26 दिन का संघर्ष, जश्न की आभार यात्रा: रांची में झूमे हजारों छात्र, CM हेमंत को कहा धन्यवाद; 60 दिन का अल्टीमेटम

रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिन बाद छात्र आंदोलन 60 दिनों के लिए स्थगित हुआ। छात्रों ने आभार यात्रा निकालकर CM हेमंत सोरेन का धन्यवाद किया और न्यायिक जांच के लिए 60 दिन का अल्टीमेटम दिया।

26 दिन का संघर्ष, जश्न की आभार यात्रा: रांची में झूमे हजारों छात्र, CM हेमंत को कहा धन्यवाद; 60 दिन का अल्टीमेटम
ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरके छात्र, अबीर-गुलाल और फूलों की वर्षा से बदला माहौल।

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   HighLights:

  • 26 दिनों से जारी JPSC-JSSC छात्र आंदोलन का पहला चरण 60 दिनों के लिए स्थगित
  • न्यायिक जांच की मांग पर सरकार को 60 दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आंदोलन
  • 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई को छात्रों ने बताया संघर्ष की बड़ी उपलब्धि
  • ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरके छात्र, अबीर-गुलाल और फूलों की वर्षा से बदला माहौल।

रांची( Threesocieties.com Desk):  JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार, 19 अगस्त को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लंबे संघर्ष के बाद शाम करीब 4:30 बजे आंदोलन के पहले चरण को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। हालांकि छात्रों ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन की समाप्ति नहीं, बल्कि 60 दिनों के लिए विराम है।

आंदोलन स्थगित होने के बाद राजधानी रांची में छात्रों ने ऐतिहासिक आभार यात्रा निकाली। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुई यात्रा मेन रोड होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक पहुंची। यहां हजारों छात्र-छात्राओं ने ढोल-नगाड़ों, नारेबाजी और आतिशबाजी के बीच अपनी खुशी का इजहार किया। अल्बर्ट एक्का चौक पर पूरा माहौल उत्सव में बदल गया। छात्रों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया, जमकर आतिशबाजी की और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते नजर आए। यात्रा में शामिल युवाओं पर कई जगह फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर स्वागत किया गया।

60 दिन का अल्टीमेटम, न्यायिक जांच पर नजर

छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग अभी भी बरकरार है। सरकार को इस दिशा में ठोस कार्रवाई के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। छात्र नेता उमेश प्रसाद ने कहा कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसे दो महीने के लिए स्थगित किया गया है। यदि 60 दिनों के भीतर न्यायिक जांच की दिशा में ठोस पहल नहीं होती है तो छात्र फिर से आंदोलन शुरू करेंगे। आंदोलनकारी छात्रों के मुताबिक सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों को लेकर सकारात्मक आश्वासन मिला है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से किए जाने वाले फैसलों और उनके क्रियान्वयन पर रहेगी।

दो अनशनकारी छात्रों का तुड़वाया गया अनशन

आंदोलन स्थगित करने के साथ ही दो अनशनकारी छात्रों का अनशन भी पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में तुड़वाया गया। पिछले कई दिनों से छात्र अलग-अलग तरीकों से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचा रहे थे। इस आंदोलन में भूख हड़ताल, सत्याग्रह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं रांची पहुंचे और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन का हिस्सा बने।

45 परीक्षाओं पर कार्रवाई को बताया बड़ी उपलब्धि

छात्रों के अनुसार, आंदोलन के बाद कुल 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई हुई है। इनमें 22 परीक्षाएं रद्द की गईं, 17 परीक्षाओं में जांच का निर्णय लिया गया और छह परीक्षाएं स्थगित की गई हैं। छात्र नेताओं ने इसे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि लंबे संघर्ष का उद्देश्य केवल किसी एक परीक्षा का मामला नहीं था, बल्कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना था।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समर्थन में लगे नारे

आभार यात्रा के दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार के समर्थन में नारे लगाए। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए छात्र सरकार के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते नजर आए। छात्रों का कहना था कि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से लिया और परीक्षा व्यवस्था में सुधार तथा पारदर्शिता की दिशा में फैसले किए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित होंगी।

अल्बर्ट एक्का चौक पर आतिशबाजी, अबीर-गुलाल से जश्न

आभार यात्रा के अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचते ही माहौल पूरी तरह जश्न में बदल गया। छात्रों ने जमकर आतिशबाजी की। एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया गया और कई जगह यात्रा में शामिल युवाओं पर फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की गई। ढोल और नगाड़ों की आवाज के बीच छात्र-छात्राएं नाचते नजर आए। लंबे आंदोलन के बाद मिले सकारात्मक फैसलों को लेकर युवाओं में खासा उत्साह दिखा। यात्रा के दौरान जयपाल सिंह मुंडा और शहीद अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि भी दी गई।

राजनीतिक दलों और संगठनों को भी धन्यवाद

छात्र नेताओं ने आंदोलन के दौरान समर्थन देने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रति भी आभार जताया। इनमें झामुमो, कांग्रेस, भाजपा, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम), आजसू, सीपीआई सहित अन्य दल और संगठन शामिल रहे। छात्रों ने रांची जिला प्रशासन, मीडिया, सामाजिक संगठनों और उन लोगों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों के लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया।

देवेंद्र नाथ महतो बोले- यह सामूहिक संघर्ष की सफलता

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में निकली आभार यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लंबे समय तक संघर्ष करने वाले छात्रों और अभ्यर्थियों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।उनके मुताबिक संघर्ष की शुरुआत दो जुलाई से हुई थी। बाद में 25 जुलाई से बापू वाटिका में सत्याग्रह शुरू किया गया, जिसे आगे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में स्थानांतरित किया गया। स्टेडियम में कई दिनों तक सत्याग्रह के बाद भूख हड़ताल भी शुरू हुई।

छात्र नेताओं ने कहा- अब असली परीक्षा फैसलों के क्रियान्वयन की

छात्र नेता राधे कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों की बात गंभीरता से सुनी है। वहीं उमेश प्रसाद ने कहा कि लंबे आंदोलन के बाद सरकार की ओर से सकारात्मक फैसला आया है और उम्मीद है कि आगे सभी भर्ती परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से होंगी। रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्रों ने अपने भविष्य के लिए संघर्ष किया और सरकार ने उनकी आवाज सुनी। विवेक पंडित ने कहा कि छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए लिए गए फैसलों से नई उम्मीद जगी है। अमन साहू ने भी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की उम्मीद जताई।

अब 60 दिनों पर टिकी नजर

26 दिनों के आंदोलन के बाद राजधानी में भले ही जश्न का माहौल हो, लेकिन छात्रों ने अपनी सबसे अहम मांग को लेकर निगाहें सरकार पर टिका दी हैं। अगले 60 दिन अब बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि इस अवधि में न्यायिक जांच को लेकर ठोस कार्रवाई होती है तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन यदि मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

इस तरह रांची में 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन का पहला चरण फिलहाल थम गया है। स्टेडियम से निकली आभार यात्रा ने संघर्ष के बाद जश्न की तस्वीर जरूर दिखाई, लेकिन अब छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि 60 दिनों में सरकार न्यायिक जांच की दिशा में कितना आगे बढ़ती है।