगामे के बीच पारित हुआ महत्वपूर्ण विधेयक

लोकसभा की कार्यवाही राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के कारण लगातार बाधित रही। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने नारेबाजी की, जिसके चलते सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा। बावजूद इसके सरकार ने तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाया और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा संशोधन विधेयक पारित करा लिया।

सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज, क्या होगा फायदा?

संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सहित कुल 38 न्यायाधीश कार्यरत हो सकेंगे। सरकार का मानना है कि बढ़ती आबादी, मुकदमों की संख्या और न्यायिक कार्यभार को देखते हुए यह कदम बेहद आवश्यक था। इससे संविधान पीठों के गठन, नियमित सुनवाई और लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है।

9,800 करोड़ खर्च, फिर भी हजारों मामले वर्षों से लंबित

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2011 से अब तक न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे और तकनीकी आधुनिकीकरण पर 9,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद लंबित मामलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार—

सुप्रीम कोर्ट में 10,000 से अधिक मामले 10 वर्षों से लंबित हैं।
इनमें 558 मामले 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं।
26 मामले 30 वर्ष से भी अधिक समय से लंबित हैं।
देश के 25 हाई कोर्टों में 80,000 से अधिक मामले तीन दशक से ज्यादा पुराने हैं।

कानून मंत्री ने क्या कहा?

संसद में लिखित उत्तर देते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि मामलों के समय पर निपटारे की कोई निश्चित समय-सीमा न्यायपालिका द्वारा तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि न्याय वितरण कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें पर्याप्त संख्या में जज, न्यायिक अधिकारी, स्टाफ, कोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, मामलों की जटिलता, गवाहों का सहयोग, जांच एजेंसियों की भूमिका और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन शामिल है।

जजों के हजारों पद अब भी खाली

सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि निचली अदालतों और हाई कोर्टों में अभी भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है—

हाई कोर्टों में स्वीकृत 1,122 पदों में से 341 पद खाली हैं।
निचली अदालतों में 30,868 स्वीकृत पदों में से 7,311 पद रिक्त हैं।

कानून मंत्री ने कहा कि हाई कोर्ट कॉलेजियम द्वारा समय पर नियुक्तियों की सिफारिश नहीं किए जाने के कारण कई पद लंबे समय से खाली हैं।

लंबित मामलों के लिए सरकार की रणनीति

सरकार ने बताया कि पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सभी 25 हाई कोर्ट और जिला अदालतों में एरियर कमेटियां गठित की गई हैं। इसके अलावा न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से नए आपराधिक कानून 2023, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) अधिनियम 2018, कमर्शियल कोर्ट्स (संशोधन) अधिनियम 2018 तथा स्पेसिफिक रिलीफ (संशोधन) अधिनियम 2018 जैसे कानून भी लागू किए गए हैं।

क्या न्याय मिलने की रफ्तार बढ़ेगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन लंबित मामलों की वास्तविक संख्या कम करने के लिए हाई कोर्टों और निचली अदालतों में खाली पदों को शीघ्र भरना, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग और न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार भी उतना ही आवश्यक होगा। तभी आम नागरिकों को समय पर न्याय मिलने का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।