धनबाद की मुनमुन भट्टाचार्य को राष्ट्रपति ने दिया राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार
धनबाद के बरमसिया मध्य विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में उन्हें पुरस्कार दिया।
HighLights:
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुनमुन भट्टाचार्य को नई दिल्ली में किया सम्मानित
- देश के 48 चयनित शिक्षकों में शामिल हुईं मुनमुन
- प्रशस्ति पत्र, शाल और 50 हजार रुपये की सम्मान राशि मिली
- नवाचारों से सरकारी स्कूल में बदली पढ़ाई की तस्वीर
धनबाद (Threesocieties.com Desk): Teachers' Day 2026: धनबाद के लिए शिक्षक दिवस का दिन गौरव और सम्मान से भरा रहा। राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका एवं अंग्रेजी शिक्षिका मुनमुन भट्टाचार्य को देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
देशभर से चयनित 48 शिक्षकों में मुनमुन भट्टाचार्य का चयन धनबाद और पूरे झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने के अवसर पर उन्हें प्रशस्ति पत्र, शाल और 50 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई।
नवाचारों ने सरकारी स्कूल की बदली तस्वीर
मुनमुन भट्टाचार्य ने सीमित संसाधनों के बावजूद बरमसिया मध्य विद्यालय में शिक्षा को रोचक, व्यावहारिक और बच्चों से जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया। उनके प्रयासों से स्कूल में पढ़ाई को लेकर बच्चों की रुचि बढ़ी और सरकारी विद्यालय की पुरानी छवि को बदलने में मदद मिली। उन्होंने कक्षा में सिर्फ पारंपरिक तरीके से पढ़ाने के बजाय बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी और आसपास के वातावरण को सीखने का माध्यम बनाया। उनके नवाचारों ने विद्यालय को जिले के लिए एक मॉडल स्कूल के रूप में पहचान दिलाई।
‘इंग्लिश अराउंड मी’ से अंग्रेजी का डर हुआ दूर
अंग्रेजी की शिक्षिका के रूप में मुनमुन भट्टाचार्य ने बच्चों के मन से अंग्रेजी भाषा का भय दूर करने के लिए ‘इंग्लिश अराउंड मी’ जैसी गतिविधि शुरू की। इसके तहत बच्चे अपने आसपास की चीजों, दैनिक जीवन और स्थानीय परिवेश से जुड़ी कहानियों के जरिए अंग्रेजी बोलने और पढ़ने का अभ्यास करते हैं। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में केवल अंग्रेजी का ज्ञान बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी बात अंग्रेजी में आत्मविश्वास के साथ रखने के लिए तैयार करना है। इससे बच्चों की भाषा दक्षता और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा मिला।
‘रीडिंग बडी’ सिस्टम बना मददगार
विद्यालय में रीडिंग बडी सिस्टम भी लागू किया गया है। इसके तहत वरिष्ठ बच्चे छोटे बच्चों के पठन-पाठन में सहयोग करते हैं। इससे बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होने के साथ-साथ आपसी सहयोग और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है। यह तरीका खास तौर पर उन बच्चों के लिए उपयोगी साबित हुआ, जिन्हें पढ़ने में अतिरिक्त सहायता की जरूरत होती है।
स्मार्टफोन और डिजिटल कंटेंट से पढ़ाई में तकनीक का इस्तेमाल
मुनमुन भट्टाचार्य ने स्कूल में उपलब्ध संसाधनों के साथ आधुनिक तकनीक को भी शिक्षा का हिस्सा बनाया। स्मार्टफोन, शैक्षणिक वीडियो, दीक्षा पोर्टल और ई-कंटेंट के माध्यम से बच्चों को कक्षा के बाहर भी सीखने के अवसर उपलब्ध कराए गए। वहीं साउंड वॉल, शब्द भंडार, बिग बुक और फ्लैश कार्ड जैसी गतिविधियों के जरिए पढ़ाई को बच्चों के लिए अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया। स्थानीय और अनुपयोगी सामग्रियों से खिलौने और शिक्षण सामग्री तैयार कर उनका इस्तेमाल भी कक्षा में किया गया।
वैदिक गणित और अबेकस से आसान हुई गणित की पढ़ाई
गणित जैसे विषय को बच्चों के लिए आसान और रुचिकर बनाने के लिए विद्यालय में वैदिक गणित और अबेकस की शिक्षा को महत्व दिया गया। सभी बच्चों को इससे जोड़ने का प्रयास किया गया, ताकि गणित के प्रति डर कम हो और बच्चे उसे गतिविधियों के माध्यम से समझ सकें।
बालिकाओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग
विद्यालय में बालिका सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। स्थानीय मार्शल आर्ट प्रशिक्षकों के सहयोग से छात्राओं के लिए नियमित आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य छात्राओं को आत्मविश्वासी बनाने के साथ-साथ उन्हें किसी भी आपात स्थिति में अपनी सुरक्षा के लिए तैयार करना है।
ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए गृह भ्रमण
विद्यालय के शिक्षक केवल स्कूल परिसर तक सीमित नहीं रहते। ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षक नियमित रूप से गृह भ्रमण करते हैं। शिक्षकों के इस प्रयास से बच्चों को स्कूल वापस लाने और उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलती है। शिक्षा से वंचित होने वाले बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने की यह पहल स्कूल की विशेष उपलब्धियों में शामिल है।
पूरे जिले के लिए मॉडल बना बरमसिया स्कूल
जिला शिक्षा पदाधिकारी धनबाद अभिषेक झा ने मुनमुन भट्टाचार्य की उपलब्धि को धनबाद के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि मध्य विद्यालय बरमसिया पूरे जिले के स्कूलों के लिए एक उत्कृष्ट मॉडल है। नवाचारों के कारण विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ी है और यहां कई ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनसे दूसरे विद्यालय भी सीख सकते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुरस्कार मिलना न सिर्फ धनबाद के लिए गर्व की बात है, बल्कि जिले के अन्य शिक्षकों के लिए भी यह प्रेरणा का स्रोत है।
राष्ट्रपति के हाथों सम्मान से बढ़ा धनबाद का गौरव
शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों मुनमुन भट्टाचार्य का सम्मान धनबाद के शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीमित संसाधनों वाले सरकारी स्कूल में नवाचारों के जरिए बच्चों की सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और स्कूल के प्रति रुचि बढ़ाने का उनका प्रयास अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।मुनमुन भट्टाचार्य की यह उपलब्धि बताती है कि बेहतर संसाधनों के साथ-साथ शिक्षक की सोच, नवाचार और समर्पण भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। बरमसिया स्कूल की कहानी अब धनबाद ही नहीं, बल्कि दूसरे सरकारी विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।




