जंतर-मंतर से संसद तक हंगामा: CJP समर्थकों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के बीच पुलिस ने खाली कराया प्रदर्शन स्थल

दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद तक CJP के प्रदर्शन के दौरान भारी बवाल हुआ। बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़े प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज किया। बाद में CJP प्रतिनिधिमंडल ने जेपी नड्डा से मुलाकात कर तीन प्रमुख मांगें रखीं।

जंतर-मंतर से संसद तक हंगामा: CJP समर्थकों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के बीच पुलिस ने खाली कराया प्रदर्शन स्थल
संसद मार्च बना संग्राम, बैरिकेड तोड़े, आंसू गैस चली।

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  • जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान CJP समर्थकों और पुलिस में हिंसक झड़प
  • प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की
  • पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया
  • CJP प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर तीन मांगें रखीं

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): राजधानी दिल्ली में सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च के दौरान उस समय हालात तनावपूर्ण हो गए, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर संसद की ओर कूच करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने पहले समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर आंसू गैस के गोले दागे गए और लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर और संसद मार्ग दोनों स्थानों से हटा दिया गया।

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पुलिस कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है। झड़प के बाद संसद भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। कुछ समय के लिए संसद के मुख्य प्रवेश द्वार को भी बंद रखा गया, जबकि उस समय संसद का सत्र चल रहा था और प्रधानमंत्री सहित कई सांसद सदन के भीतर मौजूद थे।

बैरिकेड तोड़ संसद की ओर बढ़ी भीड़

सुबह करीब 10 बजे प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ते हुए संसद मार्ग की ओर बढ़ गए। सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी आगे निकल गए। कुछ प्रदर्शनकारी संसद भवन के बेहद करीब तक पहुंच गए, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल अतिरिक्त बल तैनात कर दिया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का लाठीचार्ज किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी अलग-अलग समूहों में बंटकर आसपास के इलाकों में फैल गए।

जनपथ और कनॉट प्लेस में भी हंगामा

झड़प के बाद जनपथ और कनॉट प्लेस क्षेत्र में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव देखने को मिला। पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया। कई पुलिस वैनों पर चढ़कर उन्हें क्षतिग्रस्त करने की भी जानकारी सामने आई। प्रदर्शन के कारण नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पहाड़गंज मार्ग सहित कई इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम लग गया। बड़ी संख्या में यात्रियों को पैदल चलकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।

जंतर-मंतर का मंच भी हटाया गया

स्थिति सामान्य करने के बाद पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल को भी खाली करा दिया। वहां लगाए गए टेंट और मंच को हटाया गया तथा प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया गया। CJP ने दावा किया था कि उसके नेता अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया है, हालांकि बाद में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि दीपके को न तो हिरासत में लिया गया और न ही गिरफ्तार किया गया।

जेपी नड्डा से मिला CJP प्रतिनिधिमंडल

हंगामे के बीच CJP का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं— सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। आत्महत्या करने वाले सभी NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा। बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि जेपी नड्डा ने उनकी मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसी भी मांग पर तत्काल कोई ठोस निर्णय या वादा नहीं किया गया।

संसद परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई

प्रदर्शन के दौरान संसद भवन और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गईं। बाद में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद संसद परिसर के आसपास सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू हो गईं।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। वहीं CJP ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बल प्रयोग कर दबाने की कोशिश की गई। यह घटनाक्रम राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन और राजनीतिक टकराव को लेकर नई बहस छेड़ सकता है। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।