19 चालान, ₹1.75 लाख जुर्माना फिर भी दौड़ती रही बस, 9 मौतों का जिम्मेदार कौन?
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। बस पर 1.75 लाख रुपये के 19 चालान लंबित थे। इंजन की शिकायत, कम उम्र के चालक और रेट्रोफिटिंग समेत कई नियम उल्लंघन सामने आए।
HighLights:
- 1.75 लाख रुपये के 19 चालान लंबित, फिर भी सड़क पर दौड़ती रही बस
- इंजन से आवाज और जलने की बदबू की शिकायत के बावजूद बस नहीं रोकी गई
- जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलाने पर भी हुआ था चालान
- फ्यूल चेंज, रेट्रोफिटिंग और परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन के भी चालान
नोएडा (Threesocieties.com Desk): यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के बाद बस के संचालन से जुड़ी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। हादसे के बाद सामने आए रिकॉर्ड के मुताबिक, बस के खिलाफ अलग-अलग यातायात नियमों के उल्लंघन में कुल 19 चालान दर्ज थे, जिनकी कुल रकम करीब 1.75 लाख रुपये बताई गई है। 24 सितंबर 2026 तक इन चालानों के लंबित रहने की बात सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बस के खिलाफ लगातार नियम उल्लंघन सामने आ रहे थे और चालान भी किए जा रहे थे, तो आखिर बस को सड़क पर चलने से रोकने या उसकी तकनीकी स्थिति की गंभीर जांच कराने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जलने की बदबू के बाद भी नहीं रोकी गई बस
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के संबंध में यात्री सुनील कुमार की पुलिस शिकायत में ड्राइवर और कंडक्टर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, बस जब नोएडा से आगरा जाने वाले मार्ग पर यमुना एक्सप्रेसवे के करीब 33 किलोमीटर बिंदु पर पहुंची, तब ड्राइवर कैबिन की तरफ से जलने जैसी बदबू आने लगी। कुछ यात्रियों ने इसकी जानकारी ड्राइवर और कंडक्टर को दी। आरोप है कि ड्राइवर ने इसे सामान्य बताते हुए बस नहीं रोकी।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ड्राइवर और कंडक्टर के कैबिन में बीड़ी/सिगरेट पीने की बात कही गई। यात्रियों का आरोप है कि जब उन्होंने बस रोकने के लिए कहा तो उन्हें कथित तौर पर यह जवाब दिया गया कि “मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे।” यह बयान फिलहाल यात्री की शिकायत में लगाए गए आरोप के रूप में सामने आया है।
ड्राइवर की सीट के पास लगी आग
शिकायत के अनुसार, कुछ ही देर बाद ड्राइवर की सीट के पास से अचानक तेज आग की लपटें निकलने लगीं। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। आग और धुआं तेजी से बस के अंदर फैलने लगा। बस रुकने के बाद कई यात्रियों ने किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन कुछ यात्री आग और धुएं के बीच बस में फंस गए। हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई लोग झुलस गए।घायलों को उपचार के लिए कैलाश अस्पताल, जेवर ले जाया गया। यात्री सुनील कुमार की शिकायत के आधार पर जेवर थाने में ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
हादसे से पहले भी इंजन को लेकर शिकायत
इस हादसे के बाद बस के पुराने रिकॉर्ड ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के मुताबिक, बस के इंजन से आवाज आने की शिकायत पहले भी की जाती रही थी। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा। सवाल यह है कि तकनीकी खराबी की शिकायत सामने आने के बाद बस की फिटनेस की गंभीर जांच हुई या केवल चालान काटकर मामला आगे बढ़ता रहा। यदि वाहन लगातार तकनीकी और यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहा था, तो उसे सड़क से हटाने की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी, यह जांच का विषय है।
कम उम्र के चालक से बस चलाने पर भी हुआ था चालान
बस के संचालन में नियमों की अनदेखी का एक और मामला जनवरी 2026 का बताया जा रहा है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 वर्ष से कम उम्र के चालक से बस चलवाने के मामले में चिल्ला में चालान किया गया था। इसके बावजूद बस का संचालन बंद नहीं हुआ। यह मामला भी हादसे के बाद यातायात नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग को लेकर भी चालान
जून 2025 में बस के खिलाफ फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से संबंधित नियमों के उल्लंघन पर भी चालान किया गया था। इसके अलावा परमिट से जुड़े उल्लंघनों के भी चालान दर्ज हैं।
बस की बॉडी को लेकर भी स्थिति सवालों के घेरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आरसी में बस का रंग काला दर्ज था, जबकि मौके पर बस पीले-सफेद रंग की बताई जा रही है। इस तरह के दस्तावेजी और वाहन संबंधी अंतर की भी जांच की जरूरत है।
19 चालान, 1.75 लाख रुपये और फिर भी सड़क पर बस
हादसे के बाद सबसे अहम तथ्य यह सामने आया है कि बस के खिलाफ अलग-अलग नियमों के उल्लंघन में कुल 19 चालान दर्ज थे। इनकी कुल राशि करीब 1.75 लाख रुपये बताई गई है।
इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा। इससे यह सवाल उठता है कि क्या लगातार चालान काटना ही यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का अंतिम चरण था, या गंभीर और लगातार उल्लंघन की स्थिति में वाहन को सड़क से हटाने, फिटनेस की जांच कराने और परमिट संबंधी कार्रवाई की भी जरूरत थी?
हादसे की जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि बस की फिटनेस, परमिट, रेट्रोफिटिंग, चालक की पात्रता और पिछले चालानों पर संबंधित विभागों ने क्या कार्रवाई की थी।
जिम्मेदारी सिर्फ ड्राइवर तक सीमित है या व्यवस्था की भी?
यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के बाद जांच का दायरा सिर्फ ड्राइवर और कंडक्टर तक सीमित नहीं रहने की मांग उठ रही है। यात्रियों की शिकायत में ड्राइवर और कंडक्टर पर लापरवाही के आरोप हैं और पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
लेकिन दूसरी तरफ बस के पुराने यातायात रिकॉर्ड भी कई सवाल सामने ला रहे हैं। यदि किसी वाहन के खिलाफ बार-बार नियम उल्लंघन के चालान हो रहे थे, तो उसकी फिटनेस और सड़क पर संचालन की निगरानी किस तरह हुई, यह भी जांच का हिस्सा होना चाहिए।
हादसे के बाद सक्रिय हुई सरकारी मशीनरी
बस में आग लगने और 9 लोगों की मौत के बाद पुलिस, यातायात, अग्निशमन और प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हुई। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि हादसे से पहले सामने आ चुकी शिकायतों और नियम उल्लंघनों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
एक तरफ बस के खिलाफ 19 चालान दर्ज होते रहे, दूसरी तरफ उसका संचालन जारी रहा। ऐसे में यह हादसा केवल एक वाहन में आग लगने की घटना नहीं, बल्कि वाहन सुरक्षा, फिटनेस जांच, यातायात नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन गया है।
अब जांच में यह सामने आना महत्वपूर्ण होगा कि बस की तकनीकी स्थिति क्या थी, उसके फिटनेस और परमिट दस्तावेज सही थे या नहीं, पिछले चालानों पर क्या कार्रवाई हुई और हादसे से पहले यात्रियों द्वारा बताई गई जलने की बदबू को ड्राइवर-कंडक्टर ने क्यों नजरअंदाज किया।
यमुना एक्सप्रेसवे पर 9 मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—जब बस के खिलाफ लगातार नियम उल्लंघन सामने आ रहे थे और 1.75 लाख रुपये के 19 चालान दर्ज थे, तो आखिर उसे सड़क पर चलने से रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?




