3 साल पुराने महिला पहलवान यौन उत्पीड़न केस में बृजभूषण शरण सिंह बरी, विनेश फोगाट हाईकोर्ट जाएंगी
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व सांसद एवं पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। फैसले के बाद बृजभूषण ने इसे न्याय की जीत बताया, जबकि विनेश फोगाट ने हाईकोर्ट जाने की बात कही।
HighLights:
- दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी किया।
- महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में 127 सुनवाई के बाद आया फैसला।
- बृजभूषण बोले- "अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी किया, यह मेरे और समर्थकों के लिए खुशी का दिन है।"
- विनेश फोगाट ने फैसले पर निराशा जताते हुए हाईकोर्ट में अपील की घोषणा की।
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): करीब तीन साल तक देशभर में चर्चा का विषय रहे महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में सोमवार को बड़ा फैसला सामने आया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा सह-आरोपी पूर्व सचिव विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त घोषित किया।
यह फैसला दो जुलाई 2026 को बहस पूरी होने के बाद सुरक्षित रख लिया गया था। जनवरी 2023 में सामने आए इस बहुचर्चित मामले में करीब 1,133 दिनों के दौरान 127 बार सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।
बृजभूषण बोले- पहले दिन ही कहा था, दोषी हुआ तो फांसी पर चढ़ जाऊंगा
फैसले के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर शुरू से भरोसा था। उन्होंने कहा, "जब मेरे ऊपर आरोप लगाए गए थे, तभी मैंने कहा था कि अगर मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित होता है तो मैं स्वयं फांसी पर लटक जाऊंगा। आज अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी किया है। यह मेरे और मेरे समर्थकों के लिए बेहद प्रसन्नता का विषय है।" उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई दोहराते हुए कहा, "होइहि सोइ जो राम रचि राखा।"
महिला पहलवानों पर कुछ नहीं बोले, कहा- जो हुआ सो हुआ
जब पत्रकारों ने उनसे आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों और कथित साजिश को लेकर सवाल किया तो उन्होंने विवाद को आगे न बढ़ाते हुए केवल इतना कहा, "जो हुआ सो हुआ, अब इस विवाद को यहीं समाप्त कर दीजिए।" हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाया गया और यह आंदोलन खिलाड़ियों का कम तथा विपक्षी दलों का अधिक बन गया था।
'कमजोर खिलाड़ियों के हक की लड़ाई लड़ रहा था'
बृजभूषण ने कहा कि उन्होंने हमेशा जूनियर खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा की। उनके अनुसार कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को नए नियम पसंद नहीं आए, जिसके कारण उनके खिलाफ यह पूरा विवाद खड़ा हुआ। उन्होंने कहा, "अगर कमजोर के हक की लड़ाई लड़ना बगावत है, तो मैं बागी हूं।"
विनेश फोगाट ने कहा- लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई
फैसले के तुरंत बाद ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अदालत के फैसले पर निराशा जताई।उन्होंने लिखा कि महिला पहलवानों ने एक प्रभावशाली नेता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भारी संघर्ष किया था और कई खिलाड़ियों पर दबाव बनाकर शिकायतें वापस कराई गईं। विनेश ने कहा, "हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है। हमारे वकीलों को हाईकोर्ट में अपील करने के निर्देश दे दिए गए हैं। महिला पहलवान अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।"
बजरंग पुनिया ने फैसले पर उठाए सवाल
पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा कि अभी उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि अदालत ने किन आधारों पर बृजभूषण को बरी किया है। उन्होंने कहा, "विस्तृत आदेश आने के बाद ही आगे की कानूनी रणनीति तय करेंगे।"
क्या था पूरा मामला?
जनवरी 2023 में देश की छह महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, पीछा करने और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन चला, जिसमें ओलंपिक पदक विजेता विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक समेत कई नामी पहलवान शामिल हुए।
एफआईआर दर्ज नहीं होने पर पहलवान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जिसके हस्तक्षेप के बाद अप्रैल 2023 में दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया।
दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में चार्जशीट दाखिल की और भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354A, 354D और 506 के तहत आरोप लगाए। मई 2024 में अदालत ने आरोप तय किए और नियमित सुनवाई शुरू हुई।
पॉक्सो मामला पहले ही बंद हो चुका था
एक नाबालिग पहलवान ने भी बृजभूषण पर आरोप लगाए थे, जिसके आधार पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। बाद में शिकायत वापस लेने और दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने वह मामला बंद कर दिया था।
कुश्ती संघ की कुर्सी भी गंवानी पड़ी
विवाद के बाद खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ के कामकाज पर रोक लगा दी थी। भारतीय ओलंपिक संघ ने तदर्थ समिति बनाकर संघ का संचालन संभाला और बाद में नए चुनाव कराए गए। दिसंबर 2023 में बृजभूषण शरण सिंह ने सार्वजनिक रूप से कुश्ती प्रशासन से खुद को अलग करने की घोषणा भी कर दी थी।
राजनीतिक सफर भी रहा लंबा
बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश की गोंडा और कैसरगंज लोकसभा सीट से छह बार सांसद रह चुके हैं। वे पांच बार भारतीय जनता पार्टी और एक बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचे। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन शुरू करने वाले बृजभूषण राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय रहे और लंबे समय तक भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे।
अब आगे क्या?
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के बाद कानूनी लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। शिकायतकर्ता महिला पहलवानों की ओर से हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में इस बहुचर्चित मामले का अगला अध्याय अब उच्च न्यायालय में खुल सकता है। हालांकि फिलहाल ट्रायल कोर्ट के इस फैसले से बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बड़ी कानूनी राहत मिली है, जबकि महिला पहलवानों ने न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया है।




