JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, छात्र आंदोलन के बीच CID का बड़ा एक्शन; 2 करोड़ के सौदे का आरोप
JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID ने परीक्षा अनियमितता मामले में गिरफ्तार किया। जांच में TDPL को ठेका दिलाने के बदले 2 करोड़ रुपये के कथित सौदे और 20% कमीशन के आरोप सामने आए हैं।
HighLights:
- JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार
- JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की CID कर रही जांच
- TDPL को ठेका दिलाने के बदले 2 करोड़ रुपये के सौदे का आरोप
- 20 प्रतिशत कमीशन मांगने का भी दावा
रांची (Threesocieties.com Desk): JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं के संचालन में कथित अनियमितता, OMR शीट में छेड़छाड़ और अयोग्य अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने जैसे आरोपों की जांच CID कर रही है। इसी मामले में जांच एजेंसी ने आयोग के तत्कालीन सदस्यों से भी पूछताछ की है।
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CID ने आयोग की तत्कालीन सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद को अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ के लिए बुलाया था।
खियांग्ते के आवास और कार्यालय पर छापेमारी के बाद दिया था इस्तीफा
JPSC मामले में जांच आगे बढ़ने के दौरान CID ने तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कार्यालय और आवास पर भी कार्रवाई की थी। इसके बाद उन्होंने JPSC अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। अब इसी मामले में उनकी गिरफ्तारी ने JPSC विवाद को और गरमा दिया है।
2 करोड़ रुपये के सौदे का आरोप
CID की जांच में सामने आए एक कथित स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार, JPSC परीक्षाओं के संचालन का काम पाने के लिए टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये के सौदे की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने अपने बयान में दावा किया कि एजेंसी को परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने के एवज में एल. खियांग्ते के नाम पर 2 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। इसके अलावा परीक्षा संचालन से होने वाले भुगतान में 20 प्रतिशत कमीशन देने की शर्त की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी।
मुख्य सचिव के कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका भी जांच के घेरे में
इस मामले में CID ने झारखंड के मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करने वाले धर्मेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया था। जांच के अनुसार TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान के आधार पर धर्मेंद्र कुमार की भूमिका सामने आई। आरोप है कि उसने TDPL को JPSC में OTR, OMR, एडमिट कार्ड, उपस्थिति पंजी और प्रिंटिंग जैसे काम दिलाने का भरोसा दिया था। जांच में उसके द्वारा कथित तौर पर 20 से 25 लाख रुपये कमीशन की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है।
रांची के होटल में हुई थी बैठक
CID की जांच के मुताबिक TDPL के प्रतिनिधियों और JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के बीच रांची के एक प्रमुख होटल में बैठक हुई थी। इसके बाद एजेंसी ने JPSC अध्यक्ष और सदस्यों के सामने अपनी प्रस्तुति दी। जांच एजेंसी के अनुसार बाद की बैठकों में भी TDPL के प्रतिनिधियों और संबंधित लोगों के बीच बातचीत हुई। आरोप है कि इसी दौरान परीक्षा संचालन का ठेका हासिल करने के लिए कथित आर्थिक लेन-देन की शर्तों पर चर्चा हुई।
जून 2025 में TDPL को मिला था परीक्षा संचालन का काम
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार TDPL को जून 2025 में JPSC की परीक्षाओं के संचालन से संबंधित काम मिला था। इसके बाद 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ी। 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए कुल 103 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। प्रारंभिक परीक्षा के बाद 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया। इसके बाद परीक्षा परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों में सवाल उठने लगे।
रिजल्ट के बाद शुरू हुआ था विवाद
14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया और परिणाम को लेकर सवाल उठाए। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा में पारदर्शिता नहीं बरती गई।मामला धीरे-धीरे छात्र आंदोलन में बदल गया और JPSC-JSSC से जुड़े विवादों के बीच सरकार पर भी दबाव बढ़ा। इसी बीच CID की जांच तेज हुई और अब पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी से मामला और गंभीर हो गया है।
छात्र आंदोलन के बीच गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन पहले से जारी है। ऐसे समय में JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। छात्र संगठन लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब CID की कार्रवाई के बाद छात्रों की आगे की रणनीति पर भी नजर रहेगी।
आगे क्या?
एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद CID इस मामले में कथित आर्थिक लेन-देन, परीक्षा संचालन का ठेका, OMR और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका समेत अन्य पहलुओं की जांच आगे बढ़ा सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच में सामने आए आरोपों और बयानों की पुष्टि किस स्तर तक होती है और इस मामले में आगे किन लोगों पर कार्रवाई होती है। न्यायालय में पेशी के बाद मामले की अगली कानूनी दिशा भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।
नोट: इस खबर में उल्लिखित आर्थिक लेन-देन और कमीशन संबंधी बातें जांच एजेंसी के सामने दिए गए कथित बयानों/जांच में सामने आए आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालयीन प्रक्रिया में होगी।




