जयराम महतो-बरवाअड्डा थाना प्रभारी विवाद: फर्जी प्रमाणपत्र से वायरल ऑडियो तक, जानिए पूरा मामला

Jairam Mahto Barwadda Police Controversy: बड़ापिछरी पंचायत के कथित फर्जी प्रमाणपत्र मामले से शुरू हुआ जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी विवाद अब वायरल ऑडियो और पुलिस आंदोलन की चेतावनी तक पहुंच गया है। जानिए पूरे मामले की शुरुआत से अब तक की पूरी टाइमलाइन।

जयराम महतो-बरवाअड्डा थाना प्रभारी विवाद: फर्जी प्रमाणपत्र से वायरल ऑडियो तक, जानिए पूरा मामला
जयराम महतो-बरवाअड्डा थाना प्रभारी विवाद।

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Highlights:

बड़ापिछरी पंचायत में कथित फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के आरोप से विवाद की शुरुआत
जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लिए जाने के बाद बरवाअड्डा थाना पहुंचे थे विधायक जयराम महतो
थाना परिसर में हंगामा, मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप
22 अगस्त की कथित फोन बातचीत का ऑडियो वायरल होने से विवाद और गहराया

धनबाद(Threesocieties.com Desk): झारखंड के धनबाद में डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रमुख जयराम महतो तथा बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बड़ापिछरी पंचायत में कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने के आरोप से शुरू हुआ मामला अब प्राथमिकी, थाना परिसर में हंगामा, मारपीट के आरोप, कथित धमकी वाले वायरल ऑडियो और पुलिस संगठनों की आंदोलन की चेतावनी तक पहुंच गया है।

मामले में विधायक पक्ष और पुलिस की ओर से अलग-अलग आरोप सामने आए हैं। वहीं, वायरल ऑडियो की सत्यता और थाना परिसर में उस दिन वास्तव में क्या हुआ, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जयराम महतो ने वायरल ऑडियो में छेड़छाड़ और AI के इस्तेमाल का दावा किया है, जबकि पुलिस पक्ष ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की है। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद की शुरुआत कहां से हुई और अब तक क्या-क्या हुआ।

बड़ापिछरी पंचायत से शुरू हुआ विवाद

पूरे विवाद की शुरुआती कड़ी बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी की शिकायत से जुड़ी है। आरोप है कि उनके फर्जी पैड, मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर जाति, आवास और वंशावली से संबंधित प्रमाणपत्र तैयार किए जा रहे थे। शिकायत मिलने के बाद बरवाअड्डा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसी क्रम में जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की बात सामने आई। गणेश दास को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुंचे। यहीं से मामला और अधिक तूल पकड़ने लगा।

थाने पहुंचने के बाद बढ़ा तनाव

विधायक के थाना पहुंचने के बाद पुलिस और उनके समर्थकों के बीच कहासुनी और तनाव की स्थिति उत्पन्न होने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि थाना परिसर में भीड़ ने हंगामा किया और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाई। इसके बाद पुलिस की ओर से जयराम महतो समेत 10 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि, विधायक पक्ष ने पुलिस के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। विधायक पक्ष की ओर से भी पुलिस के खिलाफ शिकायत दी गई और थाना परिसर में उनके साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट का आरोप लगाया गया।

विधायक पक्ष ने लगाया मारपीट और गला दबाने का आरोप

विधायक पक्ष का आरोप है कि थाना परिसर में जयराम महतो के साथ मारपीट की गई और उनका गला दबाने का प्रयास किया गया। वहीं, विधायक के समर्थक सुशील मंडल की ओर से भी मारपीट का आरोप लगाया गया। शिकायत में सोने की चेन और नकदी छीनने का आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, मुखिया यशोदा देवी के बेटे प्रदीप कुमार रजक ने भी विधायक के खिलाफ शिकायत दी। इसमें विधायक पर जातिसूचक टिप्पणी करने और गला दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया। इन सभी आरोपों की जांच पुलिस के स्तर से की जा रही है।

21/22 अगस्त की फोन बातचीत बनी नया विवाद

थाना विवाद के बाद मामला एक बार फिर तब गरमा गया जब बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार और जयराम महतो के बीच हुई कथित व्हाट्सऐप कॉल का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। थाना प्रभारी की शिकायत के अनुसार 22 अगस्त की रात करीब 8:09 बजे विधायक की ओर से फोन आया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान विधायक ने अपने समर्थक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी जताई। पुलिस की शिकायत में विधायक पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने तथा वर्दी उतरवाने और सरकार बदलने के बाद देख लेने जैसी धमकी देने का आरोप लगाया गया। कथित बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद विवाद सीधे विधायक और पुलिस के बीच टकराव के रूप में सामने आने लगा।

जयराम महतो बोले-ऑडियो एडिटेड, AI से छेड़छाड़ का दावा

वायरल ऑडियो को लेकर जयराम महतो ने अपना पक्ष रखते हुए इसे पूरी बातचीत का हिस्सा नहीं बताया। विधायक के अनुसार, थाना प्रभारी और उनके बीच करीब 11 मिनट तक बातचीत हुई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर केवल चुनिंदा अंश वायरल किए गए।जयराम महतो ने आरोप लगाया कि ऑडियो में एडिटिंग की गई है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए आवाज अथवा बातचीत के अंशों से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में अब तक कोई सार्वजनिक तकनीकी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। विधायक ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और घटना के समय मौजूद पत्रकारों के वीडियो फुटेज की जांच कराने की मांग भी उठाई है।

पुलिस संगठनों ने खोला मोर्चा

वायरल ऑडियो सामने आने के बाद विवाद केवल विधायक और थाना प्रभारी के बीच नहीं रहा। झारखंड पुलिस एसोसिएशन और पुलिस मेंस एसोसिएशन भी मामले में सामने आए। पुलिस संगठनों ने विधायक के कथित आचरण पर नाराजगी जताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। संगठनों की ओर से 24 घंटे के भीतर माफी नहीं मांगने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है। इससे मामला राजनीतिक विवाद के साथ-साथ पुलिस संगठनों के स्तर पर भी गंभीर हो गया है।

अब तक की पूरी टाइमलाइन

1. बड़ापिछरी पंचायत में शिकायत

मुखिया यशोदा देवी ने कथित रूप से उनके पैड, मुहर और हस्ताक्षर के दुरुपयोग कर फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की शिकायत की।

2. पुलिस ने शुरू की जांच

बरवाअड्डा थाना पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

3. विधायक समर्थकों के साथ थाने पहुंचे

गणेश दास की हिरासत की जानकारी के बाद जयराम महतो समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुंचे।

4. थाना परिसर में तनाव

पुलिस और विधायक समर्थकों के बीच कहासुनी और हंगामे की स्थिति बनी। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए।

5. विधायक समेत 10 नामजद और 50 अज्ञात पर केस

पुलिस ने सरकारी काम में बाधा और थाना परिसर में हंगामे के आरोप में विधायक समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

6. विधायक पक्ष ने भी शिकायत दी

विधायक पक्ष ने थाना परिसर में कथित मारपीट, दुर्व्यवहार और गला दबाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी।

7. मुखिया के बेटे की शिकायत

प्रदीप कुमार रजक ने विधायक पर जातिसूचक टिप्पणी और गला दबाने के प्रयास का आरोप लगाया।

8. कथित फोन कॉल का ऑडियो वायरल

21/22 अगस्त की रात हुई बताई जा रही जयराम महतो और थाना प्रभारी रवि कुमार की बातचीत का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

9. थाना प्रभारी की ओर से नई प्राथमिकी

थाना प्रभारी की शिकायत में विधायक पर अभद्र भाषा और धमकी देने के आरोप लगाए गए।

10. विधायक ने ऑडियो को एडिटेड बताया

जयराम महतो ने कहा कि पूरी बातचीत करीब 11 मिनट की थी और वायरल ऑडियो चुनिंदा हिस्सों को लेकर तैयार किया गया है। उन्होंने AI से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई।

11. पुलिस एसोसिएशन की चेतावनी

झारखंड पुलिस एसोसिएशन और पुलिस मेंस एसोसिएशन ने सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम और आंदोलन की चेतावनी दी।

विवाद में अब सबसे अहम सवाल क्या हैं?

अब पूरे मामले में कई सवालों के जवाब जांच से मिलने बाकी हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वायरल ऑडियो वास्तविक रूप में कितना सही है और क्या उसमें एडिटिंग या किसी तकनीकी माध्यम से बदलाव किया गया है। इसके अलावा थाना परिसर में विधायक और पुलिसकर्मियों के बीच वास्तव में क्या हुआ, इसका जवाब सीसीटीवी फुटेज और मौके पर बनाए गए वीडियो से मिल सकता है। फर्जी प्रमाणपत्र मामले की जांच भी इस पूरे विवाद की मूल कड़ी है। पुलिस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित फर्जी पैड, मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किसने और किस उद्देश्य से किया।

तीन स्तरों पर चल रही जांच से खुलेगा राज

फिलहाल मामले को मोटे तौर पर तीन स्तरों पर देखा जा रहा है। पहला, बड़ापिछरी पंचायत में कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने का मामला। दूसरा, बरवाअड्डा थाना परिसर में हुए विवाद और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए मारपीट के आरोप। तीसरा, थाना प्रभारी और विधायक के बीच कथित बातचीत का वायरल ऑडियो। इन तीनों मामलों में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

अब आगे क्या?

जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच बढ़ता विवाद अब केवल स्थानीय थाना विवाद नहीं रह गया है। इसमें विधायक की राजनीतिक भूमिका, पुलिस की कार्रवाई और पुलिस संगठनों के विरोध ने इसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बना दिया है। फिलहाल सबकी नजर पुलिस जांच, कथित वायरल ऑडियो की तकनीकी/फॉरेंसिक जांच, थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज और दोनों पक्षों की शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई पर है। यह भी महत्वपूर्ण है कि वायरल ऑडियो और दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी। ऐसे में फिलहाल सामने आए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

Threesocieties.com की नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है। जैसे-जैसे जांच में नए तथ्य सामने आएंगे, विवाद की तस्वीर और स्पष्ट होगी।