24 घंटे में बदला हाईकोर्ट का फैसला: Rahul Gandhi के खिलाफ FIR पर लगी रोक, नोटिस के बिना कार्रवाई नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर 24 घंटे में रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस किसी भी आरोपी पर कार्रवाई नहीं हो सकती।

24 घंटे में बदला हाईकोर्ट का फैसला: Rahul Gandhi के खिलाफ FIR पर लगी रोक, नोटिस के बिना कार्रवाई नहीं
राहुल गांधी, एस. विग्नेश शिशिर, हाईकोर्ट (फाइल फोटो)।

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लखनऊ (Threesocieties.com Desk): Allahabad High Court की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में महज 24 घंटे के भीतर यू-टर्न लेते हुए कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi के खिलाफ FIR दर्ज करने के अपने पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस जारी किए किसी भी प्रस्तावित अभियुक्त के खिलाफ FIR का आदेश देना उचित नहीं है।

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क्या है पूरा मामला?

कथित दोहरी नागरिकता के मामले में पहले कोर्ट ने ओपन कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश सुनाया था। लेकिन आदेश के टाइप और हस्ताक्षर से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने 2014 के पूर्ण पीठ के फैसले का हवाला देते हुए पाया कि ऐसे मामलों में प्रस्तावित अभियुक्त को नोटिस देना अनिवार्य है। बिना नोटिस के सीधे FIR का आदेश देना विधिक रूप से उचित नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने अपने ही आदेश पर रोक लगा दी।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याची, केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से पूछा था कि क्या विपक्षी संख्या एक (राहुल गांधी) को नोटिस देना जरूरी है। अधिवक्ताओं ने कहा कि नोटिस की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश सुना दिया गया लेकिन बाद में कानूनी स्थिति स्पष्ट होने पर आदेश रोक दिया गया।

अगली सुनवाई कब?

न्यायालय ने कहा की इस विधिक स्थिति को देखते हुए बिना विपक्षी संख्या एक (राहुल गांधी) को नोटिस से पहले मामले को निर्णित करना उचित नहीं है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए  20 अप्रैल की तारीख तय की गई है।

याचिका में क्या आरोप?

कर्नाटक निवासी याची एस. विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें शामिल हैं: भारतीय न्याय संहिता के तहत आरोप, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम व पासपोर्ट अधिनियम। हालांकि, निचली अदालत इस याचिका को पहले ही खारिज कर चुकी है।

 क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया में नोटिस की अनिवार्यता को फिर से स्थापित करता है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसे सुनवाई का अवसर देना जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक निवासी याची एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर न्यायालय ने शुक्रवार को राहुल गांधी के विरुद्ध कथित दोहरी नागरिकता के मामले में एफआईआर दर्ज कर विवेचना का आदेश ओपन कोर्ट में डिक्टेट किया था। याची ने राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम तथा पासपोर्ट अधिनियम के तहत विभिन्न गंभीर आरोप लगाए हैं और मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। याची के प्रार्थना पत्र को निचली अदालत खारिज कर चुकी है।