पटना में बनेगा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, ₹4,000 करोड़ का निवेश और ₹8,000 करोड़ की कमाई का प्लान

Patna World Trade Center: पटना में NBCC वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बनाएगा। ₹4,000 करोड़ निवेश और ₹8,000 करोड़ राजस्व का अनुमान। जानें सम्राट चौधरी के पटना विकास के मेगा प्लान की पूरी जानकारी।

पटना में बनेगा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, ₹4,000 करोड़ का निवेश और ₹8,000 करोड़ की कमाई का प्लान
सम्राट चौधरी ने विकास का मास्टर प्लान किया तैयार

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  • पटना में NBCC बनाएगा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, आधुनिक कारोबारी सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा
  • बिहार म्यूजियम के सामने नेहरू पथ समेत कई सरकारी भूखंडों के पुनर्विकास की तैयारी
  • करीब ₹4,000 करोड़ के निवेश की संभावना, जबकि ₹8,000 करोड़ तक राजस्व का अनुमान
  • पाटलिपुत्र टाउनशिप में करीब 2,000 एकड़ भूमि पर व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करने का प्लान

पटना (Threesocieties.com Desk):  बिहार की राजधानी पटना को आधुनिक और वैश्विक स्तर के शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने बड़ा प्लान तैयार किया है। पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही शहर के कई महत्वपूर्ण सरकारी भूखंडों और पुरानी सरकारी परिसंपत्तियों का पुनर्विकास किया जाएगा। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब ₹4,000 करोड़ के निवेश की संभावना जताई गई है, जबकि लगभग ₹8,000 करोड़ के राजस्व सृजन का अनुमान लगाया गया है।

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में गुरुवार को लोक सेवक आवास स्थित 'संकल्प' सभागार में पटना के विभिन्न भूमि खंडों के पुनर्विकास एवं निर्माण कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में पटना के सुनियोजित विकास, सरकारी जमीन के बेहतर इस्तेमाल और आधुनिक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

NBCC बनाएगा पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर

बैठक में नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (NBCC) की ओर से पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया। सरकार की कोशिश है कि राजधानी में ऐसे बड़े और आधुनिक प्रोजेक्ट विकसित किए जाएं, जिससे पटना की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो तथा व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिले। मुख्यमंत्री ने ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। NBCC की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण और पुनर्विकास के लिए मॉडल तैयार किए जाने की बात भी बैठक में सामने आई।

बिहार म्यूजियम के सामने की जमीन का भी होगा विकास

सरकार ने पटना की कई महत्वपूर्ण सरकारी जमीनों को नए सिरे से विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें बिहार म्यूजियम के सामने नेहरू पथ स्थित भूखंड भी शामिल है। इसके अलावा गर्दनीबाग स्थित भूखंड, भूतनाथ सेक्टर-6 और बोरिंग कैनाल रोड स्थित सरकारी जमीन के पुनर्विकास की योजना पर भी चर्चा हुई। इन स्थानों पर इलाके की जरूरत और उपलब्ध भूमि के अनुसार नए निर्माण एवं आधुनिक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

पाटलिपुत्र टाउनशिप में 2,000 एकड़ पर व्यावसायिक क्षेत्र

बैठक में पाटलिपुत्र टाउनशिप को लेकर भी बड़ा निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने करीब 2,000 एकड़ भूमि पर टाउनशिप के निर्माण एवं विकास की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इसके अलावा अन्य टाउनशिप के लिए करीब 1,000 एकड़ भूमि को ध्यान में रखते हुए भी विकास की योजना बनाने का निर्देश दिया गया है। सरकार की योजना इन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और आधुनिक शहरी सुविधाओं को विकसित करने की है।

₹4,000 करोड़ निवेश, ₹8,000 करोड़ राजस्व का अनुमान

प्रस्तावित योजनाओं के मुताबिक पटना में विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से करीब ₹4,000 करोड़ के निवेश की संभावना है। वहीं, इन परियोजनाओं से लगभग ₹8,000 करोड़ के राजस्व सृजन का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, ये आंकड़े फिलहाल प्रस्तावित परियोजनाओं और प्रारंभिक कार्ययोजना के आधार पर अनुमानित हैं। जमीन के चिह्नीकरण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद योजनाओं का वास्तविक स्वरूप और वित्तीय मॉडल स्पष्ट होगा।

पुराने सरकारी भवनों की जगह होंगे नए निर्माण

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां सरकारी भवन काफी पुराने या जर्जर हो चुके हैं, वहां जरूरत के अनुसार पुनर्निर्माण और नए निर्माण की प्रक्रिया अपनाई जाए। सरकार का फोकस सिर्फ नई जमीन पर निर्माण करने के बजाय पहले से उपलब्ध सरकारी परिसंपत्तियों का अधिकतम और बेहतर उपयोग करने पर है। इससे सरकारी जमीन का प्रभावी इस्तेमाल होने के साथ-साथ शहर में आधुनिक भवन और बेहतर आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।

पटना के साथ इन शहरों में भी सरकारी जमीन की तलाश

यह विकास योजना सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार ने गया, भागलपुर, बेगूसराय और दरभंगा जैसे प्रमुख शहरों में भी उपयुक्त सरकारी जमीन चिह्नित करने और वहां विकास की समेकित योजना तैयार करने पर जोर दिया है। इन शहरों में उपलब्ध सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों का आकलन कर उनकी जरूरत के मुताबिक आधुनिक परियोजनाओं को विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

पटना के लिए तैयार होगा मास्टर प्लान

मुख्यमंत्री ने पटना के अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध सरकारी भूमि को चिह्नित कर मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य सरकारी जमीन के इस्तेमाल को बिखरे हुए तरीके से करने के बजाय एक व्यापक और सुनियोजित योजना के तहत विकास करना है। सरकार का मानना है कि जमीन की उपलब्धता, इलाके की जरूरत और भविष्य की शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं की योजना तैयार की जाए, ताकि लंबे समय तक इसका फायदा मिल सके।

आधुनिक तकनीक और 'जीरो वेस्ट मॉडल' पर जोर

मुख्यमंत्री ने विकास एवं निर्माण परियोजनाओं में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ-साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। निर्माण कार्यों में 'जीरो वेस्ट मॉडल' अपनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसका उद्देश्य निर्माण के दौरान संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना और कचरे को न्यूनतम स्तर पर रखना है।

जल्द चिह्नित होगी जमीन, तैयार होगी विस्तृत कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि का जल्द से जल्द चिह्नीकरण करने और उसके बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्माण एवं पुनर्विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य पटना की सरकारी जमीन और परिसंपत्तियों का अधिकतम उपयोग करते हुए राजधानी को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, टाउनशिप, सरकारी भवनों के पुनर्विकास और व्यावसायिक क्षेत्रों के निर्माण की योजनाओं के अमल में आने के बाद पटना के शहरी स्वरूप में बड़े बदलाव की उम्मीद है।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में नगर विकास एवं आवास व सूचना प्रावैधिकी मंत्री नीतीश मिश्रा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, ग्रामीण कार्य सह सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अनिमेष परासर, पटना नगर आयुक्त यशपाल मीणा, NBCC के चेयरमैन डॉ. केपी महादेव स्वामी सहित NBCC के अन्य वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से लेकर टाउनशिप और सरकारी परिसंपत्तियों के पुनर्विकास तक की प्रस्तावित योजनाएं राजधानी के शहरी विकास को नई दिशा देने वाली हैं। अब इन परियोजनाओं के लिए जमीन चिह्नित करने, विस्तृत मॉडल तैयार करने और समयबद्ध तरीके से कार्ययोजना को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी।