बोकारो स्टील प्लांट गेट जाम पर हाई कोर्ट सख्त, गेट खुले, 3000 कर्मियों को मिली राहत
बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेट जाम होने पर झारखंड हाई कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की। DC को गेट खुलवाने का आदेश दिया। आंदोलन से 3000 कर्मचारी फंसे थे। जानिए पूरा मामला।
HighLights:
- बोकारो स्टील प्लांट के सभी प्रमुख गेट जाम होने पर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।
- रविवार को विशेष सुनवाई कर बोकारो डीसी को गेट खुलवाने और कर्मचारियों की आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश
- विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलन के कारण करीब 3,000 कर्मचारी प्लांट के अंदर फंस गए थे
- गेट जाम होने से उत्पादन, आवाजाही और माल की ढुलाई प्रभावित हुई
- प्रशासन ने धारा 144 लागू कर प्रदर्शनकारियों को हटाया और गेट खुलवाकर स्थिति सामान्य की
रांची/बोकारो(Threesocieties.com Desk): बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों को जाम किए जाने और संयंत्र का कामकाज प्रभावित होने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को विशेष सुनवाई की गई। अदालत ने बोकारो के उपायुक्त (DC) को तत्काल हस्तक्षेप कर गेट खुलवाने और प्लांट में कर्मचारियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए निषेधाज्ञा लागू की और प्लांट के प्रवेश द्वारों को खुलवाया। इसके बाद संयंत्र के भीतर और बाहर की स्थिति सामान्य करने की कार्रवाई की गई।
गेट जाम होने के कारण करीब 3,000 कर्मचारी प्लांट के अंदर फंस गए थे। प्रवेश द्वार अवरुद्ध रहने से कर्मचारियों की आवाजाही के साथ उत्पादन और माल की ढुलाई भी प्रभावित हुई थी। इस घटनाक्रम ने औद्योगिक प्रतिष्ठान की सुरक्षा, कर्मचारियों की आवाजाही और विस्थापितों की नियोजन संबंधी मांगों को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रविवार को हाई कोर्ट ने की विशेष सुनवाई
बोकारो स्टील प्लांट के गेट जाम होने और कामकाज प्रभावित होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करने को कहा।
सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त ऑनलाइन अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने उनसे मामले में जवाब भी तलब किया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्लांट के सभी गेट खुलवाए जाएं और कर्मचारियों के आने-जाने तथा काम पर पहुंचने में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए। सेल (SAIL) की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन ने खुलवाए गेट
अदालत के निर्देश के बाद बोकारो जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज की। प्लांट के मुख्य द्वार के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संबंधी लागू प्रावधानों के तहत निषेधाज्ञा का आदेश जारी किया गया। प्रशासन ने बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह आदेश 18 अक्टूबर की सुबह पांच बजे से अगले आदेश तक प्रभावी रखा गया।
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों को गेटों से हटाया गया और प्रवेश द्वार खुलवाए गए। इसके बाद प्लांट में फंसे कर्मचारियों की आवाजाही बहाल करने की दिशा में कदम उठाए गए। गेट जाम के कारण पैदा हुई असामान्य स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और प्लांट प्रबंधन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
क्या है बोकारो स्टील प्लांट गेट जाम का पूरा मामला?
बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ पिछले आठ दिनों से आंदोलन कर रहा था। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग विस्थापितों को रोजगार देने से जुड़ी है। उनका कहना है कि प्लांट के निर्माण के लिए जिन लोगों की जमीन ली गई, उनके परिवारों को रोजगार और अन्य अधिकार मिलने चाहिए। आंदोलन के दौरान शनिवार को स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने बीएसएल के मुख्य द्वार समेत प्रमुख प्रवेश द्वारों को जाम कर दिया। गेटों पर आंदोलनकारियों के जमा रहने के कारण कर्मचारियों की आवाजाही बाधित हो गई।
स्थायी और ठेका कर्मचारियों को प्लांट में प्रवेश करने में परेशानी हुई। वहीं, प्लांट के भीतर मौजूद करीब 3,000 कर्मचारी बाहर नहीं निकल पा रहे थे। गेटों के अवरुद्ध रहने से संयंत्र के भीतर और बाहर की गतिविधियों पर असर पड़ा। उत्पादन और माल की ढुलाई भी प्रभावित हुई। इस घटनाक्रम के बाद मामला केवल नियोजन की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों के संचालन और कर्मचारियों की सुरक्षा व आवाजाही का विषय भी बन गया।
आठ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे विस्थापित
विस्थापित अप्रेंटिस संघ के सदस्य नियोजन की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका आरोप है कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद उन्हें ठोस आश्वासन और समाधान नहीं मिल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब भी आंदोलन तेज होता है, तब प्रबंधन और प्रशासन की ओर से बातचीत का रास्ता अपनाया जाता है। लेकिन वार्ता के बाद भी उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हो पाता। इसी नाराजगी के कारण आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया और शनिवार को प्रवेश द्वार जाम कर दिए गए। गेट जाम होने से कर्मचारियों, अधिकारियों और प्लांट की नियमित गतिविधियों पर असर पड़ा। मामले की गंभीरता बढ़ने के बाद हाई कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई कर प्रशासन को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया।
विस्थापितों ने बीएसएल प्रबंधन और प्रशासन पर लगाए आरोप
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विस्थापित नेताओं वकील अग्रवाल, सुनील महतो, चौहान महतो और चंद्रकांत महतो ने बीएसएल प्रबंधन तथा जिला प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि विस्थापित परिवारों ने अपने पूर्वजों की जमीन देकर इस औद्योगिक संयंत्र की स्थापना में योगदान दिया। इसके बावजूद कई परिवार आज भी रोजगार और आर्थिक सुरक्षा की समस्या से जूझ रहे हैं।
उनका आरोप है कि नियोजन की मांग को लेकर बार-बार आंदोलन करना पड़ता है, लेकिन बातचीत और आश्वासनों के बाद भी स्थायी समाधान नहीं निकलता। विस्थापित नेताओं ने चतुर्थ वर्गीय पदों पर मिलने वाले आरक्षण से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। उनका दावा है कि इस व्यवस्था को कमजोर किए जाने से विस्थापित परिवारों के हित प्रभावित हुए हैं। हालांकि, आंदोलनकारियों के इन आरोपों और दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित नियमों, प्रबंधन के पक्ष और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों से भी की गई अपील
गेट जाम के दौरान प्रशासनिक भवन से मुख्य द्वार की ओर जाने वाली सड़क पर बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी फंसे नजर आए। इस बीच, कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने ड्यूटी पर जा रहे मजदूरों को गुलाब के फूल देकर एक दिन ड्यूटी पर नहीं जाने की अपील की। इन नेताओं की अपील का उद्देश्य विस्थापितों की नियोजन संबंधी मांगों के समर्थन में दबाव बनाना बताया गया। दूसरी ओर, गेटों के बंद रहने से कर्मचारियों की नियमित आवाजाही और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होती रहीं।
अब 28 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
बोकारो स्टील प्लांट गेट जाम मामले में झारखंड हाई कोर्ट की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। रविवार की सुनवाई में अदालत ने प्रशासन को तत्काल गेट खुलवाने और कर्मचारियों की आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अब आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े तथ्यों, प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर नजर रहेगी। विस्थापित अप्रेंटिस संघ की नियोजन संबंधी मांगों पर क्या समाधान निकलता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद प्लांट के गेट खुलवाए गए हैं और स्थिति सामान्य करने की कार्रवाई की गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर विस्थापितों की रोजगार संबंधी मांगों, औद्योगिक गतिविधियों की निरंतरता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को सामने ला दिया है।




