धनबाद: समाजसेवी परशुराम सिंह का वैदिक रीति से ऐतिहासिक वृषोत्सर्ग श्राद्ध संपन्न, 40 आचार्यों ने कराया अनुष्ठान

धनबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता, समाजसेवी और व्यवसायी स्व. परशुराम सिंह का कुसुम विहार में वैदिक रीति से ऐतिहासिक वृषोत्सर्ग श्राद्ध सम्पन्न हुआ। आचार्य गंगाधर पाठक के नेतृत्व में 40 पंडितों ने अनुष्ठान कराया। गौदान, वृषोत्सर्ग और भजन संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

धनबाद: समाजसेवी परशुराम सिंह का वैदिक रीति से ऐतिहासिक वृषोत्सर्ग श्राद्ध संपन्न, 40 आचार्यों ने कराया अनुष्ठान
बम्मी सिंह के पिता परशुराम सिंह का ऐतिहासिक श्राद्ध।

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     HighLights:

  • आचार्य पंडित गंगाधर पाठक के नेतृत्व में 40 वैदिक पंडितों ने संपन्न कराया अनुष्ठान
  • गौदान, चार बाछियों का दान एवं वैदिक रीति-रिवाजों से हुआ श्राद्ध कर्म
  • शाम को आयोजित हुई भजन संध्या, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
  • प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं फिल्म निर्माता राजेश सिंह (बम्मी सिंह) ने निभाई सभी धार्मिक परंपराएं।

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  कोयलांचल के प्रतिष्ठित समाजसेवी, वरिष्ठ अधिवक्ता, सफल व्यवसायी एवं शहर के सम्मानित अभिभावक माने जाने वाले स्वर्गीय परशुराम सिंह का वृषोत्सर्ग श्राद्ध सोमवार को धनबाद के कुसुम विहार स्थित उनके आवास पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग, व्यवसायी, अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति और शुभचिंतक शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।

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श्राद्ध कर्म का संचालन अयोध्या राम मंदिर भूमि पूजन (5 अगस्त 2020) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य पूजा अनुष्ठान का संचालन करने वाले प्रसिद्ध वैदिक आचार्य पंडित गंगाधर पाठक के नेतृत्व में किया गया। उनके साथ लगभग 40 विद्वान वैदिक पंडितों ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान सम्पन्न कराया।

वैदिक परंपरा के अनुसार हुआ वृषोत्सर्ग श्राद्ध

श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान वृषोत्सर्ग, गौदान, चार बाछियों का दान, पिंडदान और अन्य वैदिक संस्कार सम्पन्न कराए गए। धार्मिक जानकारों के अनुसार इस प्रकार का विस्तृत वैदिक श्राद्ध और दान अनुष्ठान कोयलांचल क्षेत्र में विरले ही देखने को मिलता है। पूरे आयोजन के दौरान आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालु वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते रहे।शाम के समय भजन संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और दिवंगत परशुराम सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

समाज के हर वर्ग में थी विशेष पहचान

स्वर्गीय परशुराम सिंह केवल एक सफल अधिवक्ता या व्यवसायी ही नहीं थे, बल्कि वे समाज सेवा, शिक्षा, जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक समरसता के लिए भी जाने जाते थे। उनकी सादगी, सहज व्यवहार और लोगों के प्रति आत्मीयता ने उन्हें धनबाद के सबसे सम्मानित नागरिकों में शामिल किया।कोयलांचल के लोग उन्हें शहर के अभिभावक स्वरूप मानते थे। उन्होंने लंबे समय तक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई और अनेक सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहे।

कोयला कारोबार और व्यवसाय जगत में स्थापित पहचान

परशुराम सिंह को कोयलांचल के महानायक दिवंगत बी.पी. सिन्हा के करीबी सहयोगियों में गिना जाता था। उन्होंने झरिया कोलफील्ड क्षेत्र में एक सफल और प्रतिष्ठित कोयला व्यवसायी के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। बिहार के बेगूसराय स्थित चर्चित 'सावित्री टॉकीज' भी उनके स्वामित्व में रहा। व्यवसाय, सामाजिक सेवा और जनसंपर्क के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

पुत्र राजेश सिंह (बम्मी सिंह) निभा रहे पारिवारिक विरासत

स्वर्गीय परशुराम सिंह के पुत्र राजेश सिंह उर्फ बम्मी सिंह धनबाद के प्रमुख बिल्डरों में शामिल हैं। वे फिल्म निर्माता के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। अपने पिता की अंतिम इच्छा और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए उन्होंने पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सभी संस्कार सम्पन्न कराए।

87 वर्ष की आयु में हुआ था निधन

धनबाद के कुसुम विहार निवासी परशुराम सिंह का 24 जुलाई को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया गया, जहां पुत्र राजेश सिंह ने मुखाग्नि दी थी। वे अपने पीछे पत्नी, पुत्र, दो पौत्र, एक प्रपौत्र, पुत्रवधू सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से धनबाद के सामाजिक, विधिक और व्यावसायिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी।स्वर्गीय परशुराम सिंह का व्यक्तित्व सेवा, सादगी, सामाजिक समर्पण और मानवीय मूल्यों का प्रतीक था। उनके वृषोत्सर्ग श्राद्ध में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण रही कि उन्होंने अपने जीवन में समाज के हर वर्ग का विश्वास और सम्मान अर्जित किया था।