“PNB करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ के नकली नोट! 3 अफसर फरार, लुकआउट नोटिस जारी”
सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये से अधिक की नकली करेंसी मिलने के मामले में तीन फरार अफसरों पर शिकंजा कस गया है। लुकआउट नोटिस जारी, घरों पर छापे और 111 करोड़ की करेंसी की भी जांच।
HighLights:
- तीन फरार बैंक अधिकारियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
- नेपाल भागने की आशंका के चलते पुलिस ने तलाश तेज की
- छह जुलाई को भेजी गई 111 करोड़ रुपये की करेंसी भी जांच के केंद्र में
- फरार अधिकारियों के घरों से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज जब्त
लखनऊ (Threesocieties.com Desk): उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट से जुड़ा नकली नोटों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक मूल्य की नकली करेंसी मिलने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने फरार बैंक अधिकारियों की तलाश तेज कर दी है।
मामले में नामजद पीएनबी के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक रवि कुमार कांसे, सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सुशील कुमार और जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार की तलाश की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि तीनों नेपाल भाग सकते हैं। इसी वजह से तीनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।
111 करोड़ की करेंसी भी जांच के घेरे में
इस पूरे मामले में अब 111 करोड़ रुपये की करेंसी की खेप भी जांच का अहम हिस्सा बन गई है। पीएनबी के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे की शिकायत में छह जुलाई 2026 को 111 करोड़ रुपये की करेंसी भेजे जाने का उल्लेख है। एफआईआर में भी इसी रकम का जिक्र किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस खेप में 500 रुपये के 1,900 बंडल और 200 रुपये के 800 बंडल शामिल थे। कुल मिलाकर करीब 27 लाख नोट इस डिस्पैच का हिस्सा बताए जा रहे हैं। सहारनपुर से यह करेंसी भारतीय स्टेट बैंक के करेंसी चेस्ट के माध्यम से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जयपुर कार्यालय भेजी गई थी। जयपुर पहुंचने के बाद करेंसी में नकली नोट मिलने से पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई।
गिनती से डिस्पैच तक किसकी थी जिम्मेदारी?
जांच एजेंसियां अब छह जुलाई को हुई पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ रही हैं। इसमें करेंसी की गिनती, बंडल तैयार करने, पैकिंग, सीलिंग और डिस्पैच तक की प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका खंगाली जा रही है। जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि करेंसी की पैकिंग और भेजने जैसे संवेदनशील काम में पार्ट टाइम हाउसकीपर को क्यों लगाया गया था। एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि उसे यह जिम्मेदारी किस अधिकारी के आदेश पर दी गई और उसे वास्तव में कौन-कौन से काम सौंपे गए थे। करेंसी चेस्ट जैसी संवेदनशील जगह पर नकदी की गिनती और पैकिंग में कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारी अब जांच के केंद्र में है।
रिकॉर्ड और जयपुर पहुंची करेंसी का होगा मिलान
जांच एजेंसियां छह जुलाई के डिस्पैच से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। इनमें कैश रिकॉर्ड, बंडल की संख्या, पैकिंग और सीलिंग का विवरण, डिस्पैच रजिस्टर तथा उस दिन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों का रिकॉर्ड शामिल है। जयपुर में करेंसी प्राप्त होने के बाद दर्ज विवरण से भी इन रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। अगर सहारनपुर से भेजी गई खेप और जयपुर में प्राप्त करेंसी के रिकॉर्ड में अंतर मिलता है तो जांच और गंभीर दिशा में जा सकती है। हालांकि रिकॉर्ड सही पाए जाने की स्थिति में भी करेंसी चेस्ट में संवेदनशील काम के लिए निजी अथवा पार्ट टाइम कर्मचारी की भूमिका और उसे जिम्मेदारी सौंपने वाले अधिकारियों की जांच जारी रहेगी।
फरार अफसरों के घर छापेमारी, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अभिनंदन ने क्राइम ब्रांच को भी जांच में लगाया है। एसआईटी और क्राइम ब्रांच की टीमों ने तीनों नामजद आरोपित अधिकारियों के घरों पर छापेमारी कर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इन डिवाइस और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली करेंसी के मामले में अधिकारियों की भूमिका किस स्तर तक थी और उनके संपर्क किन लोगों से रहे।
निजी कर्मचारी आदेश भी लापता
जांच में आदेश नाम के एक निजी व्यक्ति का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, अमित कुमार जब सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के प्रबंधक थे, तब उन्होंने आदेश नाम के इस निजी व्यक्ति को अपने काम के लिए रखा हुआ था। अब आदेश भी लापता बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आदेश को करेंसी चेस्ट से संबंधित किस तरह के काम सौंपे गए थे और उसका बैंक अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों से किस प्रकार संपर्क था।
करीब एक साल की CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस
जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस करीब एक साल की CCTV फुटेज भी खंगाल रही है। फुटेज के जरिए करेंसी चेस्ट में आने-जाने वाले लोगों, संदिग्ध गतिविधियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के संपर्कों की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की जांच का दायरा अब जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज, CCTV फुटेज और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड तक पहुंच गया है।
अमित कुमार की संपत्तियां भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों की नजर नामजद अधिकारी अमित कुमार की संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों पर भी है। खासतौर पर जगाधरी स्थित उनकी आलीशान कोठी को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अमित कुमार की संपत्तियों, बैंक खातों या उनसे जुड़े लोगों के वित्तीय लेनदेन का इस मामले से कोई संबंध है या नहीं। बड़ी रकम के लेनदेन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
नेपाल भागने की आशंका, तलाश तेज
तीनों नामजद बैंक अधिकारियों के नेपाल भागने की आशंका ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण लुकआउट नोटिस जारी कर उनकी तलाश तेज कर दी गई है। जांच एजेंसियां उनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और पिछले कई महीनों की गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि करेंसी चेस्ट में नकली नोट पहुंचे कैसे, छह जुलाई की 111 करोड़ रुपये की खेप में किस-किस की भूमिका थी और करेंसी की गिनती से लेकर जयपुर तक पहुंचने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता हुई या नहीं। मामले में आगे की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
Threesocieties News Desk 



